जिले के अतिथि अध्यापकों ने हरियाणा सरकार के प्रति आक्रोश मार्च निकाला |
September 16th, 2019 | Post by :- | 79 Views

मुकेश वशिष्ट :- जिले भर के अतिथि अध्यापकों ने उद्योग मंत्री विपुल गोयल के कार्यालय सै०-16  फरीदाबाद पर एकत्रित होकर मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विदित हो कि 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा सरकार के द्वारा अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का वादा अपने घोषणा-पत्र में किया, लेकिन आज भाजपा सरकार का कार्यकाल पूर्ण होने को है। परन्तु सरकार ने अपने घोषणा-पत्र का वादा पूरा नहीं किया। अपने वादे को पूरा नहीं करने के कारण राजकुमार कालीरमण अतिथि अध्यापक जिसकी उम्र 55 वर्ष की है, 01 सितम्बर, रविवार से आमरण-अनशन पर बैठा हुआ। आज उसे अनशन पर बैठे हुए सोलह दिन हो गए हैं।

सरकार अपनी हठधर्मिता पर तुली हुई है सरकार अतिथि अध्यापकों की मांगों को मानने को तैयार नहीं है। इस दौरान 9 सितम्बर को PSCM राजेश खुल्लर जी व मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार ने अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधि मण्डल के साथ मुलाकात की जिसमें मांग रखी कि जब तक अतिथि अध्यापकों को नियमित नहीं किया जाता है, तब-तक समान काम-समान वेतन दिया जाए। जिसमें मुख्यमंत्री व राजेश खुल्लर जी ने सहमति जताई परन्तु अभी तक किसी प्रकार का इस बारे कोई पत्र जारी नहीं हुआ। अब किसी भी समय आचार-संहिता लग सकती है और प्रदेश का अतिथि अध्यापक सरकारों की गलत नीतियों के कारण अपने आपको फिर से ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार की इन गलत नीतियों के कारण आज जिले के अतिथि अध्यापकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया तथा सरकार के 75 पार सपने को तोडने का निर्णय लिया। सरकार को समय रहते जागना पडेगा अन्यथा चुनाव में बहुत बडी हानि को सहन करना होगा।

फरवरी, 2014 में अतिथि अध्यापकों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जंतर-मंतर पर आमरण-अनशन किया था जोकि 17 दिन तक चला। इस अनशन पर वर्तमान शिक्षामंत्री रामविलास शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज पूर्व न्यायाधीश, तथा भाजपा के पदाधिकारियों के साथ पहुंच कर अतिथि अध्यापकों को अपना लिखित में समर्थन दिया तथा नियमित करने की मांग को 2014 के घोषणा-पत्र में सामिल किया। भाजपा सरकार ने अपने शासन काल दौरान लगभग 5000 अतिथि अध्यापकों को दो साल तक नौकरी से बाहर कर दिया। जिसके बाद अतिथि अध्यापकों के विरोध के बाद दोबारा नौकरी पर लिया गया।

फरवरी, 2019 विधानसभा बजट सत्र के दौरान हरियाणा सरकार अतिथि अध्यापकों को 58 साल तक नियमित करने का बिल लेकर आई, जिसे माननीय राज्यपाल ने 12 मार्च को मंजूरी दे चुके हैं। लेकिन उस बिल के अनुसार अभी तक भी अतिथि अध्यापकों कोई भी नियमित अध्यापकों के समान सुविधा नहीं मिली है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी प्रदेश में घूम-घूम 2019 ढोल पीट रहे हैं कि हमने सभी अतिथि अध्यापकों को नियमित कर दिया है। इसके विपरीत अध्यापकों के स्थानांतरण के नाम पर विभाग ने प्रदेश भर के स्कूलों से लगभग 2000 पोस्टों को समाप्त कर दिया है। जिससे अतिथि अध्यापकों को सरप्लस कर दिया गया है। जोकि सरकार की वादा खिलाफी का बहुत बडा उदाहरण है। 2005 में लगे अतिथि अध्यापक आज 14 वर्ष बाद भी अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इतने समय के बाद भी इन अतिथि अध्यापकों को बहुत कम मानदेय पर काम करना पडा रहा हैं। इन्हें आज सरकार जे.बी.टी. को 26000/-, मास्टर को 30000/– और प्रवक्ताओं को 36000/-रूपये का मानदेय देकर शोषण कर रही है। बिल आने और मानदेय कम होने के बावजूद इनकी नौकरी आज भी सुरक्षित नहीं है।

55 वर्ष का एक अतिथि अध्यापक पिछले 16 दिन से अनशन पर बैठा हुआ है, लेकिन हरियाणा सरकार के द्वारा कर्मचारियों के प्रति इस प्रकार की असंवेदनशीलता उचित नहीं है। जबकि सरकार ने अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का वादा अपने घोषणा-पत्र में सामिल किया हुआ है। आज अतिथि अध्यापक चाहते हैं कि नियमित होने तक उन्हें समान काम-समान वेतन दिया जाए और पिछले 16 दिन से अनशन पर बैठे अतिथि अध्यापक को ससम्मान अनशन से उठाया जाए।

आज इस विरोध प्रदर्शन में जिला प्रधान रघुनाथ शास्त्री, ललित शर्मा, भागीरथ, सुन्दर भडाना, वीरेंद्र कुमार, गोपाल शास्त्री, विजय पाल नरवाल, जोगीन्दर सिंह हुड्डा, प्रहलाद सिंह, जितेंद्र सिंह, जवाहर लाल, उमेश कुमार, ऋतुराज, अजय भारद्वाज, विनोद भाटी, मनीषा गुर्जर, सरला राजपूत, संतोष तेवतिया, पूनम भाद्वाज, सविता मिगलानी, मुनेश चौहान, सुनीता, मोनिका सिंह, विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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