सर्व समाज कल्याण सेवा समिति ने कोरोना व टीबी बीमारी के प्रति लोगों को किया जागरूक
November 29th, 2020 | Post by :- | 169 Views

कुरुक्षेत्र, ( सुरेशपाल सिंहमार )    ।      महात्मा ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर सर्व समाज कल्याण सेवा समिति ने शनिवार को कोरोना व टीबी बीमारी के प्रति जागरूकता अभियान का शुभारंभ लोकनायक जयप्रकाश नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक से किया।

इस अवसर पर मुख्य तौर पर मौजूद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डा. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने अभियान की शुरूआत करते हुए नागरिकों को कोरोना बचाव की सीख दी एवं उन्हें कोरोना बचाव के लिए घर से बाहर निकलते समय मास्क पहननें, बार बार साबुन से हाथ धोने एवं सामाजिक दूरी की पालना करने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने लोगों को मास्क पहनने की सीख दी। वहीं यह संदेश दिया कि वे कोरोना बचाव के प्रति जागरूक रहे ताकि वे स्वयं एवं अपने परिवार को कोरोना से बचा सके। इस दौरान अस्पताल परिसर में मरीजों व उनके साथ आए तीमारदारों को मास्क भी वितरित किए।

अभियान के शुभारंभ अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डा. शैलेंद्र ममगाईं शैली, सर्व समाज कल्याण सेवा समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर सैनी, एमडी मेडिकल डा. कृष्ण कुमार, ब्लड बैंक के मुख्य तकनीकी अधिकारी नरेश सैनी व कर्मवीर सिंह सैनी, डा. प्रतिभा, डा. तन्वी, डा. गुरविंद्र कौर, कर्ण, बलवान, हरदयाल, राजेश, फार्मासिस्ट भारत गोयल, कन्नूप्रिय ने ज्योतिबा फुल व सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर सैनी ने बताया कि उन्होंने ज्योतिबा  फुले व सावित्रीबाई फुले द्वारा दी गई शिक्षाओं पर चलते हुए ही समाजसेवा का कार्य शुरू किया है। रामेश्वर सैनी ने कहा कि महात्मा फुले ने समाज में निरक्षरता को कम कर साक्षरता बढ़ाई।

उन्होंने अंधविश्वास का उन्मूलन किया और बालविवाह पर रोक लगाने की पहल की। रामेश्वर सैनी ने बताया कि पूरे हरियाणा में कोई भी संस्था टीबी की बीमारी के प्रति जागरूक नही कर रही है सिर्फ उनकी समिति द्वारा ही लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया जा रहा है। समाजसेविका कन्नूप्रिय ने कहा कि सावित्रीबाई ने महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। तकरीबन डेढ़ सौ साल पहले सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को पुरुषों के ही सामान अधिकार दिलाने की बात की थी। सावित्रीबाई ने न सिर्फ महिला अधिकार पर काम किया बल्कि उन्होंने कन्या शिशु हत्या को रोकने के लिए प्रभावी पहल भी की। उन्होंने न सिर्फ अभियान चलाया बल्कि नवजात कन्या शिशु के लिए आश्रम तक खोले, जिससे उनकी रक्षा की जा सके। कन्नूप्रिय ने बताया कि जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर, विष्ठा तक फेंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुंच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं।

 

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