महिला एवं बाल विकास विभाग की अतिरिक्त निदेशक टीम के साथ पहुंची बाल गृह
August 8th, 2018 | Post by :- | 138 Views
 नूंह मेवात ,( लियाकत अली )  ।   राज्य बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बेंदा की सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद चर्चा में आये नूंह जिले के पिपाका गांव के ऑर्फन्स इन नीड़ एनजीओ द्वारा चलाये जा रहे बाल गृह में बुधवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉक्टर सरिता मलिक की अगुवाई में पहुंची तीन सदस्यीय टीम ने करीब 5 घंटे तक बाल गृह का कोना – कोना जांचा। बच्चों से बात हुई तो तहखाने से लेकर एनजीओ पदधिकारियों के साथ – साथ जिला कार्यक्रम अधिकारी , जिला बाल संरक्षण अधिकारी , सीडब्ल्यूसी टीम के साथ बातचीत ही नहीं की बल्कि रिकार्ड का बारीकी से अवलोकन किया। पांच घंटे तक मीडिया को बाल गृह में जाने की अनुमति नहीं दी गई। पत्रकारों ने जब डॉक्टर सरिता मलिक से विजिट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि इंस्पेक्शन किया गया है। रिपोर्ट मीडिया के सामने नहीं बल्कि सरकार के साथ – साथ विभाग की निदेशक को सौंपी जाएगी। दूसरी तरफ एनजीओ चैयरमेन शेख अनीस मूसा एनआरआई ने कहा की टीम ने रिकार्ड खंगाला , बच्चों से बात हुई , बेसमेंट भी देखा। उन्होंने कहा कि टीम अपनी रिपोर्ट विभाग और सरकार को सौंपेगी ,लेकिन वे टीम की विजिट से परेशान दिखाई नहीं दिए। शेख मूसा ने टीम की कार्रवाई की सराहना की। सूत्रों के मुताबिक टीम बाल गृह के इंतजामों से संतुष्ट दिखाई दी। शेख मूसा ने कहा कि अगर कोई खामी टीम को नजर भी आई होगी तो उसमें सुधार किया जायेगा। टीम ने ऑर्फन्स इन नीड़ बाल गृह के अलावा दीपालया संस्था द्वारा तावडू क्षेत्र में चलाये जा रहे बाल गृह का निरीक्षण किया। टीम ने वहां भी करीब 1 घंटे से अधिक समय बिताया। कुल मिलाकर ऑर्फन्स इन नीड के सुर्ख़ियों में आने के बाद लगातार यहां अधिकारियों की टीमें विजिट कर रही हैं। टीम में डॉक्टर प्रीति प्रोग्राम आफिसर आईसीपीएस , अंजलि शर्मा प्रोग्राम आफिसर सारा भी उनके साथ मौजूद थी।
आपको बता दें कि मेवात जिले के पिपाका गांव में किसी पांच सितारा होटल की तरह दिखने वाला ही नहीं बल्कि पांच सितारा होटलों की तरह सुविधाओं से लैस ऑर्फन्स इन नीड़ एनजीओ इन दिनों राज्य बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बेंदा की विजिट के बाद चर्चा में है। चेयरपर्सन बेंदा ने राज्य सरकार को सौंपी रिपोर्ट में एनजीओ द्वारा चलाये जा रहे बाल गृह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चेयरपर्सन की रिपोर्ट अधिकारियों से लेकर एनजीओ चलाने वाले लोगों के गले नहीं उतर रही है।
एनजीओ और जिला बाल संरक्षण अधिकारी से लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग आबिद हुसैन एवं नीरू रानी को यह बात गले से नीचे नहीं उतर रही। उन्होंने तो यहां तक कहा कि जब चेयरपर्सन ज्योति बेंदा ने विजिट की थी तो उन्होंने बाल गृह की जमकर तारीफ की थी। जिले में चल रहे दीपालया तावडू , पीसीआई बाल गृह भंगोह तावडू का भी निरीक्षण गत 16 जुलाई को किया था। जानकारी के मुताबिक पिपाका गांव के ऑर्फन्स इन नीड़ बाल गृह वर्ष 2016 में करीब दस एकड़ भूमि में शुरू हुआ। शुरुआत में 3 अनाथ बच्चों ने दाखिला लिया और मौजूदा समय में करीब 55 बच्चे यहां रहते हैं। खाने -पीने से लेकर रहने