जौनपुर।जिले में शर्मशार हुई मानवता,मरीजो को ऑक्सीजन देने वाले पर दर्ज एफआईआर की हो रही आलोचना,
May 1st, 2021 | Post by :- | 112 Views
जौनपुर।जिले में शर्मशार हुई मानवता,मरीजो को ऑक्सीजन देने वाले पर दर्ज एफआईआर की हो रही आलोचना,

जौनपुर।(फिरोज खान पठान)जिले में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना हुई है। एक दिन पूर्व जिले के उमानाथ सिंह जिला अस्पताल यानी सदर अस्पताल का वीडियो बहुत ही तेजी से वायरल हुआ था जिसमे ये दिख रहा था कि, अस्पताल के बाहरी बरामदे में मरीज लेटे हुए है, इतना ही नही ऑक्सीजन की कमी से कराह रहे मरीजों का हाल लेने भी कोई स्वास्थ्य कर्मी नही पहुंचा।लगभग आधा दर्जन मरीज बेसुध हालात में पड़े थे जिसे देख उधर से गुजर रहे लोगों की भी सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी।
इसी दौरान वहाँ मौजूद एम्बुलेंस चालको ने मरीजो की ये दशा देख मानवता की मिसाल पेश करते हुए एम्बुलेंस में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर से बेसुध पड़े मरीजो की मदद करने लगे।जिसका प्रत्यक्षदर्शियों ने वीडियो बनाया और देखते ही देखते ये वीडियो जौनपुर समेत हर जगह फैल गया और मानवता पेस करने वाले इन मददगारों को दुआएं मिलने लगी।और अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे परंतु ये चीज अस्पताल के सीएमएस डॉ अनिल शर्मा को नागवार लग गयी।अस्पताल व अपनी खामियां छिपाने के लिए सीएमएस ने मरीजो की मदद करने वालो पर ही उल्टा मुकदमा दर्ज करा दिया।सीएमएस ने महामारी एक्ट के उलंघन में इन मददगारों पर एफआईआर दर्ज करा लिया।अब तक पूरे भारत मे मदद ना करने वालो पर एफआईआर दर्ज होता था लेकिन सीएमएस ने अपने पवार का इस्तेमाल कर मदद करने वाले पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया जिसे लेकर पूरे जिले में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हो गयी है।कुछ लोगों कहना है कि, देश मे बहुत लोग मदद कर रहे है क्या उनकी डिग्री चेक की जा रही है।पुरानी कहावत ” अगर किसी की जान बचाने के लिए जुठ बोलना पड़े तो बोलो” लेकिन यहाँ सब कुछ उल्टा दिखा।शासन प्रशासन को इस पर गम्भीरता से जांच करनी चाहिए।अगर यही बात है तो अस्पताल के इमरजेंसी से लेकर ओपीडी और ओटी तक दिन भर चक्कर लगाने वाले दलाल कौन सी डिग्री लेकर घूमते फिरते है और कभी कभी डॉक्टर के गैर मौजूदगी में चैंबर में मरीजों को दवा तक लिख देते है।अपनी खामियां छिपाने के लिए सीएमएस डॉ अनिल कुमार द्वारा किये गए कृत्य पर चाहु ओर निंदा हो रही है।ट्विटर से लेकर फेसबुक व व्हाट्सएप पर लोग अपनी भड़ास निकाल रहे है।उनका कहना है कि, सभी मददगार पूरी तरह निर्दोष है बल्कि अस्पताल प्रशासन पर कार्यवाही होनी चाहिए कि, जब अस्पताल के बाहर जमीन पर मरीज तड़प रहे थे तो वो कहाँ थे?

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