कार्तिक मास में आंवला के नीचे भोजन पकाने व खाने का विशेष महत्व
November 23rd, 2020 | Post by :- | 180 Views

गोरखपुर (एके जायसवाल), भगवान सहस्त्रार्जुन के जन्म कार्तिक मास सप्तमी को हुआ था जन्म उत्सव पर कार्तिक सुदी नवमी को ही आवंला बृक्ष के नीचे परिवार, समाज बन्धुओं के साथ सहभोज का आयोजन किया था

ऐसी मान्यता है कि आंवला के वृक्ष पर भगवान विष्णु का वास होता है भगवान सहस्त्रार्जुन , भगवान विष्णु के अंशावतार है इसका इसका खुलासा आनन्द पुराण के दसवां (गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित है) अध्याय में बिस्तार से वर्णन किया गया है।

सभी स्वजाति बंधुओं से निवेदन है कि 23 नवम्बर (आंवला नवमी) को आवलां बृक्ष के निचे परिवार के साथ सामूहिक सहभोज करे। इसी माह में पड़ने वाली अक्षय नवमी (आंवला नवमी) का बहुत महत्व है। इस दिन आंवले की पूजा करने वाले परिवार में खुशहाली, पुत्र रत्न प्राप्ति, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

माना जाता है कि आंवला नवमी के दिन जो लोग आंवले का सेवन करते हैं या अपने मित्रों को आंवले का सेवन करवाते हैं उनपर कभी दुखों का साया नहीं पड़ता। भगवान सहस्त्रार्जुन की जयंती के बाद कार्तिक मास मे ही कभी आवला बृक्ष के निचे सहभोज परिवार के साथ सामूहिक रूप से करना चाहिए। उक्त ब्यान अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा की इकाई उत्तर प्रदेश अध्यक्ष ध्रुवचंद जायसवाल ने दी।

उन्होंने कहा कि भगवान सहस्त्रार्जुन की जयंती को भव्य रूप से मनाने के लिए सभी सामाजिक संगठनों एवं व्यक्तिगत रूप से अपने घरों में कार्यक्रम आयोजित किया गया इससे साफ संकेत दिखाई दे रहा है कि आने वाले समय मे समाज को हर क्षेत्र में लाभ मिलेगा।

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