भगवत दर्शन हेतु सत्संग – स्वाध्याय और सेवा के भाव हों : स्वामी श्री विश्वमित्रानंद गिरी जी महाराज
September 19th, 2019 | Post by :- | 192 Views

कालका, (हरपाल सिंह) ।सत्संग – स्वाध्याय और सेवा भाव को जीवन की दिनचर्या में शामिल करने से जो अनूठा अनुभव और अनुभूति प्राप्त होती है वह अपने आप में विरल है । यही वास्तव में भगवत दर्शन का एक सुगम मार्ग है। यह उदगार आज त्रिशक्ति साधना एवं ज्योतिष अनुसंधान समिति व अग्र क्रांति मंच के अथक प्रयास से सेक्टर 12ए स्थित श्री हरिहर मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर व्यासपीठासीन श्री बगलापीठाधीश्वर स्वामी विश्वमित्रानंद गिरी जी महाराज ने व्यक्त किये । स्वामी जी ने अपनी मधुर वाणी से गौ -गंगा एवं तुलसी के महात्म्य को अपने प्रवचन में समाहित करते हुए महर्षि श्री कृष्ण द्वैपायन वेदव्यासजी द्वारा रचित श्री भागवत पुराण में वर्णित भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को बड़ी ही सरलता के साथ भगवत प्रेमियों को श्रवण कराया । भगवान कीअद्भुत लीला एवं श्री गोवर्धन की कथा प्रसंग को सुनकर उपस्थित भक्तजन मंत्रमुग्ध हो गए । इस शुभ अवसर पर भगवान को प्रिय छप्पन प्रकार के भोग अर्पित किए गए ।  इससे पूर्व सुवह चंडीगढ़ के पार्षद सत्यप्रकाश अग्रवाल ने सपरिवार पहुँचकर यजमान पूजा में भाग लिया । इस भागवत सप्ताह में विशिष्ट अतिथियों , सहयोगियों , यजमानों ने बढ़चढ़कर अपनी अपनी भागीदारी को निभाने का कार्य किया है । इस समस्त महानुभावों के प्रति आयोजक मंडल की ओर से श्री सज्जन जिंदल ने आभार प्रकट किया है ।

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