महानिदेशक श्री समीर पाल सरो व चौकसी विभाग के महानिदेशक डॉ.के.पी. सिंह ने आज हरियाणा उर्दू अकादमी, पंचकूला के प्रांगण में अटल अदबी केंद्र/पब्लिक लाइब्रेरी का लोकार्पण किया
September 20th, 2019 | Post by :- | 152 Views

चंडीगढ़, ( महिन्द्र पाल सिंहमार ) ।    हरियाणा के सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक श्री समीर पाल सरो व चौकसी विभाग के महानिदेशक डॉ.के.पी. सिंह ने आज हरियाणा उर्दू अकादमी, पंचकूला के प्रांगण में अटल अदबी केंद्र/पब्लिक लाइब्रेरी का लोकार्पण किया। लोगों को इस लाइब्रेरी में ऐतिहासिक, राजनैतिक, साहित्यिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, आलोचनात्मक एवं शोधात्मक पुस्तकों के अलावा देशभर की हिन्दी व उर्दू की पत्र-पत्रिकाएं पढऩे को मिलेंगी।

अटल अदबी केंद्र/पब्लिक लाइब्रेरी का लोकार्पण करने के उपरांत उन्होंने हरियाणा उर्दू अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों एवं पूर्व में स्थापित लाइब्रेरी का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भूतपूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपाई के नाम से एक अदबी मरकज़ और आर्टगैलरी का उद्घाटन भी किया। अकादमी के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा को इस अकादमी में और सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ भाषा वैज्ञानिकों को समय-समय पर पुरस्कृत करने के निर्देश दिए गए।

इस अवसर पर ‘उर्दू और हिंदी का लिसानी (भाषाई) रिश्ता’ पर आयोजित सेमिनार में हिंदी एवं उर्दू भाषा के नामी विद्वानों ने भाग लिया जिनमें श्री अदीब श्री शीन काफ निज़ाम, श्री विज्ञान व्रत, डॉ. अतहर फारूकी, डॉ. माधव कौशिक, डॉ. हबीब सैफी के नाम उल्लेखनीय हैं।

इसके अलावा, इस अवसर पर छ: पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जिनमें श्री मोहिन्द्र प्रताप चाँद और डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा नाजि़म द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘उर्दू अदब और हरियाणा’ एवं अदबी सिलसिले के तहत डॉ. राणा गन्नौरी, श्री मोहिन्द्र प्रताप चाँद, डॉ. कुमार पानीपती, डॉ. के.के.ऋषि, डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा नाजि़म पर उर्दू और हिंदी भाषा में लिखी गई किताबें शामिल हैं। सेमिनार में विद्वानों ने दोनों भाषाओं पर अपने-अपने विचार प्रकट किए। सेमिनार के दौरान, हिन्दी व उर्दू भाषा के परस्पर संबंध को दर्शाने के लिए ‘‘लिपट जाता हूँ मां से और मौसी मुस्कुराती है, मैं उर्दू में गजल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है’’ नामक थीम का भी लोकार्पण किया गया।

सेमिनार को संबोधित करते हुए डॉ. के.पी. सिंह ने कहा कि हिन्दी और उर्दू भाषा एक है, लेकिन इनकी शैलियां दो हैं। दोनों एक दूसरे की पूरक भाषाएं हैं और सभ्यता एवं संस्कार में दोनों का पूर्ण तालमेल देखने का मिलता है। दोनों भाषाओं की जन्मस्थली हिन्दुस्तान है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान ऐसा देश है, जहां हर 10 कोस पर बोली, 20 कोस पर परिधान और 40 कोस पर भाषा का परिवर्तन देखने को मिलता है। इसलिए वही भाषा समृद्ध हो सकती है, जिसमें शब्दों के परिवेश को सही रुप से ढाला गया हो और जिसमें दूसरी भाषाओं के शब्दों का भी मेलजोल हो। उन्होंने कहा कि यदि हिन्दी भाषा उर्दू की रीढ़ है तो उर्दू भाषा हिन्दी का श्रृंगार। उन्होंने कहा कि आज के युग में कुछ भाषाएं विलुप्त होती जा रही हैं, इसलिए भाषाओं का लचीला होना आवश्यक है ताकि वे आमजन की भाषा बन सके।

 

 

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