*वेदों की वाणी, जीवन की ज्योति का संदेश देती है ‘अथर्ववेद मंजरी’ : डॉ. रविंद्र तलवाड़*
मनोज शर्मा,चंडीगढ़। वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद्, पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. विनोद कुमार शर्मा द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘अथर्ववेद मंजरी’ का विमोचन समारोह आर्य समाज भवन, सेक्टर-7बी, चंडीगढ़ में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, पंचकूला इकाई, संवाद साहित्य मंच, चंडीगढ़ तथा श्रीमती सिकंदरा देवी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और वैदिक चिंतन से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में वेदों के ज्ञान, भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और साहित्य की सामाजिक भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. रविंद्र तलवाड़, सचिव, डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली थे। सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रेम विज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. संतोष गर्ग तथा श्री प्रकाश चंद्र शर्मा उपस्थित रहे। आमंत्रित कवियों श्री आर.के. भगत और डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ‘गीत’ सहित अन्य साहित्यप्रेमियों ने भी समारोह की गरिमा बढ़ाई। इस अवसर पर डॉ. अंजू मौदगिल, राज विज तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. रविंद्र तलवाड़ ने पुस्तक के विमोचन के अवसर पर वैदिक साहित्य की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेद भारतीय ज्ञान परंपरा के अमूल्य स्रोत हैं। वे मनुष्य को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, कर्तव्यनिष्ठ बनने तथा समाज के कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। वैदिक विचारों को काव्य के माध्यम से सरल, सहज और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करना साहित्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ‘अथर्ववेद मंजरी’ जैसी कृतियां भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चिंतन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज ने कहा कि डॉ. विनोद कुमार शर्मा की साहित्य साधना भारतीय संस्कृति, वैदिक चिंतन और जीवन मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वे अपने लेखन के माध्यम से प्राचीन ज्ञान परंपरा को समकालीन संदर्भों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अथर्ववेद मंजरी’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक पहल है, जो पाठकों को आत्मचिंतन, सदाचार, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित करती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. संतोष गर्ग ने पुस्तक के विमोचन को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि वैदिक ज्ञान में जीवन को बेहतर बनाने की व्यापक संभावनाएं निहित हैं। विशिष्ट अतिथि प्रकाश चंद्र शर्मा ने वैदिक साहित्य के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें वेदों और प्राचीन ज्ञान परंपराओं में गहराई से जुड़ी हैं। आमंत्रित कवि श्री आर.के. भगत ने वैदिक विषयों पर आधारित साहित्य सृजन को ज्ञान और संवेदना के समन्वय का माध्यम बताया। डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ‘गीत’ ने साहित्य में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
पुस्तक के रचनाकार डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, आयोजक संस्थाओं और उपस्थित साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वेद भारतीय ज्ञान, दर्शन और जीवन-दृष्टि के अनमोल भंडार हैं। उनकी रचनात्मक यात्रा का उद्देश्य वैदिक विचारों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा उनमें सत्य, सदाचार, आत्मबोध, कर्तव्यनिष्ठा और लोककल्याण की भावना को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा कि ‘अथर्ववेद मंजरी’ के माध्यम से उनका प्रयास वैदिक ज्ञान को केवल धार्मिक या दार्शनिक विमर्श तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन के व्यावहारिक पक्षों से जोड़ना है। उनका विश्वास है कि साहित्य तभी सार्थक होता है, जब वह व्यक्ति के चिंतन को समृद्ध करे और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा दे। इस मौके पर विश्व आर्य समाज के अध्यक्ष अशोक आर्य, समाजसेवी राज विज, महर्षि दयानंद पब्लिक स्कूल की मैनेजरडॉ. अंजू मोदगिल आदि उपस्थित रहे।
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