धनतेरस विशेष : धनतेरस क्या है स्वास्थ्य के देव धनवंतरी जी को नमन
November 12th, 2020 | Post by :- | 273 Views

मथुरा,(राजकुमार गुप्ता) धनतेरस धन खर्चने का दिन नहीं है!धन क्या है? जो वस्तु या प्रक्रिया जीवन में सुख दे वह धन है । हमने केवल द्रव्य या मुद्रा को धन मान लिया है।बहुत धन ,धान्य व मुद्रा के रहते हुए भी लोग अशान्त हैं, रोगी हैं।इससे सिद्ध है कि केवल द्रव्य से संपूर्ण सुख नहीं हो सकता!संपूर्ण सुख के लिए महाराज धन्वन्तरी के आयुर्वेद (आयुर्विज्ञान) के नियमों का पालन करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्यप्रद औषध देने वाले वैद्यों को कहा था – औषध तो रोग के उपचार के लिए है।रोग ही न हो वह दिनचर्या वैद्य नहीं बतलाएगा तो कौन बतलाएगा? तब वैद्यों से निराश होते हुए उन्होंने कहा था कि -आयुर्वेद के होते हुए भी यदि कोई रुग्ण होता है तो इसमें वैद्यों की भूमिका भी है। उन्होंने स्वास्थ्य चेतावनी के रूप में एक संक्षिप्त उद्घोष किया था कि- ऋतभुक हितभुक् मितभुक् ।अर्थात् -ऋतु अनुसार दिनचर्या भोजन छादनकरें,स्वास्थ्य के लिए खाएं स्वाद के लिए नहीं!संतुलित भोजन जिसमें फल, शाक, अन्नों में जौ,ज्वार,बाजरा,गेहूं,दालों मे मूंग चना आदि।उचित व्यायाम ,योग के आठों अंगों का पालन समझ के साथ करेंगे तो निरोग रह सकते हैं। यह महाराज श्री धनवन्तरी जी का संपूर्ण आयु सुखी रखने काअमृत कलश है।जो शारीरिक,मानसिक, बौद्धिक आत्मिक स्वास्थ्य देने वाला है। यही संसार का सबसे बड़ा धन हैःजो इसका पान करेगा वह जीवन में आनन्द प्राप्त कर अमर हो जाएगा।इसलिए धनत्रयोदशी का यह दिन आयुर्विज्ञान के आविष्कारक श्री धनवन्तरी जी महाराज को स्मरण कर उनके आयुर्विज्ञानुसार जीवनचर्या चलाने के संकल्प लेने का दिन है,न कि बिना आवश्यकता के अंधविश्वास में फंसे रहकर कुछ का कुछ खरीदना।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।