कोरोना महामारी के चलते भावी अध्यापिकाओं ने विशेष रुप से किया मदर्स डे सेलिब्रेट 
May 9th, 2021 | Post by :- | 124 Views
बहादुरगढ़ लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ (गौरव शर्मा)
भावी अध्यापिकाओं ने गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उनके जीवन से प्रेरित होकर बनाएं स्लोगन 
आज वैश्य बी. एड. कॉलेज की छात्राओं ने कोरोना महामारी के चलते विशेष रुप से मदर्स डे सेलिब्रेट किया। महाविद्यालय की छात्राओं कोमल गुप्ता,  दीनू, आरती टैगोर, पूजा राणा, अनुराधा, पायल शर्मा, पूजा, कीर्ति, इंदू, करिश्मा, ज्योति, डॉली, ज्योति सैनी, निशा, श्वेता, दीपा, प्रियंका, शिवानी गुप्ता, श्वेता ने पोस्टर व स्लोगन के माध्यम से अपनी मां के प्रति सम्मान और आदर भाव व्यक्त किया। कोविड-19 महामारी के चलते तनाव में भी छात्राओं ने अपने पूरे परिवार में एक सकारात्मक व्यवहार बनाए रखा। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ आशा शर्मा ने छात्राओं के मनोबल की सराहना की और बताया कि मदर्स डे सभी बच्चों और मां के लिए एक विशेष दिन होता है। क्योंकि यह प्रेम और स्नेह के बंधन का  एक जश्न  है। मां के लिए बच्‍चे बहुत अनमोल होते हैं फिर चाहें बच्‍चे छोटे हो या बड़े हो गए हों, पर मां के लिए बच्चे छोटे ही रहते है। हमें कदम-कदम पर मां के प्‍यार, सहारे की जरूरत पड़ती है। ऐसे में हमें अपनी मां से अपनी भावनाओं का इजहार जरूर करना चाहिए। साथ ही प्राचार्या डॉ आशा शर्मा ने कहा कि आज कॉरोना महामारी  के चलते जहा सभी काम स्थिर हो गए है, वहीं  मां ही है जो अपने कार्य पूरी निष्ठा से कर रही है और अपना प्रेम और स्नेह दे रही हैं। इसी के साथ कॉलेज की भावी अध्यापिकाओं भारती, उपासना, आरती पांडे, पूजा ने गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उनके जीवन से प्रेरित होकर स्लोगन बनाएं। इस अवसर पर कॉलेज की प्राचार्या डॉ आशा शर्मा ने कहा कि रविंद्र नाथ टैगोर ने साहित्य के लिए अमूल्य योगदान  दिया है और अपने देश भारत के लिए राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ लिखा है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। इन की सबसे अधिक ख्याति साहित्य के क्षेत्र में है। संस्कृत साहित्य में जो स्थान महाकवि कालिदास का है और हिंदी साहित्य में जो कविकुल चूड़ामणि गोस्वामी तुलसीदास का है, वही स्थान बंगला साहित्य में रवींद्रनाथ टैगोर जी का है। अन्य क्षेत्रों में भी इनका बड़ा योगदान रहा है। देश में समाज सुधार, राष्ट्रीय जागरण और अंतरराष्ट्रीय भावना के विकास के लिए उन्होंने जो कार्य किए हैं, उनके लिए हम इनके चिर ऋणी रहेंगे। उन्होंने जीवन जीने को लेकर भी कई विचार दिए हैं। उनके बताएं विचारों पर चलकर जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। अतः हमें रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा बताए गए उपदेशों को ध्यान में रखकर दूसरों की सहायता करनी चाहिए। साथ ही महाराणा प्रताप जी की जयंती पर प्राचार्या सहित सभी स्टाफ मैंबर्स  ने उन्हें नमन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन वाई. आर.सी. व एन. एस. एस. द्वारा किया गया।

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