दसवीं कक्षा के खराब रिजल्ट के लिए टीचर्स ही नहीं शिक्षा विभाग की नीतियां भी जिम्मेदार : स्वर्ण सिंह कंबोज
June 8th, 2018 | Post by :- | 19 Views

चंडीगढ़, ( लोकहित एक्सप्रैस ) ।       सरकारी स्कूलों में दसवीं कक्षा के खराब रिजल्ट के लिए टीचर्स ही नहीं शिक्षा विभाग की नीतियां भी जिम्मेदार हैं। विभाग की कमियों को गिनाते हुए यूटी कैडर एजुकेशन यूनियन के प्रेसिडेंट स्वर्ण सिंह कंबोज ने शिक्षा सचिव बंसी लाल को पत्र लिखा है।

कंबोज ने बताया कि आठवीं तक किसी भी स्टूडेंट्स को फेल नहीं किया जा सकता है लेकिन जब स्टूडेंट नौवीं में आता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल टीचर की होती है। वर्ष 2016-17 में नौवीं का परिणाम बनने के समय विभाग ने स्टूडेंट्स को 15 नंबर एक विषय के लिए ग्रेस मार्क देने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही सभी पांच विषयों के लिए 45 नंबर ग्रेस मार्क देने के लिए स्कूलों को मजबूर किया गया था। यदि वह ग्रेस मार्क नहीं दिए गए होते तो पढ़ाई में कमजोर स्टूडेंट्स कभी भी दसवीं में नहीं होते और जो परिणाम अभी आया है वह नहीं आता।  इसी प्रकार दूसरी नीति टीचर्स से नॉन टीचिंग वर्किंग कराना है। टीचर्स को राइट टू एजुकेशन के एक्ट 27 के अनुसार सिर्फ स्कूल में पढ़ाने का ही अधिकार है। इसके अलावा वह स्कूल टाइम में कोई अन्य काम नहीं कर सकते है, लेकिन टीचर्स से हर साल मतदाता सर्वे, चाइल्ड मैपिंग सर्वे जैसे कार्य कराए जाते हैं। इसके अलावा जनवरी से लेकर मार्च तक टीचर्स की वर्कशॉप कराई जाती है। इसी साल टीचर्स की वर्कशॉप के अलावा स्टूडेंट्स को फरवरी महीने में साइंस सिटी ले जाने के निर्देश भी स्कूलों को मिले थे। कंबोज ने पत्र में साफ किया है कि टीचर्स से कराए जाने वाले नॉन टीचिंग कायरे को जल्द से जल्द बंद करना चाहिए। इसके साथ ही ग्रेस मार्क देना बंद होना चाहिए तभी बोर्ड की परीक्षा का परिणाम बेहतर आ सकता है।

शिक्षा विभाग ने वीरवार को जारी किए कि स्कूल हैडमास्टर और प्रिंसिपल अब रोजाना शिक्षा विभाग को जानकारी देंगे कि स्कूल में कौन सी क्लास लगी और उसमें कितने स्टूडेंट्स आए और किस टीचर ने उनकी क्लास लगाई।  साथ ही रोजाना की पूरी डिटेल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सेक्टर-19 में जमा करानी होगी। उल्लेखनीय है कि दसवीं का परिणाम खराब आने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को क्लासें लगाने के निर्देश दिए थे। शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद भी कई स्कूलों में क्लासें नहीं लगाई जा रही थी। कुछ स्कूलों में कम्प्यूटर टीचर्स को चार्ज दिया जा रहा था। इसकी शिकायत शिक्षा विभाग को मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल हैडमास्टर और प्रिंसिपल को ऑर्डर जारी किए हैं।