जौनपुर।कागजों पर पीएमजी दिशा योजना, धन का बन्दरबांट।
March 8th, 2021 | Post by :- | 67 Views

जौनपुर(फिरोज खान पठान)। जिले में ग्रामीणों को डिजिटल रूप से साक्षर करने की पीएमजी दिशा योजना कागजों पर चल रही है और लाखों के सरकारी धन का बन्दरबांट हो रहा है। काफी खोजबीन केबाद गावों में सीएमसी ट्रेनिग सेण्टर का कही दूर दूर तक पता नहीं चला।


सूत्रों का कहना है कि कागजों पर तमाम ऐसे अपात्रों को ट्रेनिंग सेण्टर चलाने की स्वीकृति दी गयी है जो कक्षा 8 और 10 पास है। ग्रामीणों को किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता और वे परीक्षा नहीं देते तथा उन्हे सेण्टर चलाने वाले तथाकथित ट्रेनर परीक्षा देकर पास करा देते है इसके एवज पर प्रति प्रशिक्षार्थी 300 रूपये मिलते है। प्रधानमंत्री की महत्वाकाक्षी योजना में शामिल इस योजना में परीक्षा बिना सीसी कैमरा के करायी जाती है और फर्जी तरीके से परीक्षा कराकर अब तक हजारों ग्रामीणों को सर्टिफिकेट दे कर सरकारी धन का गोलमाल किया जा रहा है।


जब पीएमजी- दिशा के तहत डिजिटल ट्रेनिंग ले चुके महेन्द्र कुमार से बातचीत हुई तब उन्होंने कई अहम खुलासे किए। उनका कहना था कि गाँव के औसत लोग इस योजना के जरिए सर्टिफिकेट ले रहे थे, इसलिए मैंने भी ले लिया। कोई चंद घंटों में कंप्यूटर के बारे में कैसे जान सकता है? मैं खेतों में फरसा चलाता हूं, कंप्यूटर हमारे बस की बात नहीं है।
पीएमजी दिशा के जिला समन्वय से इस बारे में जानकारी लेने के लिए कई बार फोन किया गया तो उन्होने बात नहीं किया। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा की एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि इस बारे में जांच के लिए जिलाधिकारी से शीघ्र एक प्रतिनिधि मण्डल मिलेगा।


ज्ञात हो कि ग्राम पंचायतों में स्थित कॉमन सर्विस सेंटर के पीएमजी-दिशा के तहत जब कोई ग्रामीण कंप्यूटर ट्रेनिंग प्रोग्राम में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो जाता है, तब सेंटर के संचालक को 300 सौ रुपये प्रति व्यक्ति मिलते हैं। पीएमजी-दिशा के गाइड लाइन्स के तहत हर सेंटर के पास कम- से-कम तीन कंप्यूटर होना अनिवार्य है। इसके अलावा आइरिश स्कैनर, इंटरनेट कनेक्शन, बिजली बैक-अप, फिंगर प्रिंट स्कैनन, वेबकैम और बायोमेट्रिक होना भी जरूरी है।
लेकिन यहां किसी केन्द्र के संचालक के पास कोई व्यवस्था नहीं है। जब कोई ग्रामीण अपना नामांकन करवा लेते हैं तब औपचारिक तौर पर उन्हें कुछ चीजों की ट्रेनिंग दी जाती है, जैसे- कंप्यूटर, स्मार्ट फोन और टैबलेट चलाना, इंटनेट ब्राउजिंग, ई-मेल भेजना और डिजिटल भुगतान के साथ-साथ ऑनलाइन सेवाओं आदि की जानकारी दी जाती है। सब कुछ मनमानी और लूट खसोट का खेल चल रहा है।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।