आईजीयू मीरपुर में श्री गुरू तेग बहादुर जी के जीवन और दर्शन विषय पर संगोष्ठी का किया गया आयोजन
August 24th, 2021 | Post by :- | 76 Views

इन्दिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के छात्र कल्याण विभाग व पंजाबी साहित्य अकादमी, पंचकूला के सयंुक्त तत्वाधान में श्री गुरू तेग बहादुर जी के 400 साल प्रकाश पर्व के उत्सव पर आज दिनांक 24 अगस्त, 2021 को ‘श्री गुरू तेग बहादुर: जीवन और दर्शन विषय’  पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता सरदार इकबाल सिंह लालापुर, आईपीएस (सेवानिवृत) तथा मुख्य अतिथि -पंजाबी साहित्य अकादमी, पंचकूला के चेयरमैन श्री सुनील कुमार जी रहे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.के.गक्खड़ ने बताया कि श्री गुरू तेग बहादुर जी को त्याग एवं वैराग्य की मूर्ति कहा जाता है। उन्होने गुरू जी की शहादत के बारें में बताते हुए कहा कि मनुष्य को अपनी जीवन में महत्वकांक्षाओं को सीमित में रखना चाहिए। उन्होंने गुरू जी 59 शब्द, 57 श्लोक शब्दों की महिमा कें बारे में बताया जिनमें संसार एवम् मानव जीवन का सार निहित है। उन्होंने बताया कि उनमें ज्ञान, वैराग्य एव विवके के बारें मे भी बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सरदार इकबाल सिंह ने अपने सम्बोधन में श्री गुरू तेग बहादुर जी के जीवन-परिचय कें बारें में संक्षिप्त में बताया। उन्होंने बताया कि गुरू जी का जातीय भेदभाव को खत्म होना चाहिए- यह उनका उदेश्य रहा। उन्होंने गुरू ग्रंथ साहिब में सच, विचार व संतोष के बारें में विस्तार से वर्णन किया। सरदार इकबाल जी गुरबाणी के सिद्धान्तों के बारें में बताया कि कैसे अंधकार से प्रकाश की तरफ आना चाहिए। इसी क्रम को जारी रखते हुए उन्होंने बताया कि गुरू तेग बहादुर जी ने समाज को जो आदर्श, मूल्य, सिद्वान्त दिये, उन्हीं मूल्यों, धर्म एवं कश्मीरी पंडितों की खातिर कट्टरता एवम् धर्मान्तरण की नीतियों का विरोध करते हुए वे कई बार गिरफ्तार भी हुए और अपना बलिदान दे दिया, जो इतिहास में आज तक एक मिसाल है। उन्होंने गुरू नानक, गुरू गोबिन्द सिंह, गुरू अर्जुन देव आदि के विचारों के बारें में बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री सुनील कुमार जी ने बताया कि क्षेत्र की विशेषताओं के बारें मे हमें रिसर्च को बड़ी गहनता एवं ईमानदारी से करना चाहिए और उसे समाज के समक्ष रखना चाहिए।

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सर्वप्रथम विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. प्रमोद कुमार ने अपने स्वागत भाषण में श्री गुरू तेग बहादुर जी के इतिहास का वर्णन करते उनके बलिदानों के बारें में विस्तार से बताया और उन्हांेने बताया कि किस प्रकार से अपनी संस्कृति को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कर्ण सिंह ने अतिथियों का संक्षिप्त में परिचय बताया।

धन्यवाद प्रस्ताव छात्र कल्याण के अधिष्ठाता डॉ. विजय कुमार ने प्रस्तुत किया। मंच का संचालन श्री सुशान्त यादव ने किया। इस अवसर विद्यार्थियों सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे।

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