पर्यावरण संरक्षण हेतु लगाए ज्यादा से ज्यादा पेड़ : सतबीर सिंह चौहान
May 15th, 2021 | Post by :- | 101 Views

बहादुरगढ़ लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ (गौरव शर्मा)

सतबीर चौहान बोले भारतीय संस्कृति में पेड़ पौधों की होती है पूजा

बहादुरगढ़। पौधरोपण कार्यक्रम के तहत शनिवार को एच एल सिट  के पार्कों और  विभिन्न खाली स्थानों पर अभियान चलाकर सैकड़ों पौधे लगाए गए। इस दौरान सतबीर सिंह चौहान के साथ स्थानीय  लोगों ने फलदार व छायादार पौधे रोपित किए। एनसीआर 2 ऑफिस के पास भी पौधारोपण किया गया। साथ ही सभी स्थानीय निवासियों ने पालीथिन का प्रयोग न करने की शपथ भी ली। पौधरोपण करते हुए भाजपा नेता सतबीर सिंह चौहान ने कहा कि इन दिनों पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। वातावरण में फैल रहे इस जहर को रोकने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि अधिक संख्या में पौधे रोपित किए जाएं। पेड़- पौधों के अंधाधुंध दोहन से यह स्थिति बनी है। उन्होंने सभी से पौधे लगाने व उनका संरक्षण किए जाने की अपील की। सतबीर सिंह चौहान ने समाज को पौधरोपण के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि तापमान में हो रही निरंतर वृद्धि और मानसून परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभाव से बचने के लिए सभी को कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। पर्यावरण में प्रदूषण की अधिकता को पेड़ पौधे ही दूर कर सकेंगे। सभी का दायित्व है कि अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर धरती को हरा भरा बनाने के साथ ही प्रदूषण मुक्त कर मानव जीवन को सुरक्षित करने का कार्य करें। सतबीर सिंह चौहान ने बताते हुए याद दिलाया कि जब से दुनिया शुरू हुई है, तभी से इंसान और क़ुदरत के बीच गहरा रिश्ता रहा है। पेड़ों से पेट भरने के लिए फल-सब्ज़ियां और अनाज मिला। तन ढकने के लिए कपड़ा मिला। घर के लिए लकड़ी मिली। इनसे जीवनदायिनी ऑक्सीजन भी मिलती है, जिसके बिना कोई एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता। इनसे औषधियां मिलती हैं। पेड़ इंसान की ज़रूरत हैं, उसके जीवन का आधार हैं। अमूमन सभी धर्मों में पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया गया है। भारतीय समाज में आदिकाल से ही पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजा जाता है। विभिन्न वृक्षों में विभिन्न देवताओं का वास माना जाता है। पीपल, विष्णु और कृष्ण का, वट का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और कुबेर का माना जाता है, जबकि तुलसी का पौधा लक्ष्मी और विष्णु, सोम चंद्रमा का, बेल शिव का, अशोक इंद्र का, आम लक्ष्मी का, कदंब कृष्ण का, नीम शीतला और मंसा का, पलाश ब्रह्मा और गंधर्व का, गूलर विष्णू रूद्र का और तमाल कृष्ण का माना जाता है। इसके अलावा अनेक पौधे ऐसे हैं, जो पूजा-पाठ में काम आते हैं, जिनमें महुआ और सेमल आदि शामिल हैं। वराह पुराण में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है- जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, एक बड़, दस फूल वाले पौधे या बेलें, दो अनार दो नारंगी और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह नरक में नहीं जाएगा। सतबीर सिंह चौहान ने कहा कि यह हैरत और अफ़सोस की ही बात है कि जिस देश में, समाज में पेड़-पौधों को पूजने की प्रथा रही है, अब उसी देश में, उसी समाज में पेड़ कम हो रहे हैं। बदलते दौर के साथ लोगों का प्रकृति से रिश्ता टूटने लगा। बढ़ती आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए वृक्षों को काटा जा रहा है। नतीजतन जंगल ख़त्म हो रहे हैं। देश में वन क्षेत्रफल 19.2 फीसद है, जो बहुत ही कम है। इससे पर्यावरण के सामने संकट खड़ा हो गया है। घटते वन क्षेत्र को राष्ट्रीय लक्ष्य 33.3 फीसद के स्तर पर लाने के लिए ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाने होंगे। उन्होंने कहा कि अब जनमानस में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आ रही है। लोग अब पेड़-पौधों की अहमियत को समझने लगे हैं। महिलाएं भी इस पुनीत कार्य में बढ़ चढ़कर शिरकत कर रही हैं।इस मौके पर एनसीआर टू  प्रधान धर्मबीर सहरावत, अर्जुन अवॉर्डी पहलवान ओमबीर ओर उनकी पत्नी ममता, जयपाल सरोहा, नरेन्द्र लोहचब, योगेश लाकड़ा, विजय दहिया, मास्टर मंजीत,आकाश सिंह, जयराम, प्रवीन डागर आदि अनेको स्थानीय निवासियो ने श्रमदान किया और सतबीर सिंह चौहान के साथ पौधरोपण कर उनके संरक्षण की शपथ ली और कहा कि इसी तरह आगे भी पोधारोपण करते रहने का निर्णय लिया ओर पौधे उपलब्ध कराने के लिए  वजीर राठी की का पूरी टीम के साथ  धन्यवाद किया।

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