बसंत पंचमी के पावन दिवस पर वैश्य आर्य कन्या महाविद्यालय में हवन यज्ञ कार्यक्रम का आयोजन
February 16th, 2021 | Post by :- | 229 Views

बहादुरगढ़ लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ (गौरव शर्मा)

वैश्य आर्य कन्या महाविद्यालय, बहादुरगढ़ में बसंत पंचमी के पावन दिवस पर ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का ध्यान करते हुए यज्ञ में आहुति डाल भरतीय संस्कृति व सभ्यता को आत्मसात किया गया। हवन यज्ञ का आयोजन महाविद्यालय की आई0क्यू0ए0सी0 व रैड क्राॅस सैल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एस0डी0एम0 बहादुरगढ़ हितेन्द्र कुमार ने शिरकत की। महाविद्यालय की प्रबंधन समिति ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए छात्राओं के लिए अपने शैक्षिक विचार व विस्तार कार्यक्रम के बारे में बताया। अतिथियों का यहाँ पहँचने पर बहादुरगढ़ षिक्षा सभा से जुड़े पदाधिकारियों, वैष्य काॅलेज बी0एड0 षिक्षण संस्थान की प्रबंधक समिति, बहादुरगढ़ षिक्षा सभा के प्रधान श्री श्रीनिवास गुप्ता जी, वैष्य आर्य कन्या महाविद्यालय, बहादुरगढ़ के महासचिव श्री प्रेमचन्द बंसल, मैनेजर श्री यषपाल गांधी जी के अतिरिक्त उपप्रधान श्री राजपाल शर्मा जी, कैषियर श्री वेद प्रकाष जी, प्राचार्या डाॅ0 राजवन्ती शर्मा व अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मैडम श्री संजीत कौर के द्वारा की गई व श्री एस0के0 मलिक की गरिमामयी उपस्थिति रही। छात्राओं द्वारा माँ सरस्वती वंदना के बाद स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।
प्राचार्या डाॅ0 राजवन्ती शर्मा ने अपने संबोधन में महाविद्यालय की शैक्षणिक तथा अतिरेक उपलब्धियों की चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए यह महाविद्यालय प्रयासरत है। आज समाज व राष्ट्र की उन्नति का निर्धारण छात्राओं की षिक्षा तय करती है। आज छात्राएं जीवन के हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। वे अपने को कमजोर न समझे। चारों तरफ फैली बुराइयाँ हमारे कर्म क्षेत्र में बाधा न बनें, हम अपना लक्ष्य सदैव ऊँचा रखें और उसे प्राप्त करने हेतु सदैव परिश्रम और धैर्य के साथ बढ़ते रहें। हमें स्वयं का मूल्यांकन कर नया सीखने की जरूरत है। हमारा यज्ञ हमारी सात्विक उन्नति का संदेष है। हम अपनी ऊर्जा का सदुपयोग करते हुए समाज को सकारात्मक दिषा में लेकर जाएं।
यज्ञ की आहुति हमें निरन्तर संघर्षरत रहकर आगे बढ़ने का संदेष देती है। युवा शक्ति देष समाज व राष्ट्र को नए ज्ञान सोच व मनोवेग का संतुलित योगदान देती है। हमारे युवा वर्ग की कर्मठता, निर्भीकता, सामजस्यता इस वैष्विक दौड़ में देष को नए पादान पर लेकर जाएगी। हम पूरे विष्व में एक कर्म क्षेत्र की मिसाल बनें। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि आज माँ सरस्वती के पावन दिवस पर जहाँ एक तरफ पूरा वातावरण सुगंधित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आज हम समाज में हमारी षिक्षा के पुर्नमूल्यांकन स्वरूप को ढूँढ रहे हैं। माँ सरस्वती के प्रति हमारी पूर्ण अराधना तभी सफल होगी जब हम पूर्ण षिक्षित समाज का सपना कर पाएं और रूढिवादी परम्पराओं को तोड़कर राष्ट्र नवनिर्माण में अपना सहयोग दें। हमारी षिक्षा पूर्णतः षिक्षित और सषक्त भारत के संदेष से परिपूर्ण हों।
मुख्य अतिथि महोदय, श्री हितेन्द्र कुमार जी, एस.डी.एम बहादुरगढ ने छात्राओ को संबोधित करते हुए कहा कि षिक्षा हमारे व्यक्तित्व का अभिन्न भाग है। भारत युवाओं का देष है। हम अपनी मानसिक व शैक्षिक क्रांति द्वारा समाज व राष्ट्र को परम्परा व आधुनिकता के साथ जोड़कर वैष्विक समुदाय में नए भारत का निर्माण कर सकते हैं। नया भारत भविष्य का भारत ही आपका प्रयास हो। ध्यान रहे षिक्षा की सार्थकता समाज के हाषिये पर रह रहे लोगों के कल्याण से पूर्ण हो। आपके माता-पिता, संस्थान, समाज, राष्ट्र हमेषा आपके लिए पूजनीय रहें। आपकी षिक्षा वैष्विक दृष्टिकोण से पूर्ण हो। मुख्य अतिथि महोदय ने षिक्षा नीति की गुणता पर प्रकाष डालते हुए इसमंे सामाजिक सेवा की उत्कृष्टता का महत्व समझाया। उन्होंने डिजिटल षिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि षिक्षा अच्छे बुरे का फर्क करना सिखाती है।
कार्यक्रम अध्यक्ष मैडम श्री संजीत कौर ने महाविद्यालय द्वारा छात्राओं को दी जाने वाली षिक्षा और उनके व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए किए जाने वाले कार्यों की सरहाना की। कार्यक्रम में गैस्ट आॅफ आॅनर के रूप में उपस्थित श्री एस0के0 मलिक, रिटायर्ड सह निदेषक उद्योग और वाणिज्य विभाग, हरियाणा ने कहा कि षिक्षित बेटियों से सभ्य समाज का निर्माण होता है। भारत आज विष्व की एक बढती ताकत है, यहाँ आधुनिक समाज शैक्षिक पैमाने का निर्धारण करता है।
कार्यक्रम में अपने संबोधन में बहादुरगढ़ षिक्षा सभा के प्रधान श्री श्रीनिवास गुप्ता जी ने कहा कि हमारे अंदर दृढता का संकल्प होना चाहिए जिसके बलबूते पर हम आगे बढ सकते हैं। उन्होंने नारी शक्ति को आगे लाने व उसका पूरा मान-सम्मान करने पर बल दिया। बेटियों को षिक्षित करने के लिए समाज के लोगों को आगे आना चाहिए। आज बेटियों हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम कर रही है। उन्हें उच्च स्तर पर षिक्षा मिले तो देष व समाज ज्यादा तरक्की कर सकता है। उन्होंने अपनी संस्था द्वारा छात्राओं की हर संभव मद्द व इसके बढते व्यापारीकरण को रोकने की बात कही। वास्तव में षिक्षा हमारे अंदर छिपे मानवीय गुणों की एक सुंदर प्रस्तुति है। हमारे समाज की हर छात्रा षिक्षित हो, बुराइयों से लड़नें में सक्षम हो वही हमारी आज माँ सरस्वती के प्रति सच्ची वंदना होगी। हमारी प्रबंधन समिति इस क्षेत्र में लगातार प्रयासरत है। देष की अस्मिता व उन्नति में बेटियों का बड़ा हाथ है।

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