“भरी उड़ान परिंदे ने”
September 7th, 2021 | Post by :- | 540 Views

लिपटकर आऊंगा तिरंगे में

या फिर लहराकर आऊंगा।
दहाड़ूंगा शेर बन दुश्मन पर
युद्धभूमि में धूल चटाऊंगा।
बढ़ा जो एक कदम भी दुश्मन का
मेरे वतन की ओर
कसम माँ भारती की
उसका नामो निशां मिटाऊंगा।
मेरे खून का कतरा कतरा
मेरे वतन पर वारी है
कफ़न बाँध निकला हूँ
मरने मारने की तैयारी है।
भर के जोश वो वीर कूद गया
युद्धभूमि की वेदी में
धूल चटा दुश्मन को सो गया
भारत माँ की गोदी में।
कोख उजड़ गयी एक माँ की
उजड़ी मांग सुहागन की
भारत वालो दिल से बताना
क्या सुध ली कभी अभागन की।
कारगिल के शेरों की शहादत
सब भूल गए या याद है
उनको भूल ना जाना, जिनकी
वजह से हम आबाद हैं।
हुए शहीद मिली शहादत
आये लिपट तिरंगे में
बड़ी शान से कहा अलविदा
भरी उड़ान परिंदे ने।

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सविता गर्ग “सावी”
कवयित्री, गीतकार
पंचकूला (हरियाणा)

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