जाट शिक्षण संस्थाओं में नौकरियों के नाम पर धांधली व 48 लाख रूपये का घोटाला
October 10th, 2018 | Post by :- | 15 Views

रोहतक, 10 अक्तूबर। लोकहित एक्सप्रेस, ब्यूरो चीफ【विकास ओहल्याण】आज स्थानीय मैना पर्यटक केंद्र पर आयोजित एक प्रैस वार्ता को संबोधित करते हुए जाट शिक्षण संस्था के आजीवन सदस्य चंचल नांदल ने कहा कि जाट शिक्षण संस्था स्थित महारानी किशोरी कॉलेज में एक महिला की नियुक्ति के लिए सारे नियम-कायदे ताक पर रख दिये गये। दूसरे अभ्यर्थियों द्वारा उसे सरेआम नकल करते हुए पकडऩे के बावजूद भी अभी तक कोई कार्यवाही न करके कॉलेज प्रशासन ने अनियमितताएं बरती हैं। जबकि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के भी आदेश आ चुके हैं कि अगर इस तरह नकल करता कोई भी अभ्यर्थी पकड़ा जाता है तो उसको दोबारा उस टेस्ट में बैठने की अनुमति नहीं होती तथा उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है। प्रशासन को इसकी सूचना दिये जाने के बावजूद भी निष्पक्ष जांच न होना संदेश के घेरे में आता है।
चंचल नांदल ने कहा कि सी.आर. पोलिटेक्निक में एक बहुत बड़ा ईपीएफ घोटाला हुआ है। इसमें 1982 से 1992 के बीच 105 कर्मचारी कार्यरत थे। इनका ईपीएफ जमा नहीं करवाया गया था। उस पर ईपीएफ विभाग ने उनके ऊपर 1803396 रूपये के करीब ईपीएफ जमा करवाने का कोर्ट से 18-12-2004 को आदेश हुआ। जोकि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की जाट संस्था की ब्रांच के माध्यम से जमा करवा दिया गया। उस वक्त 1982-1992 के बीच के तकरीबन कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके थे। उसकी बजाए संस्था के कर्मचारी डिप्टी सुपरिडेंट, सुपरिडेंट व प्रिंसिपल ने किन्हीं अन्य और कर्मचारियों का 18 लाख रूपया जमा करवा दिया। इसमें जो पेनेल्टी संस्था के ऊपर लगी थी वो पैसा भी गैर कानूनी तरीके से कर्मचारियों के खाते से ले लिया जबकि पैनेल्टी देने का हक नियोक्ता का है। इसके बाद 2012-13 में 1 करोड़ 36 लाख रूपये किन्हीं और कर्मचारियों के अकाउंट में आरटीजीएस के माध्यम से सेंट्रल बैंक की ब्रांच में रिफंड आ गया। जोकि 1 करोड़ 36 लाख बहुत बड़ी रकम थी जिसमें से 48 लाख रूपये की रकम अतिरिक्त थी। फिर डिप्टी व सुपरिंटेंडेंट ने इन कर्मचारियों से बेयरर चैक के रूप में या अपने नाम से वो पैसा कैश करवा लिया। जैसे कि श्री जे.एल. खुराना के रूपये 3,38,328 सेंट्रल बैंक के चैक नं. 020732, दूसरा हरभजन (एच.ओ.डी.) 422245 रूपये चैक नं. 0230742, तीसरा अमीर सिंह गिल (डी.पी.) चैक नं. 007538 5,15,600 रूपये। इसी तरह से डिप्टी सुपरिडेंट व सुपरिडेंट ने 48 लाख रूपया कैश निकलवा लिया और तकरीबन जुलाई 2018 में जब इस घोटाले का पता चला तो एक पंचायती फैसला करके इस पैसे को वापिस देने की बात कही। इस दौरान सुप्रीडंन ने अपनी गलती मानते हुए 20 लाख रूपये वापिस किये। जिसमें से 8 लाख रूपये जाट शिक्षण संस्था के खाते में व 12 लाख 60 हजार रूपये अमीर सिंह गिल, जे.एल. खुराना, पी.के. अग्रवाल, सुशील बाल्याण, एस.एस. डागर, सुरेन्द्र नांदल, राज सिंह हुड्डा सहित कुल 32 कर्मचारियों के खातों में जमा करवा दिया। जोकि कानून के हिसाब से सरासर गलत है। यह पैसा या तो प्रिंसिपल अकाऊंट में जाना था या ईपीएफ विभाग को जाना था। जबकि प्रवीण कुमार ने अपने हिस्से आये तकरीबन 22-23 लाख रूपये देने से मना कर दिये। अब डिप्टी सुपरिडेंट सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हमारी मांग है कि डिप्टी सुपरिडेंट जोकि अब सुपरिडेंट के पद पर पदोन्नत हो चुके हैं उन्हें पदमुक्त किया जाये व इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाते हुए इस दौरान रहे प्रिंसिपल सुशील बाल्याण, बलजीत हुड्डा, सतबीर डागर व 2013 में इस पैसे का लेन-देन होते वक्त पद पर रहे पूर्व प्रधान मास्टर सुरेन्द्र नांदल की भूमिका की भी जांच होनी चाहिये।
प्रैस वार्ता में मुख्य रूप से आजीवन सदस्य निर्मला, अत्तर सिंह नांदल, बलवान माजरा, रविन्द्र नांदल, अनिल दूहन, हिमांशु राठी, प्रमोद नांदल, संदीप नांदल सहित काफी आजीवन सदस्य मौजूद रहे।