माननीय पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 30 साल पुराने 1.22 करोड़ के मामले में 2 इंजीनियरों की बर्खास्तगी रद्द, कहा – अधिकारी अब जीवन के संध्याकाल में
August 15th, 2026 | Post by :- | 34 Views

चंडीगढ़। माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने करीब तीन दशक पुराने एक मामले में बड़ा मानवीय फैसला सुनाया है। माननीय जस्टिस कुलदीप तिवारी की बेंच ने 1.22 करोड़ रुपये के कथित अधिक भुगतान मामले में दो सरकारी अधिकारियों की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि 1999 में पारित बर्खास्तगी का आदेश त्रुटिपूर्ण था और उसमें ठोस कारणों का अभाव था। यह आदेश न्यायिक मानकों पर खरा नहीं उतरता।ये याचिकाएं होशियारपुर के सेंट्रल वर्क्स डिवीजन में तैनात रहे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शिंगारा चंद और एम.एस. ग्रेवाल द्वारा दायर की गई थीं। आरोप था कि ब्यास नदी पर बने पुल के एप्रोच रोड के निर्माण में 1.22 करोड़ का अधिक भुगतान हुआ। इसी आरोप में 1994 में नियुक्त हुए इन अधिकारियों को 1999 में बर्खास्त कर दिया गया था।माननीय कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता अब अपने जीवन के संध्याकाल में हैं और मामला 30 साल से लटका है।

इसलिए कोर्ट ने विभाग को आदेश दिया है कि वह दोनों अधिकारियों के अधिकृत प्रतिनिधियों को सुनवाई का मौका देकर 6 हफ्ते के अंदर नया और सही आदेश पारित करे। इस फैसले से हजारों पुराने कर्मचारियों को उम्मीद मिली है।

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