सुप्रीम कोर्ट में नवजोत सिद्धू के खिलाफ चल रहे कत्ल केस में पंजाब सरकार की ओर से उन्हें ही गुनहगार ठहरा दिया गया
April 13th, 2018 | Post by :- | 21 Views

चंडीगढ, ( महिन्द्र पाल सिंहमार ) ।     स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू के सियासी करियर की राह में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वीरवार को सिद्धू हैदराबाद में माइनिंग मॉडल को स्टडी कर रहे थे। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ चल रहे कत्ल केस में पंजाब सरकार की ओर से उन्हें ही गुनहगार ठहरा दिया गया। कोर्ट में सूबा सरकार की दलील से नए राजनीतिक समीकरण बन गए हैं।

 जानकारी के मुताबिक सिद्धू के खिलाफ 1998 में पटियाला में एक बुजुर्ग गुरनाम सिंह को पार्किंग विवाद में पीटने के बाद उसकी मौत का आरोप था। यह केस अब सुप्रीम कोर्ट में है। मृतक के परिजनों ने पिछली सुनवाई के दौरान सिद्धू द्वारा 2012 में एक चैनल को दिए इंटरव्यू को सबूत के तौर पर पेश किया था। जिसमें सिद्धू ने स्वीकार किया था कि उनकी पिटाई से ही गुरनाम सिंह की मौत हुई थी।

वीरवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि सिद्धू ने यह झूठ कहा था कि वह उस समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। पंजाब सरकार के इस स्टैंड से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बेशक जब यह केस दर्ज हुआ था तब सिद्धू कैबिनेट मंत्री नहीं थे और केस पंजाब सरकार बनाम सिद्धू था। लेकिन इस समय परिस्थितियां अलग हैं और सिद्धू खुद सरकार का हिस्सा हैं। इसके बावजूद पंजाब सरकार के स्टैंड ने राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज कर दी है। इस स्टैंड को कई तरह से देखा जा रहा है।

सिद्धू हमेशा से सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की आंखों की किरकिरी बनते रहे हैं। वह चाहे बिक्र्तम मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई की मुद्दा हो, या फिर रेत, शराब, ट्रांसपोर्ट और ड्रग्स माफिया का मुद्दा हो। सीएम के पास गृह विभाग है पर पिछले दिनों सिद्धू ने एसटीएफ द्वारा हाईकोर्ट में दी सीलबंद रिपोर्ट मीडिया के सामने पेश कर मांग कर दी थी कि मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई की जाए। आम आदमी पार्टी शुरू से आरोप लगाती रही है कि कैप्टन और बादल परिवार का अंदरखाते समझौता है। सिद्धू के बयान कहीं न कहीं इसकी भी ?पुष्टि करते रहे हैं। इससे सीएम और सारी सरकार मुसीबत में पड़ती रही है। ऐसे में पंजाब सरकार का अपने ही मंत्री के खिलाफ स्टैंड सिद्धू के लिए मुश्किल बन सकता है।

अकाली लगातार उठा रहे थे मुद्दा

दिलचस्प बात यह है कि नवजोत सिद्धू के खिलाफ हाल ही में सामने आए नए सबूत के बाद अकाली दल लगातार यह मुद्दा उठा रहा था। शिअद ने कांग्रेस और सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस मामले में अपना स्टैंड स्पष्ट करने को कहा। साथ ही यह भी मांग की कि कत्ल के आरोपी को कैबिनेट से हटाया जाए। दो दिन पहले शिअद महासचिव बिक्र्तम मजीठिया ने यह आरोप लगा दिया कि सिद्धू के खिलाफ कत्ल केस में सरकार एक जूनियर वकील उतार रही है। ताकि सिद्धू को बचाया जा सके। लेकिन वीरवार को सुनवाई के दौरान हुआ बिल्कुल उलट।