विधानसभा चुनाव का डंका बजते ही बरसाती नेता आए मांदों से बाहर
September 15th, 2019 | Post by :- | 82 Views

मेवात (सद्दाम हुसैन) विधानसभा चुनाव आते की कई बरसाती नेता अपनी मांद से बाहर आ चुके हैं। पूरे पांच साल जनता से कोई सरोकार नहीं रखने वाले कई नेता पैसे की चमक के सहारे टिकट व चुनाव की जंग जीतने की मकसद क्षेत्र में सक्रिय हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या भाजपा व कांग्रेस पार्टी में है। हालांकि ऐसे नेताओं को टिकट की कोई गारंटी नहीं। लेकिन तरह-तरह की हथकंड़े अपनाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। ऐसे नेता कहीं हेलमेट का वितरण कर रहें हैं, तो कहीं पर महिलाओं को सिलाई मशीनें बांटकर चुनाव वैतरणी पार लगाने की सोच रखते हैं।

ऐसे नेताओं में डागर पाल का एक युवा नेता भी विधायक बनने का सपना सजाने लगा है। बताया गया हैै कि इस नेता के पास अकूत संपत्ति है। यह संपत्ति कैसे अर्जित की यह अलग विषय हैै। यह नेता उस संपत्ति का दिखावा दिखाकर अपने आप को मजबूत उम्मीदवार के तौर पर लोगों के समक्ष पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। देशोरी कथा करके चर्चा में आए इस नेता को अपनी जमीनी हकीकत का ज्यादा ज्ञान नहीं। पैसे के बल पर राजनीति में उतरे इस युवा नेता का ख्वाब भाजपा की टिकट पर है।

बताते हैं कि एक पलवल के छुटभैय्या नेता ने युवा नेता की मुलाकात जैसे तैसे करके मुख्यमंत्री मनोहर लाल से करा दी। बस फिर क्या था, नेता जी ने विधायक बनने के सपने देखने शुरू कर दिए। दो एंबूलैंस कारों को स्वास्थ्य विभाग के लिए भेंट इसलिए कर दिया, ताकि उनकी छवि लोगों में सेवा भाव की जाए। फिर लोगों को लुभाने के लिए दो हजार हैलमेट बांटने की घोषणा की। लेकिन मात्र चंद हैलमेटों का वितरण कराकर झूठी वाहवाही लूटने की कोशिश की। इतना नहीं पिछले दिनों सैंकडों महिलाओं को यह कहकर बुलाया गया कि उन सभी को सिलाई मशीनें वितरित की जाएंगी। लेकिन वहां पर भी मात्र तीन सेंटरों के लिए मशीनें देकर महिलाओं को वहां पर प्रशिक्षण का लोलीपोप देकर टरका दिया गया। जमीन खिसकती दिखी तो फिर से सैकड़ों खाली गाडिय़ों का काफिला निकालकर लोगों में अपनी उपस्थिति की चर्चा कराने का खेल शुरू कर दिया गया ।

इस युवा नेता के अलावा भाजपा में कई अन्य नेता है जो पांच साल कहीं नजर नहीं आए। लेकिन भाजपा के माहौल को भुनाने के लिए टिकट मांग कर क्षेत्र में अपनी चर्चा को कायम रखना चाहते है। एक महिला नेत्री जो गांव की सरपंच है, उसका आवास पलवल में है। वह भी अपने को टिकट की दौड़ में सबसे आगे बताती है। रावत पाल में एक प्रापर्टी डीलर भी किसी से अपने को कम नहीं आंक रहा है। कांग्रेस पार्टी में भी ऐसे कई नेता हैंं जो पांच साल क्षेत्र में नजर नहीं आए। लेकिन अब चुनाव आने के बाद सुखदुख में साथ रहने का दम भर रहे हैं। क्षेत्र के राजनैतिक जानकार कहते हैं कि कुछ नेताओं तो केवल चुनावों के समय अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आते हैं। ऐेसे नेता चुनाव भी लड़े तो वे एक दूसरे को हरवाने में अहम निभा सकते हैं। लोग मानते हैं कि पैसे के दम पर कभी चेती लाल वर्मा, नबाव मंसूर खां पटौदी ने भी फरीदाबाद लोकसभा से चुनाव लड़े। जिनका हश्र सभी को पता है

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