नगर निगम के घरों से कूड़ा उठाने के गलत फैसले की जिम्मेदारी लें अधिकारी और पार्षद, नुकसान की भरपाई के लिए काटा जाए उनका वेतन और भत्ते – फाॅस्वेक
January 23rd, 2021 | Post by :- | 118 Views

चंडीगढ़ (मनोज शर्मा) फेडरेशन ऑफ सैक्टर्स वेल्फेयर एसोसिएशनस ऑफ चंडीगढ़ (फाॅस्वेक) की आपात बैठक सैक्टर 21 में बुलाई गई जिसमें सदस्यों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। मीटिंग का मुख्य मुद्दा नगर निगम द्वारा अपनी गाड़ियों में घरों से कूड़ा इकट्ठा करना था जिसकी वजह से लोगों को बड़ी समस्याएं आ रही हैं।

फाॅस्वेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि नगर निगम के इस गलत फैसले ने न केवल शहरवासियों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं बल्कि इस व्यवसाय से रोजी-रोटी कमाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले प्राइवेट गार्बेज कलेक्टर्स के लिए भी भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। सैक्टर 1 से सैक्टर 30 तक नई व्यवस्था शुरू किए हुए नगर निगम को 1 महीने से अधिक का समय हो गया है परंतु सिवाय परेशानी के लोगों को कुछ हासिल नहीं हुआ। लोगों के घरों में कूड़े के ढ़ेर लगे पड़े हैं जिसे उठाने में नगर निगम नाकाम रहा है।
फाॅस्वेक के मुख्य प्रवक्ता और सैक्टर 38 वैस्ट आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि अधिकारियों और पार्षदों को लगा की घरों से कूड़ा उठाने से नगर निगम को बड़ा लाभ होगा और इसके चलते उन्होंने पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम पर 30 करोड़ रुपए की कूड़े की गाड़ियों और उन्हें चलाने पर खर्च होने वाली भारी भरकम धन-राशि का अनावश्यक बोझ डाल दिया। जबकि इस पैसे से चंडीगढ़ में कई विकासात्मक कार्य किए जा सकते थे। जब निजी गार्बेज कलेक्टर्स द्वारा घरों से कूड़ा सुचारू रूप से उठाया जा रहा है तो नगर निगम ने यह गलत फैसला क्यों लिया, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और इस पब्लिक-मनी के नुकसान की भरपाई के लिए अधिकारियों के वेतन और पार्षदों के भत्ते काटे जाने चाहिएं।
महासचिव जे एस गोगिया के अनुसार नगर निगम ने घरों से  कूड़ा उठाने वाले हजारों लोगों के सामने रोजगार का बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है और इस गलत निर्णय की वजह से ईमानदारी से रोजी-रोटी कमा रहे ये लोग अगर अपराधिक कार्य करने लगें तो इसका उत्तरदायित्व किसका होगा। मुख्य सलाहकार कमलजीत सिंह पंछी के अनुसार एक बार प्राइवेट गार्बेज कलेक्टर्स की जगह नगर निगम का एकाधिकार हो गया तो नगर निगम लोगों से इस कार्य के लिए मनमानी धनराशि लेगा जैसा कि उसने प्रॉपर्टी टैक्स और पानी की दरों के साथ भी किया है।
सैक्टर 22 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष राजेंद्र मोहन कश्यप के अनुसार कूड़े के रेट लोगों पर थोपना न केवल गैरकानूनी है बल्कि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर है। सैक्टर 39 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष अमरदीप सिंह के अनुसार कूड़ा उठाने के रेट पानी के बिलों में लगाकर भेजना पूरी तरह असंवैधानिक है क्योंकि दोनों सेवाएं अलग-अलग हैं। सैक्टर 55 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष एस एस चीमा ने कहा यदि कोई व्यक्ति अपने घर से नगर निगम से कूड़ा उठवाना ही नहीं चाहता तो उसे कैसे मजबूर किया जा सकता है।
सैक्टर 36 आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष डॉ जगपाल सिंह के अनुसार नगर निगम की गाड़ियों के आने-जाने का कोई समय नहीं है और न ही लोगों की तरफ नगर निगम के कर्मचारियों का व्यवहार ठीक है। सैक्टर 15 आरडब्ल्यूए की उपाध्यक्ष दीपा दूबे ने कहा कि प्राइवेट गार्बेज कलेक्टर्स की तरह नगर निगम के कर्मचारी ऊपरी मंजिलों पर जाकर कूड़ा नहीं लेकर आते और लोगों को कहते हैं कि वे स्वयं आकर गाड़ियों में कूड़ा डालें। सैक्टर 21 आरडब्ल्यूए के महासचिव प्रदीप चोपड़ा और उपाध्यक्ष ए एस भाटिया के अनुसार जब तक लोग ऊपर से उतरकर नीचे आते हैं, गाड़ी चली भी जाती है। आखिर कैसे कामकाजी लोग सब काम छोड़कर केवल कूड़ा देने के लिए घर पर बैठ सकते हैं। सैक्टर 33 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष जे एस सरपाल के अनुसार आरडब्ल्यूए के अधीन कार्यरत कूड़ा उठाने वाले ये लोग न केवल भरोसेमंद हैं बल्कि सुख-दुख में भी लोगों के काम आते हैं।
सैक्टर 20 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष डॉ ओ पी वर्मा ने कहा कि इस निर्णय का आधार नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों के निजी स्वार्थ और व्याप्त भ्रष्टाचार है। स्मार्ट सिटी के नाम पर चंडीगढ़ के लोगों पर अनावश्यक टैक्स थोपे जा रहे हैं। सैक्टर 46 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष केदारनाथ शर्मा के अनुसार नगर निगम को यह व्यवस्था शुरू करने से पहले सभी प्राइवेट गार्बेज कलेक्टर्स के रोजगार का प्रबंध करना चाहिए था।
फाॅस्वेक के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से चंडीगढ़ प्रशासन व नगर निगम के सम्मुख मांग रखी कि नए सिस्टम को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए और प्राइवेट गार्बेज कलेक्टर द्वारा घरों से कूड़ा एकत्रित करने की पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए।

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