खेलो इंडिया यूथ गेम्स- 2021’ की मेजबानी करने का मौका मिला है इस बार हरियाणा को–युवाओं को अपनी प्रतिभा अनुसार प्रदर्शन करने का मिलेगा बेहतरीन मौका:-उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला।
January 27th, 2021 | Post by :- | 174 Views

अंबाला :(आशोक शर्मा)
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने मंगलवार को 72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। अम्बाला शहर स्थित पुलिस लाईन मैदान में यह राष्टï्रीय पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ने जिला वासियों ने नाम अपना शुभ संदेश भी दिया। इससे पहले उन्होंने शहीद स्मारक पर पंहुचकर शहीदों को श्रद्घांजलि दी। शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ाकर शहीदों को नमन किया।
अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि 1950 में आज ही के दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। संविधान सभा के सदस्यों ने लगभग 3 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद यह संविधान तैयार किया। इसी संविधान की बदौलत छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, सभी को न्याय, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार मिला। इस अवसर पर उन्होंने बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर समेत संविधान सभा के तमाम सदस्यों को नमन किया।
अपने सम्बोधन में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस के इस पावन पर्व के साथ हमारे देशभक्तों के त्याग, तप और बलिदान की एक लम्बी गौरवगाथा जुड़ी हुई है। देश को आजादी दिलाने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, पण्डित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव अम्बेडकर जैसे अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों ने कड़ा संघर्ष किया। शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद और उधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों के बलिदानों के कारण ही आज हम आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं।
अभिव्यक्ति के अनवरत चरण में उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में हरियाणा का अहम योगदान रहा है। सन् 1857 की क्रांति सबसे पहले अम्बाला छावनी से ही शुरू हुई थी। इस क्रांति में राव तुलाराम ने नसीबपुर में अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। झज्जर के नवाब अब्दुर्रहमान खान, बल्लबगढ़ के राजा नाहर सिंह तथा फर्रूखनगर के शासक अहमद अली को बिना सुनवाई के फांसी पर लटका दिया गया था। हरियाणा के लोग आज भी सेना में भर्ती होना अपनी शान समझते हैं। यही कारण है कि आज भारतीय सेना का हर दसवां जवान हरियाणा से है। गणतंत्र दिवस का यह पावन पर्व खुशियां मनाने के साथ-साथ आत्म-विश्लेषण करने का भी दिन है। आजादी के बाद नि:संदेह राष्ट्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन वह मुकाम हासिल करना अभी बाकी है, जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था
उन्होंने कहा कि जैसा कि हम सब जानते हैं, कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है और एक दौर तो ऐसा भी आया जब अपने-आपको महाशक्ति बताने वाले देश भी इसके सामने लाचार नजर आए। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऊर्जावान व गतिशील नेतृत्व में भारत ने धैर्य और संयम से काम लिया और इस महामारी का डटकर मुकाबला किया। यही कारण है कि भारत में इसके संक्रमितों की मृत्यु-दर पश्चिमी देशों के मुकाबले बेहद कम रही। देश के असंख्य डॉक्टरों, नर्सों, पैरा-मेडिकल स्टाफ, पुलिस कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं आदि ने कोरोना योद्धा के रूप में मानवता की महान सेवा की है। अब चूँकि कोरोना की वैक्सीन आ गई है, इसलिए उम्मीद है कि जल्द ही हम इस महामारी को हराने में कामयाब होंगे।
उन्होंने कहा कि हम अपने शहीदों के बलिदानों का कर्ज तो नहीं चुका सकते, लेकिन उनके परिजनों को कुछ सुविधाएं देकर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य जता सकते हैं। प्रदेश में स्वतंत्रता सेनानियों व उनकी विधवाओं को 25 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाती है। वीरगति को प्राप्त होने वाले सैनिकों के परिवारों को दी जाने वाली एक्सग्रेेसिया ग्रांट 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। भूतपूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को दी जाने वाली विभिन्न प्रकार की पेंशनों में बढ़ोतरी की गई है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान वीरगति को प्राप्त होने वाले हरियाणा के शहीदों के 332 आश्रितों को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों तथा उनके आश्रितों के सम्मान एवं कल्याण के लिए ‘सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग’ का गठन किया गया है। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को राज्य परिवहन की सामान्य बसों में राज्य की सीमा के अंदर मुफ्त यात्रा सुविधा दी गई है।
उन्होंने कहा कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री और लोकप्रिय नेता चौधरी देवीलाल जी का ‘लोकराज लोकलाज से चलता है‘ सिद्धांत भी सुशासन पर ही आधारित था। उनकी सोच दूरगामी और जमीन से जुड़ी थी। उन्होंने अपने शासनकाल में आम आदमी के हित में कई ऐसे दूरगामी निर्णय लिए, जिनका आज भी अनुसरण हो रहा है। उन्होंने घुमन्तु जातियों के स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए एक रुपया प्रतिदिन उपस्थिति पुरस्कार के रूप में देने का अनूठा निर्णय लिया। इसी तरह, आज हमारे बुजुर्गों को जो बुढ़ापा पेंशन मिल रही है वह भी चौधरी देवीलाल जी की ही देन है। हरियाणा को अलग राज्य के रूप में गठित करवाने में चौधरी देवीलाल जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता, अलग राज्य बनने से हरियाणा में विकास की गति बढ़ी और आज अग्रिम राज्यों की पंक्ति में खड़ा है।
हरियाणा की मौजूदा सरकार भी ‘सुशासन से सेवा का संकल्प’ लेकर आई है

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