भगवान कार्तवीर्यार्जुन के जयंती पर उनके जीवन के वृतांत का संक्षिप्त वर्णन
November 20th, 2020 | Post by :- | 154 Views

गोरखपुर (एके जायसवाल), भगवान कार्तवीर्यार्जुन को कोई युद्ध में नहीं हरा सकता था पुराणों धार्मिक ग्रंथों में कार्तर्ववीर्यर्जुन भगवान विण्णु के अंश चक्रा अवतार थे भगवान कार्तवीर्यीर्जुन के जयंती के शुभ अवसर पर सभी लोगों को बहुत बहुत बधाई। पुराणों एवं धार्मिक ग्रंथों के आधार पर अवगत करा रहा हूं।किसी भी धार्मिक ग्रंथों श्लोक ,चौपाई ,छंद,आदि मे मृत्यु के सम्बन्ध में प्रमाण के रूप में कहीं भी नहीं वर्णन मिलता है। कुछ तथाकथित लेखकों द्वारा भ्रांतियां फैलाई गई कि परशुराम ने भगवान सहस्त्रार्जुन का वध किया था, जो निराधार व भ्रामक कहानियां गढी गई हैं।

महाराजा यदुवंश का विस्तार से वर्णन श्री हरिवंश पुराण महाभारत खिलभाग के तैंतीसवें अध्याय मे भी महाराजा यदुवंश का वर्णन किया गया है महाराजा यदु के पांच देवोपम पुत्र-रत्न पैदा हुए। 1.सहस्त्रजीत 2.क्रोष्टु 3.ययोद 4.नील 5.अंजिक हुए।

महाराजा सहस्रजीत से हैहयवंश की शुरुआत हुई एवं महाराजा क्रोष्टु से यदुवंश की शुरुआत हुई।

महाराजा सहस्त्रजीत से ही सोमवंशी, चंद्रवंशी आदि चौदह शाखाओं में विभक्त हो गया। एवं महाराजा क्रोष्टु के वंश में भगवान श्रीकृष्ण एवं बड़े भाई वलदाऊ अवतरित हुए।

अखिल भारतीय सर्ववर्गीय महासभा की इकाई उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ध्रुवचंद जायसवाल ने कही।

स्वयं परशुराम जी ने माता सीता के स्वयंवर के समय में भगवान राम के द्वारा टूटी हुई धनुष के प्रसंग में परशुराम ,ने लक्ष्मण जी से संवाद करते हुए कहा सहस्त्रबाहु भुज छेदन हारा परसु बिलोकु महीप कुमारा इसका वर्णन तुलसीकृत रामायण के बालकांड के 244 / 245 पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण परशुराम संवाद मे पढा, देखा जा सकता है परशुराम जी ने सिर्फ भुजाओं का छेदन करने की बात कही है।

शेषाअवतार लक्ष्मण जी से,यह नहीं कहा कि मैने सहस्रवाहु का वध किया है।

कबीर दास के बीजक आठवें शब्द की 11 वीं पंक्ति में वर्णित है परशुराम छत्रिय नहीं मारे छल माया किन्हीं। अर्थात परशुराम छल छद्म मायाजाल मायावी उपाय करने के बाद भी पराजित नहीं कर सके वर्तमान में इसका साक्ष्य महेश्वर स्थित सहस्त्रबाहु की समाधि पर मंदिर है। इससे स्पष्ट है सहस्त्रवाहु के पुत्र जयध्वज के राज्याभिषेक के बाद तपस्या योग के बाद समाधि ली थी इसलिए यह समाधि स्थल मंदिर कहलाता है आज भी सभी समाज के लोग मन्नत मानते हैं मन्नत पूर्ण होने पर देसी घी का चिराग जलाने हेतु देसी घी दान करते हैं जो निरंतर चिराग जलता रहता है सहस्त्रबाहु के संघार की मान्यता का खंडन करते हुए *महाकवि कालिदास जी द्वारा लिखित रघुवंश महाकाव्य का इंदुमती स्वयंवर प्रसंग है इनके पद 6/42 जिसका भावार्थ है कि सहस्त्रवाहु ने परशुराम के फरसे की तीखी धार को भी अग्निदेव की सहायता से कमल पत्र के कोमल धार से भी कम था क्योंकि इनकी राजधानी महेश्वर की रक्षा स्वयं अग्निदेव खुद करते थे इसलिए महेश्वर में सहस्त्रवाहु को हराना असंभव था। कुछ पुराणों में अलग-अलग मत हैं।

