सहकारिता विभाग में मची घोटालों की भरमार
August 25th, 2021 | Post by :- | 292 Views

नियमों को ताक पर रख कर अधिकारी कर रहे नाजायज भर्तियां

मुलाना/बराड़ा, ( गुरप्रीत मुल्तानी )

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मौजूदा भाजपा सरकार जनता को भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने और सभी सरकारी कामों में पारदर्शिता लाने संबंधी कार्य करने में प्रयासरत है और बहुत से सरकारी कार्यालयों व‌ विभागों में भ्रष्टाचार में कमी दर्ज भी की गई है, जिसके देश-प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का धन्यवाद करती हैं, परन्तु प्रदेश का सहकारिता विभाग ने जाने क्यूं कर सरकार की निगाह से बचा हुआ है कि यहां पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है और घोटालों की भरमार मची हुई है। कोई सरकारी एजेंसी, सीएम फ्लाईंग दस्ता, सीएम विंडो आदि कोई भी सरकारी तंत्र इस विभाग में पनपे भ्रष्टाचार को खत्म करना तो दूर अभी तक किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को उजागर तक नहीं कर पाया है, जबकि सहकारिता विभाग के समिति पैक्स के प्रबंधक, निरीक्षक सहकारिता विभाग, सहायक रजिस्ट्रार उप रजिस्ट्रार ,आदि आला अधिकारी सरकार व‌ विभाग के नियमों को ताक पर रख कर अवैध रूप से भर्तियां कर रहे हैं।

रमेश कुमार, सतपाल सिंह, सुभाष चंद्र और अशोक कुमार ने सहकारिता विभाग पर भ्रष्टाचार, घोटालों व नाजायज भर्तियां करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिला अंबाला के मुलाना हल्के में सहकारिता विभाग में घोटालों की भरमार मची हुई है और विभाग के आला अधिकारियों द्वारा नियमों व उप-नियमों को ताक में रखकर नजायज भर्तियां की जा रही है, जिसमें कि मीठापुर पैक्स के अंतर्गत आने वाले गांव समलेहड़ी के निवासियों व पूर्व एवं वर्तमान समिति निदेशक मंडल के पदाधिकारियों के द्वारा सीएम विंडो के माध्यम से दो बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन सहकारिता विभाग के अधिकारी व कर्मचारी किसी प्रकार की कोई भी कार्यवाही नहीं कर रहे। जिसमें केवल कुमार प्रबंधक मीठापुर ने अपने पुत्र को मीठापुर पैक्स में नियुक्त किया, वहीं चरण सिंह प्रबंधक ने अपनी धर्मपत्नी को समिति में नौकरी पर नियुक्त किया जोकि सहकारिता नियम रूल नंबर 2 पारा 112 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसी के साथ में सीएम विंडो के निगरानी सदस्य फकीरचंद के द्वारा अपनी पहुंच का नाजायज फायदा उठाते हुए समिति के कार्यवाही रजिस्टर में कटिंग कर दूसरे पैन व दूसरी स्याही से अपनी पुत्री का प्रस्ताव डालकर उसको समिति में नौकरी प्रदान की गई है जोकि सरासर ग़लत है। सहकारिता विभाग के नियम के अनुसार एरिया ऑपरेशन का व्यक्ति ही समिति पैक्स में नौकरी कर सकता है मगर फकीरचंद के द्वारा अपनी पावर का नाजायज फायदा उठाते हुए अपनी पुत्री को एरिया ऑपरेशन से बाहर नौकरी करवाई जा रही है जबकि उनकी पुत्री हरियाणा राज्य से बाहर उत्तर प्रदेश राज्य में विवाहित है। उन्होंने बताया कि समिति के द्वारा इसकी शिकायत सीएम विंडो पर डाल दी गई थी।

उन्होंने कहा कि पूर्व एवं वर्तमान समिति निदेशक मंडल मीठापुर के पदाधिकारियों का आरोप है कि समिति के कार्यवाही रजिस्टर पर स्वयं समिति सदस्यों के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं। इसमें सभी कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत है इसके अलावा मुलाना की सभी पैक्सों में साहा, महमूदपुर, मीठापुर, पिलखनी, संभालखा, मुलाना, धीन, तेपला आदि में करोड़ों रुपए का घोटाला होने के बावजूद धड़ाधड़ भर्तियां की जा रही है। कार्यवाही रजिस्टर में उक्त समितियों में भर्ती किए गए कर्मचारियों को डीसी रेट पर लगाया गया था लेकिन उन कर्मचारियों को कुछ समय में ही पक्का करके वेतनमान डीसी रेट से तीन गुना करके दिया जा रहा है। इन कर्मचारियों की नियुक्ति देने के 6 महीने के बाद समिति में जॉइनिंग करवाई गई व 6 महीने का इकट्ठा वेतन दिया गया। जबकि समितियां करोड़ों रुपए के नुकसान में चल रही है। इस बात से साफ पता चलता है कि कैसे समिति के कर्मचारी व अधिकारियों ने धोखे से सरकार को करोड़ों की चपत लगाई और अपने चहेतों को डीसी रेट के बजाय पक्का कर्मचारी नियुक्त किया।

रमेश कुमार, सतपाल सिंह, सुभाष चंद्र व अशोक कुमार ने मांग की है कि इन सभी घोटालों की जांच पूर्व में रहे भारतीय प्रशासनिक अधिकारी या पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व जज की देखरेख में करवाई जाए ताकि सहकारिता विभाग में फैले भ्रष्टाचार से पर्दा उठा सके और घोटालेबाज दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि साहा में समिति प्रबंधक को 2 महीने पहले निष्कासित किया गया था मगर आरोप साबित होने के बावजूद भी 2 महीने के अंदर ही अंदर उनको बाहल भी कर दिया गया है यह सब विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है जिसमें पैसे की लेनदेन का चक्र है

केवल सिंह तत्कालीन प्रबंधक टैक्स मीठापुर का कहना है कि सभी आरोप झूठे हैं । मैंने किसी को नौकरी पर नहीं रखा, मैं तो उस समय क्लर्क की पोस्ट पर था । सभी कार्य नियमों के तहत ही हो रहे हैं।

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