वीर विक्रमाजीत में दिखी नारी की महता, साप्ताहिक संध्या में हुआ सांग मंचन
February 1st, 2021 | Post by :- | 65 Views

हरियाणा कला परिषद् द्वारा आयोजित साप्ताहिक आॅनलाईन संध्या में करनाल के प्रसिद्ध सांगी विष्णु पहलवान द्वारा पंडित मांगेराम का लिखा सांग वीर विक्रमाजीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने किया।

सांग मंचन के दौरान हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने कहा कि लोक कलाकार सदैव प्रदेश की संस्कृति को उंचा उठाने में पुरजोर मेहनत करते हैं। हरियाणवी लोक कला के संरक्षण एवं संर्वधन के लिए हरियाणावासियों को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए तथा लोक कलाकारों को सहयोग देते हुए आने वाली पीढ़ी के लिए प्राचीन संस्कृति को सहेजना चाहिए। वहीं सांग मंचन में कलाकारों ने दिखाया गया कि राजा विक्रमाजीत उज्जैन में राज कर रहे हैं और उनके राज्य में देवलोक से परमहंस पहुंच जाते हैं। विक्रमाजीत के पूछने पर परमहंस बताते हैं कि उनकी हंसनी को इंद्रदेव ने कैद कर लिया है और उन्हें 12 वर्षों के लिए देवलोक से निकाल दिया है। वीर विक्रमाजीत हंसों की पीड़ा से दुखी हो जाते हैं और हंसों की हंसनी को इंद्र की कैद से छुडाने के लिए निकल पड़ते हैं। जहां उनकी मुलाकात रानी रत्नकौर से होती है। रानी रत्नकौर एक गम्भीर बिमारी से ग्रस्त होती हैं। रानी रत्नकौर के पिता ऐलान करवाते हैं कि जो भी व्यक्ति रत्नकौर की बिमारी को दूर करेगा, उसके साथ रत्नकौर का विवाह कर दिया जाएगा। राजा विक्रमाजीत रानी रत्नकौर की बिमारी का इलाज ढूंढ लेते हैं और उसे बिमारीमुक्त कर देते हैं। ऐसे में रानी रत्नकौर राजा से विवाह कर लेती है और राजा के साथ हंसनी को ढूंढने निकल पड़ती है। मार्ग में राजा एक शहर में पहुंचते हैं जहां एक राजपूत की लड़की खाण्डेराव रहती है। खाण्डेराव राजा विक्रमाजीत पर आसक्त हो जाती है। और अपने पिता द्वारा रखी हुई शर्तों को राजा के सामने रखती हैं। रत्नकौर राजा को शर्तें मानने से मना करती हैं, किंतु खाण्डेराव की स्थिति को देखकर विक्रमाजीत को सभी शर्ते मानते हुए खाण्डेराव से विवाह करने के लिए कहती हैं। राजा खाण्डेराव के पिता की शर्तें मान लेता है और खाण्डेराव से विवाह कर लेता है। राजा विक्रमाजीत दोनों रानियों को उज्जैन जाने के लिए कहते हैं और स्वयं हंसनी ढूंढने के लिए जाना चाहते हैं।

लेकिन दोनों रानियां राजपाट को छोड़कर राजा की हंसनी को ढूंढने में मदद करती हैं। इस प्रकार राजा दोनों रानियों को लेकर हंसनी को इंद्र की कैद से छुड़ा लाता है। सांग में हरियाणवी संस्कृति की झलक दिखाते हुए कलाकारों ने नारी की महता को दिखाया। सांग मंचन में बलदेवराज, राजेश कुमार, पवन कुमार, शीशपाल, बलवीर, विक्रम, पालेराम, रमेश कुमार, काला तथा कृष्ण कुमार आदि कलाकारों ने सहयोग दिया।

 

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