की सभी सुविधाएं इन बच्चों को मिली हुई हैं। लगातार इस बाल गृह में सीडब्ल्यूसी की टीम के अलावा जज और जिला प्रशासन के आला अधिकारी लगातार यहां हालात का जायजा लेते हैं। अधिकारी भी इस बाल गृह इंतजामों से बेहद खुश दिखाई दिए हैं। सीडब्ल्यूसी पलवल की सिफारिश पर आठ बच्चों को सीडब्ल्यूसी मेवात की टीम ने इस बाल गृह में रखा गया। जहां तक बच्चों  अभिभावकों से हलफनामा लेने की बात है , तो महज सात बच्चों से शुरूआती दौर में हलफनाम लिया गया था। चैयरपर्सन ज्योति बेंदाने जो यौन शोषण की बात के अलावा विदेशों से चंदा की बात कही है। उस पर एनजीओ ने साफ कहा कि वे क़ानूनी तरीके से चंदा लेते हैं और देश से लेकर विदेशों तक में अनाथ गरीब बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने का काम करते हैं। पिपाका गांव में चल रहे बाल गृह का दौरा किया तो देश के सबसे पिछड़े जिले के इस बाल गृह की सूरत देखकर हमारी टीम दंग रह गई। खास बात यह है कि इस संस्थान में सिर्फ मुस्लिम समुदाय के बच्चे रहते हैं। 6 -12 वर्ष तक की आयु के बच्चों से बात की गई तो उन्हें भी कोई कमी इस बाल गृह में नजर नहीं आती। बाल गृह के गोदाम की बात करें तो यहां पर सीसीटीवी ऑपरेट करने से लेकर बिजली व्यवस्था आपरेट करने की सुविधा है। स्टोर भी निचले तल पर है। खास बात तो यह है कि बेसमेंट में भी लिफ्ट तक की सुविधा है। साफ – सफाई और भवन की हालत देखकर यहां से हिलने को जी नहीं करता। अधिकारियों ने कहा कि जब भी सेशन जज , सीजीएम , सीडब्ल्यूसी , डीसी , एसडीएम कोई भी सुझाव देते हैं तो उस पर तुरंत अमल होता है। लगातार टीमें यहाँ हालात का जायजा लेती रहती हैं। कई सालों से चल रहे बाल गृह में जिला प्रशासन से लेकर न्यायधीशों को कम ही खोट नजर आया , लेकिन चेयरपर्सन ज्योति बेंदा की सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट ने एनजीओ से लेकर अधिकारियों तक को हिलाकर रख दिया। अधिकारियों ने तो कहा कि राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम फिर से दौरा करे , अगर कोई खामी उनको नजर आती है , तो उसको तुरंत दुरुस्त किया जायेगा। एनजीओ चैयरमेन शेख अनीस मूसा ने कहा की ज्योति बेंदा के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। उनको अपने बयान वापस लेने चाहिए। उनकी संस्था को बदनाम करने की साजिश है। क़ानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि बर्तानिया के वकील से वो ऐसे मामलों पर बातचीत करते रहते हैं ,लेकिन मुझे यकीन ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि राज्य बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बेंदा अपने मीडिया  गए बयानों और सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट को वापस लेंगी। संस्था में 55 बच्चे हैं। जिनमें करीब 17 लड़कियां हैं और 38 लड़के हैं। इन्हीं बच्चों में से 25 बच्चे हरचंदपुर गांव में एनजीओ की गाड़ियों में सवार होकर पढाई करने जाती हैं। फ़िलहाल एक विला में करीब 12 बच्चे रहते हैं। ज्योति बेंदा की इस रिपोर्ट ने संबंधी विभागों के अधिकारियों को पसीने छुड़ा दिए हैं। बाल गृह को चलाने वाले एनआरआई शेख अनीस मूसा ने कहा कि उन्हें इस घटना से बेहद दुःख और अफ़सोस हुआ है। मीडिया से लेकर ख़ुफ़िया विभाग की टीम बाल गृह की हकीकत जानने में जुटी हुई हैं। बाल गृह निदेशक एन एस खान ने भी आरोपों को सिरे से नकार दिया।