सरकार अब इसरो के बजाए पीएसएलवी का ठेका प्राइवेट कंपनियों को दे रही हैं : ठा संजीव कुमार सिंह
September 3rd, 2021 | Post by :- | 212 Views

मथुरा,(राजकुमार गुप्ता)  राष्ट्रीय नेता, इंडियन नेशनल कांग्रेस एआईसीसी पर्यवेक्षक प्रभारी, बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी, एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, सदस्य इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स सचिव, कांग्रेस किसान एवं औद्योगिक प्रकोष्ठ, कानूनी सलाहकार सदस्य, चुनाव प्रचार समिति बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल और आसाम एवं लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री पद के दावेदार ठाकुर संजीव कुमार सिंह ने कहा कि देश में पहली बार इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) से बाहर की निजी कंपनियां पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) बनाएगी। इसके कॉन्ट्रैक्ट की दौड़ में तीन संस्थाएं हैं, दो कंसोर्टिया और एक फर्म जिसमें अडानी के नेतृत्व वाला समूह और लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) के साथ एक अन्य शामिल हैं। ये तो आपने सुना ही होगा कि धरा बेच देंगे, गगन बेच देंगे, चमन बेच देगे, क्योंकि सरकार अब गगन भी बेच रही है। सरकार पण्डित नेहरू जी के द्वारा स्थापित इसरो के बजाए पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल ) का ठेका प्राइवेट कंपनियों को दे रही है। जब रेलवे प्राइवेट हो रही है। सरकारी हाइवे ओर पोर्ट्स निजी कंपनियों को चलाने के लिए दिए जा रहे तो स्पेस क्यो अछूता रह जाए वहाँ भी प्राइवेटाइजेशन किया जाएगा। भारत सरकार अब इसरो से बाहर के किसी व्यक्ति/कंपनी को उपग्रह प्रक्षेपण यान बनाने का ठेका दे रही है। यह ठेका एनएसआईएल के माध्यम से दिया जा रहा है। दरअसल एनएसआईएल इसरो का ही पार्ट था ओर शुरू में इसरो का कार्यकारी निकाय माना जाता था। फिर मोदी जी प्रधानमंत्री बने उसके बाद इसे धीरे से इसरो से अलग कर के लॉन्च वाहनों, उपग्रहों और अन्य मालिकाना उत्पादों के उत्पादन के लिए को जिम्मेदार बनाया गया। ये मत सोचिएगा कि इसरो जैसे संस्थान के निजीकरण की शुरुआत अभी हुई है। दरअसल गेम तो सालो पहले सेट किया जा चुका था 2017 में इतिहास में पहली बार इसरो ने दो प्राइवेट कंपनियों और एक सार्वजनिक उपक्रम के साथ 27 सेटेलाइट बनाने का करार किया इसके तहत इसरो ने बैंगलोर स्थित अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज के नेतृत्व में एक निजी क्षेत्र के साथ तीन साल के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, इसरो ने अल्फा डिजाइन कंसोर्टियम को इन उपग्रहों को असेंबल करने के लिए चुना था। यह अल्फा डिजाइन कंपनी अडानी की फंडिंग से खड़ी हुई थी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज उस इतालवी डिफेंस फर्म इलेटट्रॉनिका की मुख्य भारतीय साझेदार भी है, जिसका नाम भारत में कथित तौर पर कमीशन खिलाने के लिए ‘पनामा पेपर्स’ में सामने आया था।

श्री सिंह ने कहा तश्वीर साफ है कि अडानी की आमद के लिए दस्तरख्वान बिछा हुआ है। ठेका तो उन्ही को मिलना है। अब इसने स्वतंत्र रूप में कार्य करते हुए पीएसएलवी की बोलियां मंगाई है। शुरुआत में 5 पीएसएलवी के लिए बोलियां आमंत्रित की गयी है। अब मोदी राज में किसी क्षेत्र का निजीकरण हो ओर उसमे अडानी या अम्बानी का रोल न हो ऐसा संभव ही नही है। इसलिए पीएसएलवी बनाने के इस कॉन्ट्रेक्ट को पाने की होड़ में अडानी ग्रुप सबसे आगे है और नाम के लिए बीएचईएल ओर लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) को भी शामिल किया गया है। ये कुल तीन कम्पनिया ही इस कांट्रेक्ट के लिये आगे आयी है। यह कॉन्ट्रैक्ट पांच लॉन्च व्हीकल्स बनाने के लिए होगा। अंग्रेजी अखबार ‘दि टाइम्स ऑफ इंडिया’ (टीओआई) को कई स्रोतों ने इस बारे में पुष्टि की कि तीन संस्थाओं ने 30 जुलाई को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) द्वारा जारी एक आरएफपी (प्रस्ताव के लिए अनुरोध) के जवाब में अपनी बोलियां जमा की थीं। अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) के तहत काम कर रहे एक अंतरिक्ष-पीएसयू एनएसआईएल को शुरुआत में इसरो की एक कर्मशियल (वाणिज्यिक) शाखा के रूप में माना गया था। बाद में इसे लॉन्च वाहनों के उत्पादन, उपग्रहों और अधिक के साथ अनिवार्य किया गया था। टीओआई ने अगस्त 2019 में रिपोर्ट किया था कि एनएसआईएल ने पांच पीएसएलवी के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) की घोषणा की थी, जिस पर पांच संस्थाओं ने प्रतिक्रिया दी थी। उसी के लिए आरएफपी तब दिसंबर 2020 में जारी किया गया था। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) का एक कंसोर्टियम, दूसरा अडानी-अल्फा डिजाइन, बीईएल और बीईएमएल दो ग्रुप एंटिटी (समूह संस्थाएं) हैं, जबकि भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने एकल फर्म के रूप में बोली लगाई है। जानकारी के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट इस साल के अंत तक दिए जाने की उम्मीद है। चुनी गई एन्टिटी (इकाई) एक लाइसेंस प्राप्त निर्माता होगी। यह पहली बार है कि इसे पूरी तरह से उद्योग क्षेत्र यानी प्राइवेट कंपनियों द्वारा बनाया जाएगा।

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वहीं,एनएसआईएल चेयरमैन और प्रबंधकीय निदेशक (एमडी) राधाकृष्णन डी ने इस बारे में टीओआई से कहा, “तकनीकी-वाणिज्यिक स्तर पर मूल्यांकन चल रहा है, जिसके बाद बोलियां खोली जाएंगी। हमें पूरी प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी होने की उम्मीद है और इस समय इस पर और कुछ भी टिप्पणी नहीं कर सकते हैं।”

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