खेड़ली कस्बे के वार्ड नंबर 4 की 23 वर्षीय युवती ने अपनी बीमारी स्पाइन टीवी से परेशान होकर मुख्यमंत्री वह विधायक बाबूलाल बैरवा को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है।
January 28th, 2021 | Post by :- | 81 Views

कठूमर(अशोक भारद्वाज):-युवती रिया मित्तल पुत्री विष्णु मित्तल जो आज से 2 वर्ष पूर्व अपना जीवन खुशी खुशी जी रही थी। और बी.एड करते हुए रेलवे स्टेशन के पास एक स्कूल में अध्यापन कार्य का प्रशिक्षण ले रही थी। कि जनवरी 2019 में उसका व्यवहार सामान्य होने लगा। और परिजनों के अनुसार यह युवक्ति बार-बार बेहोश होने लगी। धीरे-धीरे उसके दोनों पैर भी सुन्न हो गए। परिजनों ने इसे भरतपुर एक डॉक्टर को दिखाया और उस डॉक्टर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित युवती को जयपुर रैफर कर दिया। वहां पहले पीड़िता को ब्रेन टीवी बाद में स्पाइन टीवी की बीमारी घोषित कर दी गई। और पीड़ित युवती के कंधे के नीचे का पूरा शरीर शिथिल हो गया। और बुरी तरह इस बीमारी ने जकड़ लिया। इसके चलते उसके परिजन प्रसिद्ध न्यूरोलिस्ट अशोक पनगढ़िया के पास गए। जिन्होंने युक्ति के परिजनों को एम्स के न्यूरो विभाग के हेड डॉ विनय गोयल को दिखाने की सलाह दी। इस पर परिजन सितंबर 2019 को डॉ विनय गोयल के पास पीड़िता को दिल्ली ले गए। तभी से ही डॉक्टर विनय गोयल का इलाज चल रहा रहा था। इस दौरान युवती की की हालत स्थिर होने से पीडिता हताश न दुखी हो गई। और दुखी होकर दो-तीन दिन पूर्व खेड़ली में आयोजित दिव्यांग शिविर में विधायक बाबूलाल बैरवा के पास पहुंची और इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी। जिस पर विधायक ने पीड़िता को समझाया और बेहतर इलाज कराने व आर्थिक मदद कराने का आश्वासन दिया।

उल्लेखनीय है कि पीड़िता के पिता खेड़ली कस्बे में मीठे पतासे की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। और घर की आर्थिक स्थिति कमजोर है। इलाज के दौरान भी पीड़िता के परिवार के लाखों रुपए खर्च हो गए। और लेकिन युवती की स्थिति जस की तस बनी हुई है। इधर डॉ विनय गोयल वेदांता गुड़गांव में स्थानांतरित हो गए। इससे इस परिवार के पास पीड़िता का महंगा इलाज कराने की स्थिति नहीं रही।

पीड़ित बेटी इच्छा मृत्यु का पत्र लेकर मेरे पास पहुंची मैंने बेटी को समझाया कि सरकार का काम लोगों को जीवन देना है। और बेहतर इलाज कराने एवं आर्थिक सहायता मुहैया कराने की बात कही और इस संबंध में में मुख्यमंत्री से भी बात करूंगा।
विधायक बाबूलाल बैरवा।
कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच के साथ ऐसी बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। और डॉक्टरी सलाह पर लगातार अमल करते हुए फिर से जिंदगी में खुशियां लौट सकती हैं। लगातार उपचार लेने के साथ ही अपने आप में जीने का आत्मविश्वास जगा कर रोग पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
डा. विनय गोयल
सेवानिवृत्त प्रोफेसर एम्स नई दिल्ली हेड डायरेक्टर न्यूरोलॉजी मेदांता हॉस्पिटल गुरुग्राम हरियाणा।
फोटो:- रिया मित्तल पिडिता (घेरे में) साथ में उसकी मां।

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