बजट में केंद्र सरकार ने राजस्थान के साथ किया भेदभाव : गहलोत
February 3rd, 2021 | Post by :- | 58 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि केंद्रीय बजट दिशाहीन और निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि यह गरीब, किसान विरोधी और महंगाई बढ़ाने वाला है। इस बजट में कोरोना महामारी से पैदा हुई विकट बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। सीएम गहलोत ने कहा कि मध्यम वर्ग करदाताओं को उम्मीद थी कि मोदी सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव कर कोई राहत देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बजट से समाज का हर तबका पूरी तरह से निराश हुआ है। सीएम गहलोत ने राजस्थान के लिए इसे पूरी तरह निराशाजनक बजट बताया है। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि बजट में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा और हर घर नल योजना में प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। प्रदेश से सभी सांसद एनडीए के होने के बावजूद केंद्र सरकार ने प्रदेश से भेदभावपूर्ण व्यवहार किया है। इस बजट का पूरा फोकस सिर्फ चुनावी राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी पर रहा। यह केंद्रीय बजट से ज्यादा पांच चुनावी राज्य बजट प्रतीत हो रहा है। गहलोत ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण राज्यों के वित्तीय स्रोत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राज्यों को उम्मीद थी कि बजट में विशेष आर्थिक पैकेज दिए जाएंगे जिससे राज्यों की स्थिति सुधर सके। ऐसे पैकेज के द्वारा नए रोजगार पैदा किए जा सकें और आमजन की परचेजिंग पावर बढ़ सके लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले महीनों में केंद्र सरकार ने रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन किया है तब भी मोदी सरकार राज्यों को जीएसटी का हिस्सा नहीं दे रही है जिससे राज्यों में विकास के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।कृषि और रीयल एस्टेट सेक्टर को लेकर गहलोत ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर महीनों से आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार ने इस बजट में किसान हित में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया है। सीएम गहलोत ने बजट को पूरी तरह बड़े उद्योगपतियों के हितों को साधने वाला बजट बताया। मोदी सरकार ने पूर्व में कॉर्पोरेट टैक्स में कमी की थी जिससे इस वर्ष कॉर्पोरेट टैक्स के कलेक्शन में 16 फीसदी से अधिक की कमी आई है। इससे विकास योजनाओं को 76 हजार करोड़ की राशि कम अर्जित हुई। इसका विकास कार्यों पर बेहद प्रतिकूल असर होगा। उन्होंने ने कहा कि यूपीए सरकार के समय एफडीआई की मुखर विरोधी रही भाजपा सरकार में आने के बाद से एफडीआई को बढ़ावा दे रही है जिसकी झलक बजट में भी दिखी। अगर पूर्व में सिर्फ राजनीतिक कारणों से एफडीआई का विरोध करने की जगह देशहित में भाजपा ने यूपीए का सहयोग किया होता तो इस दिशा में देश और भी आगे होता।

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