देवीभागवत पुराण मे उल्लेख है कि सहस्त्रावाहु और परसुराम मे ही नहीं किसी ग्रंथों में सहस्त्रार्जुन के पुत्रों एव भृगुवंशियों द्वारा धन की खींचातानी के कारण युध्द हुआ था जगदग्नि ऋषि का वध सहस्रवाहु के पुत्रों व्दारा हुआ था

बह्म वैवर्त पुराण के अनुसार युद्ध में सहस्त्रार्जुन ने अनेकों बार परशुराम को मूर्छित किया था सहस्त्रार्जुन के हाथ में सुरक्षा कवच था जिसके कारण सहस्त्रार्जुन को हराना असंभव था देवताओ द्वारा ब्राह्मण का रूप धारण करके सुरक्षा कवच दान में मांग लिया था।

वायु पुराण का अप्रकाशित खंड महिष्मति महात्म के अध्याय नंबर 13 में वर्णित है जब सहस्त्रार्जुन के चार भुजा से थे तो अपने गुरु दत्तात्रेय का स्मरण किया तो भगवान दत्तात्रेय ने सहस्त्रबाहु को स्मरण कराते हुए कहा अंश चक्रा अवतार का स्मरण करो इतना कहते ही भगवान शंकर तुरंत प्रकट हो गए सहस्त्रबाहु को दर्शन देते हुए बोले जाओ नर्मदा नदी में स्नान करके आओ जब सहस्त्रबाहु नर्मदा नदी से स्नान करके भगवान शंकर के सम्मुख आए तो भगवान शंकर ने उन्हें अपने मैं समाहित कर लिया*उसी स्थान पर आज राज राजेश्वर भगवान सहस्त्रार्जुन का मंदिर का निर्माण हुआ है।

पुराणों के अनुसार सात 7 चक्रवर्ती सम्राटों में गणना की जाती है1. 1.भगीरथ 2.मांधाता 3नहुष 4.सगर 5.कार्तवीर्यार्जुन 6.भरत एवं 7.युधिष्ठिर नाम बताए गए हैं। युद्ध में अगर पराजित हुए होते हैं या उनका वध किया गया होता तो चक्रवर्ती सम्राटों में भगवान कार्तवीर्यर्जुन की गणना नहीं की जाती इससे भी प्रमाणित होता है कि उनका वध नहीं हुआ था। शास्त्रों के अनुसार जिस महापुरुष में 6 गुणों का समावेश हो संपूर्ण ऐश्वर्य, धर्म ,यश,श्री, ज्ञान, एवं वैराग्य से परिपूर्ण थे ग्रंथों में भगवान विष्णु के अंश चक्रा अवतार कार्तवीर्यार्जुन को बताया गया है इसीलिए भगवान के रूप में संबोधित किया जाता है|
ध्रुवचंद जायसवाल ने सभी स्वजातिय महानुभावों से अनुरोध किया है कि भगवान सहस्त्रार्जुन के जन्मोत्सव पर कम से कम 11देसी घी का दीप अपने अपने घरों मे जलाये अवश्य जलाएं सम्भव हो तो भगवान शिवजी के मंदिर में भी दीप दान करें,घर में महालक्ष्मी जी का आशीर्वाद रहेगा, क्यों कि भगवान सहस्त्रार्जुन धन के भी देवता है।

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