मन की अशांति का कारण है अज्ञानता : डॉ रमनीक कृष्ण जी महाराज
November 21st, 2020 | Post by :- | 73 Views

चंडीगढ़ (मनोज शर्मा) जगत सद्भावना संस्थान के सानिध्य में कार्तिक मास के पावन अवसर पर शिव ठाकुर द्वारा मन्दिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में सद्भावना दूत भागवताचार्य डॉ रमनीक कृष्ण जी महाराज ने  नवधा भक्ति को ही जीवन परमात्मा को प्राप्त कराने में सामर्थ्यवान बताते हुए कहा के देवहूति कर्दम से स्वयं कपिल भगवान का प्राकट्य हुआ। कपिल भगवान बिंदु सरोवर पर कुटिया बनाकर उसमें हरिनाम भजन करते है। देवहूति का मन बड़ा खिन्न रहने लगा। उन्होंने कपिल भगवान से पूछा हे पुत्र इस जगत में जीव की अशांति का क्या कारण है? क्यों ये मन बार बार प्रयत्न करने पर भी भगवान के चरणों में नहीं लगता? कपिल भगवान उत्तर देते है हे मां!  मन की अशांति का कारण है अज्ञानता। जैसे रात्रि के समय हम लटकी हुई रस्सी में सर्प का आभास कर लेते हैं, परंतु वो केवल हमारे नेत्रों का भ्रम है वैसे ही मानव इस झूठे जगत को ही सत्य मानकर बैठा है परन्तु ये जगत झूठ है केवल परमात्मा ही सत्य है। मां के द्वारा परमात्मा को प्राप्त कराने का उपाय पूछने पर कपिल भगवान कहते हैं नवधा भक्ति ही मानव को परमात्मा तक के जा सकती है। उसी नवधा भक्ति का वर्णन भागवत में किया गया। प्रथम भक्ति है श्रवनम अर्थात जितना हो सके हमें भगवान का नाम उनकी कथाओं को सुनना चाहिए, दूसरी भक्ति है किर्तनम हरिनाम संकीर्तन करना उनके नाम का मार्जन करना उन्हीं के गीत गाना परमात्मा को अत्य धिक प्रिय है। तृतीय भक्ति है विष्णु स्मरणम  अर्थात  भगवान को कभी मत भूलो, चोथी भक्ति है पाद सेवनम परमात्मा के चरणों की सेवा,पंचम भक्ति है अर्चनम अर्थात उन्हें ही अपना सर्वस्व मान कर उनका अर्चन करें, वंदनम अर्थात वंदना करें तो हरिनाम की, सप्तमी भक्ति है दास्यम अर्थात आज तक तो हम दुनिया के दास बने रहे क्यों ना अब दास बन जाए हरी चरणों के, अष्टम भक्ति है सख्यम अर्थात दुनिया से तो बड़े सम्बन्ध बनाए क्या हमने अपने ठाकुर से कोई रिश्ता जोड़ा, सबसे बड़ा रिश्ता तो वो ही निभाते है। नवमी भक्ति है आत्म निवेदन अर्थात आत्मा का निवेदन केवल परमात्मा को ही करना चाहिए दुनिया हमारे भाव नहीं समझेगी परंतु वो परमात्मा जरूर समझेंगे। आज  कथा में बड़ी धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्ममहोत्सव बड़े हर्ष के साथ मनाया। कथा का    आयोजन 25 नवम्बर तक रहेगा। जिसका समय प्रतिदिन सांय 4 से 7 है।

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