कोरोना महामारी के मृतकों को बुल्लड़ पहलवान व अखाड़े के बच्चों ने सिर मुंडवाकर दी श्रद्धांजलि
May 18th, 2021 | Post by :- | 412 Views

बहादुरगढ़ लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ (गौरव शर्मा

* बुल्लड़ पहलवान ने कोरोना के इलाज में निजी अस्पतालों द्वारा की गई मनमानी पर भी रोष जताया

* बुल्लड़ पहलवान बोले,  अगर सरकार मंदिर व मूर्ति पर ध्यान न देकर ऑक्सीजन के प्लांट व मेडिकल सुविधाएं बढ़ाती तो हजारों जानें बच जाती

बहादुरगढ़। शहर ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया स्थित बुल्लड अखाड़ा ग्रुप के छोटे बच्चों व समाजसेवी बुल्लड़ पहलवान ने अपना अपना सिर मुंडवाकर व सफेद वस्त्रों में कोरोना महामारी के कारण गांव मांडोठी सहित क्षेत्र में होने वाली कोरोना रूपी अकाल मोतों पर शोक प्रकट करते हुए दो मिनट का मोन धारण कर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। लॉकडाउन व किसान आंदोलन में लगातार कई महीनों तक चलाए गए भंडारों सहित जररूतमंद लोगों की हर प्रकार की सेवा व सहयोग, प्रतिभावान विद्यार्थियों व खिलाडिय़ों को समय समय पर सहयोग ओर प्रोत्साहित करने वाले अखाड़ा संचालक वीरेंद्र उर्फ बुल्लड़ पहलवान ने पत्रकारों से बातचीत करते कहा कि हम सभी के जीवन में कोरोना रूपी एक बहुत बड़ी संकट की घड़ी चल रही है। उन्होंने अपने पैतृक गांव मांडोठी के बारे बताया की इस महामारी से मरने वालों की संख्या लगभग 60 के करीब हो चुकी है।  बुल्लड़ ने सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा की राम मंदिर सहित बड़ी बड़ी मूर्तियों, प्रधानमंत्री के लिए हजारों करोड़ का निवास बनाने के लिए अनाप शनाप धन खर्च करने की बजाय तथा दूसरे देशों को दान देने की बजाय सरकार अपने देश के अंदर हॉस्पिटल बनाने, दवाइयाँ ओर मेडिकल शिक्षा सम्बंधित संस्थाएं खुलवाती तो लोगों को आज इस तरह जानलेवा कोरोना संकट से न जूझना नही पड़ता ओर न ही कोरोना के कारण लोगों की अकाल मृत्यु होती। बुल्लड़ पहलवान ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी के कारण ने जाने कितनी मौत हुई है पर सरकार सिर्फ आंकड़ों का खेल खेलकर जनत को गुमराह व बरगलाने में लगी हुई है। केंद्र व हरियाणा सरकार धरातल की बजाय बयानबाजी से ही इलाज से संबंधित सभी कमी को पूरा कर रही है। जबकि हकीकत यह है कि कोरोना के कारण मरीज, ऑक्सीजन, दवाएं, रेमिडिसिविर इंजेक्शन, बेड , वेंटिलेटर का भारी अभाव झेल रहे है। बुल्लड़ पहलवान ने कहा कि सरकार ने मूर्ति व मंदिर पर ध्यान देने की बजाय ऑक्सीजन के प्लांट लगाए होते तो ऑक्सीजन रूपी छोटी छोटी चीजों के अभाव में अपने हजारों लोगों को अपने परिजनो को नहीं खोना पड़ता।

 निजी अस्पतालों ने कोरोना के इलाज के नाम पर किया मानवता का शर्मशार, जमकर की मनमानी
बुल्लड़ पहलवान ने कहा कि कोरोना महामारी में शहर के निजी अस्पताल वालो ने मानवता को तार तार करते हुए अपना असली रूप जनता को दिखाया है। लोग बेड , ऑक्सीजन, इंजेक्शन, वेंटिलेटर व इलाज के लिए उनके अस्पतालों के बाहर अस्पताल वालों से इलाज की गुहार लगाते रहे मगर शहर के निजी अस्पतालों ने किसी की नही सुनी। काफी लोगों की इलाज के अभाव में मौत हो गई। बुल्लड़ पहलवान ने कहा शहर के निजी अस्पतालों द्वारा भर्ती नही करने की कई शिकायत मेरे पास भी आई । लोगों ने मुझे बताया कि वह अपने परिजनों को कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाना चाहते हैं मगर निजी अस्पताल वाले बेड, व आक्सीजन की कमी बताकर उन्हें भर्ती नहीं कर रहे हैं । बुल्लड़ ने कहा कि जब बहादुरगढ़ के समाचार पत्रों में खबरों के माध्यम से इलाज में की जाने वाली मनमानी से सरकार व प्रशासन व आमजन को अवगत कराया तो कुछ नेताओं ने अस्पताल वालों की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया व जिला प्रशासन ने कोरोना इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों के बाहर रेट लिस्ट का बोर्ड लगाकर अपने कर्तव्य से इतिश्री कर ली। बुल्लड़ पहलवान ने बताया कि मेरे संज्ञान में ऐसे कई मामले हैं  जिनमे निजी अस्पताल वाले मरीजों से कहते हैं कि पहले पूरे पैसे जमा करवाओ, नहीं तो इलाज नहीं होगा, अपने मरीज को ले जाओ । बुल्लड़ ने कहा कि इलाज के अभाव में चाहे मरीज की मौत क्यो न हो जाए इससे निजी अस्पताल संचालको को कोई फर्क नही पड़ाता। फर्क सिर्फ उन्ही को पड़ता है जिसके घर से आदमी जाता है।

कोरोना संकट के समय घरों में बैठे जिम्मेदारों की पहचान करें जनता
बुल्लड़ पहलवान ने कोरोना के कारण आज वो हालात हैं की लोगों की दो दो ,चार चार दिन में तेहरवीं हो रही है। आपस में खूब जान पहचान होने के बाद भी बहुत कम लोगों को आसपास में होने वाली मोतों का पता लगता है। बुल्लड़ ने हल्के के बिरादरी, धर्म ओर राजनीति पार्टियों के ठेकेदारों की भी निंदा करते हुए आमजन से उनकी पहचान करने की बात कही है जो इस संकट के समय लोगों की सेवा व सहयोग करने की बजाय अपने घरों में दुबक कर बैठे हुए है। बुल्लड़ ने कहा की महीने भर से ज्यादा होने को हैं। पूरे शहर ओर देहात का कोई श्मशान घाट एसा नहीं है जो लगातार धधकने से बचा हुआ हो। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग सेवा व सहयोग करने के बाद सोशल मीडिया पर लिखते हैं की फलाने बिरादरी के नेता, प्रधान , धर्म या फलाने की टीम से हमने आज यह सहयोग किया। यानी जिस इंसान के मन मे आज भी बिरादरी, मजहब की लड़ाई के साथ अपने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने का जनून सवार है। ऐसे लोगों का ध्यान सिर्फ  ,जाती ,धर्म ओर अपने आकाओं की राजनीति चमकाने में ही लगा रहता है। ऐसे लोगों को जनता के दु:ख व  तकलीफ से कोई सरोकार नहीं होता।
फोटो कैप्शन :- समाजसेवी बुल्लड़ पहलवान व अखाड़े के बच्चें सिर मुंडवाकर व सफेद वस्त्र धारण कर कोरोना महामारी के मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए।

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