भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अपने-अपने घरों में धूमधाम से मनाये: ध्रुवचंद जायसवाल
August 29th, 2021 | Post by :- | 341 Views

गोरखपुर (एके जायसवाल), भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अपने अपने घरों में धूमधाम से मनाये।

(कोविड-19को ध्यान में रखते हुए) उत्साह पूर्वक उत्सव मनाये, चंद्रवंशी राजाओं के पूर्वजों का वर्णन शास्त्रों के अनुसार महाराजा यदु सहित पांच राजर्षि शिरोमणि हुए चंन्द्रवंशियों के वंशजों से यह सारी पृथ्वी पर उसी प्रकार व्याप्त है जैसे सूर्य की किरणें पृथ्वी पर व्याप्त होती है,राजर्षि यदु महराज का सम्मान समस्त राजर्षियों द्वारा सम्मानित है।

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तस्य वंशे महाराज पच्ञ राजर्षिसत्तमाः।
यैर्व्याप्ता पृथ्वी सरला सूर्यस्येव गभस्तिभिः।।47
यदोस्तु श्रृणु राजर्षेर्वंशं राजर्षिसत्कृतम।
यंत्र नारायणो जज्ञे हरिर्वृण्णिकुलोव्दहः।।48
हरिवंश पुराण महाभारत खिलभाग के भाग के पृष्ठ संख्या 158 से 163-तक वर्णन है।
बभूवुस्तु यादों: पुत्रा: पच्ञ देवसुतोपमा:।
सहस्रद: पयोदच्श्र क्रोष्टा नीलोऽञ्जिकस्तथा।।1
सहस्रदस्य दायादास्त्रय: परमधार्मिका:।
हैहयच्श्र हयच्श्रौव राजन वेणहयस्तथा।।2

महाराजा यदु कुल में चक्रवर्ती सम्राट भगवान कार्तवीर्यार्जुन एवं भगवान श्रीकृष्ण के रूप में श्रीनारायण-हरि अवतरित हुए।

महाराज यदुके पांच पुत्र देवोपम समान हुए,सहस्त्रजीत,क्रोष्टु,पयोद,नींल,अञ्ञिक हुए। महाराजा सहस्त्रजीत से हैहयवंश वर्तमान में,हैहयवंश-कलवार,कलाल कलार से सैकड़ों उपनामों से पहचान है।क्रोष्टु से यदुवंश शाखा चला वर्तमान में यादव,ग्वाल आदि नामों से पहचान है धार्मिक ग्रंथों एवं पुराणों में वर्णित हैं
भगवान श्रीकृष्ण के (काल) समय का महत्वपूर्ण वर्णन यह है कि अन्याय का हर स्तर पर विरोध किया था तथा अन्याय का कभी साथ नहीं दिया गीता-सार का जिसने भी अध्ययन किया है वह कभी दुःखी नहीं हो सकता है और न-ही पराजित हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समाजवाद, समतामूलक समाज,की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं की थी, ऊंच-नीच,भेदभाव, छुआछूत लेशमात्र नहीं था अपने बाल-सखाओं के साथ मिल-जुलकर एक साथ बैठ कर भोजन करते थे। सभी ग्वाल-बाल के घरों में घुसकर माखन खाया करते थे कोई भेद-भाव नहीं करते थे यह शास्त्रों के व्दारा प्रमाणित है।
उ.प्र बड़ी संख्या में है जैसे कुर्मी क्षत्रिय, मौर्यवंशी, राजभरवंशी, एकलव्यवंशी निषाद आदि दर्जनों पिछड़े एवं दलित जातियां चंन्द्रवंशी है इनके अतिरिक्त कई वर्तमान राजपूत चंन्द्रवंशी क्षत्रिय है एवं कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी है समय आने पर प्रमाण के साथ (खुलासा) प्रकाशित किया जाएगा। उक्त ब्यान अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा की इकाई उत्तर प्रदेश अध्यक्ष ध्रुवचन्द जायसवाल ने दी।

पुराणों में तो इनकी गाथाएं भरी पड़ी हैं देवर्षि नारद जी इनके गुणों का गुणगान करते थकते नहीं थे। महाराजा यदु निर्भीक बुद्धिमान और कुशल शासक, विकट परिस्थितियों में भी वह कभी घबराए नहीं उनके वंशजों में अनेक अत्यंत तेजस्वी प्रतापी और महान सम्राटों में गणना पुराणों एवं धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है। इन्हीं के वंश में भगवान कार्तवीर्यार्जुन एवं भगवान श्रीकृष्ण अवतरित हुए थे।

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