फाॅस्वेक की मीटिंग में छाया रहा महंगाई का मुद्दा, चंडीगढ़ सौर ऊर्जा विभाग (क्रेस्ट) के प्रमुख बोले – बिजली संकट से बचने के लिए लगवाएं सोलर उपकरण
February 28th, 2021 | Post by :- | 95 Views

चंडीगढ़ (मनोज शर्मा) फेडरेशन ऑफ सेक्टर्स वेल्फेयर एसोसिएशनस ऑफ चंडीगढ़ (फाॅस्वेक) की मासिक बैठक सेक्टर 35 में संपन्न हुई । जिसमें भारी संख्या में सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर चंडीगढ़ सौर ऊर्जा विभाग (क्रेस्ट) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देबेंद्र दलाई मुख्य अतिथि के रूप से सम्मिलित हुए और लोगों से अपील की कि चंडीगढ़ में बिजली संकट से बचने के लिए और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग करें। उन्होंने विस्तृत रूप से बताया कि किस प्रकार सौर ऊर्जा बिजली का सस्ता विकल्प है और साथ ही इस संबंध में लोगों की भ्रांतियों को भी दूर किया।

मीटिंग में सदस्यों ने तेजी से बढ़ रही महंगाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की। फाॅस्वेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने नगर निगम द्वारा डोर-टू-डोर कचरा उठाने में लोगों को आ रही समस्याओं का जिक्र किया और कहा कि पुराना सिस्टम नए सिस्टम से कहीं बेहतर था। महासचिव जे एस गोगिया ने कहा कि जिस प्रकार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतें आसमान को छू रही हैं, चंडीगढ़ जैसे महंगे शहर में निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है।
फाॅस्वेक के मुख्य प्रवक्ता और सेक्टर 38 वेस्ट आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा की चंडीगढ़ में जिस प्रकार पानी के रेट 3 गुना तक बढ़ा दिए गए हैं और ऊपर से 30% सीवर सेस लगा दिया गया है उसने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। शायद चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम ने सोचा है कि गरीबों को ही खत्म कर दो तो गरीबी अपने आप खत्म हो जाएगी। मुख्य सलाहकार कमलजीत सिंह पंछी ने कहा की जीवन की मूलभूत आवश्यकता पानी को आम आदमी की पहुंच से बाहर करना अमानवीय है।
सेक्टर 38 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष बी एम खन्ना के अनुसार पानी की दरों में बढ़ोतरी के लिए सीधे तौर पर सभी पार्षद जिम्मेदार हैं जिन्हें चंडीगढ़ की जनता कभी माफ नहीं करेगी। सेक्टर 39 आरडब्ल्यूए के प्रधान अमरदीप सिंह के अनुसार जिस प्रकार हर चीज की कीमत में इतनी बढ़ोतरी की गई है यह सरकार की तरफ से अघोषित आपातकाल के समान है।
डंपिंग ग्राउंड ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन दयाल कृष्ण ने कहा कि डंपिंग ग्राउंड से उठती असहनीय बदबू और प्रदूषण ने आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीना दूभर कर रखा है परंतु न तो राजनेता और न ही अधिकारी इसे गंभीरता से ले रहे हैं। जब यहां आग लगती है तो हालात बद से बदतर हो जाते हैं। आग डंपिंग ग्राउंड में क्यों और कैसे लगती है इसकी कभी जांच नहीं करवाई जाती। फाॅस्वेक के सलाहकार के एस चौधरी ने कहा कि डंपिंग ग्राउंड की वजह से  लोगों को आंखों, सांस और फेफड़ों से संबंधित कई गंभीर बीमारियां हो रही हैं।
फाॅस्वेक के सचिव आर एस गिल ने सिंचाई के पानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक तो इसकी दरें बहुत अधिक बढ़ा दी गई और ऊपर से जरूरत के अनुसार सप्लाई भी नहीं दी जा रही है। सेक्टर 21 आरडब्ल्यूए के महासचिव प्रदीप चोपड़ा ने आवारा कुत्तों द्वारा लोगों विशेष तौर पर बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों को गंभीर रूप से काटने का मुद्दा उठाया और कहा कि नगर निगम को शीघ्र ही इसका समाधान निकालना चाहिए। सेक्टर 35 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष जगपाल सिंह ने कहा कि लोगों को कलर कोडेड स्टीकर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने में बहुत दिक्कतें आ रही हैं। कोरोना के समय में लोगों को लाइनों में लगवाने की बजाय उनसे ऑनलाइन एप्लीकेशन लेनी चाहिए और स्टीकर डाक द्वारा भेजे जाने चाहिएं।
मॉडर्न हाउसिंग कंपलेक्स, मनीमाजरा आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष के एल अग्रवाल ने कहा की चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वाले लोगों ने जरूरत के हिसाब से जो बदलाव किए हैं उन्हें दिल्ली की तर्ज पर नियमित किया जाना चाहिए। सेक्टर 45 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले को गलत ठहराया और कहा कि इससे चंडीगढ़ में बिजली की दरों में अत्यधिक बढ़ोतरी होगी। सेक्टर 55 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष एस एस चीमा ने कहा कि सरकार को जन कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए न की कॉरपोरेट हाउस की तरह केवल धन कमाने के लिए। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि आने वाले वक्त में लोगों की समस्याएं दूर करवाने के लिए संघर्ष को और तेज किया जाएगा।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।