कड़ी मेहनत और कुछ करने की ज़िद से पाया ये मुकाम
November 5th, 2020 | Post by :- | 230 Views

जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का , फिर देखना फिजूल है कद आसमान का ये शब्द भूमि देव शास्त्री पर बिलकुल खरे उतरते हैं I
लोकहित एक्सप्रेस हमीरपुर:- 4 जनवरी 1957 को हमीरपुर जिले के कस्वे उहल के एक छोटे से गाँव मे जन्मे भूमि देव शास्त्री जी का जीवन कठिनायों भरा रहा I तब ये कोई नही जनता था कि पंडित दीनानाथ के घर मे जन्मे जो अपने परिवार का गुजारा पंडितचारी से ही करते थे एक दिन इस मुकाम पर पहुँच जाएंगे I भूमि देव शास्त्री अपने पिता के बड़े बेटे होने के कारण उनका बचपन पिता के पुश्तैनी काम में हाथ बांटने में ही निकाल गया I जिस उम्र में बच्चों मे हाथ में खिलौने होते हैं उस उम्र में भूमि देव शास्त्री के हाथ में धार्मिक ग्रंथ हुआ करते थे I महज़ 13 वर्ष की आयु में ही पढ़ाई के साथ साथ उन्होने अपने पिता के पंडिताई के काम में हाथ बांटना शुरू कर दिया ताकि परिवार का भरण पोषण हो सके I तब वह आठवी कक्षा में पढ़ते थे दिन को स्कूल जाना स्कूल से आते ही अपने पिता के कार्ये व घर के कार्ये में हाथ बांटना तथा रात को जब भी समय मिले मिटी के तेल के लेंप की रोशनी से पढ्ना येही भूमि देव शास्त्री की दिनचर्या थी I
धीरे धीरे समय निकलता गया और भूमि देव पढ़ाई के साथ-साथ शादी ब्याह , जन्मदिन ,पाठ और अन्य धार्मिक कर्मकाण्ड में निपुण होते गए I दसवी की परीक्षा उतीर्ण करने के साथ-साथ उन्होने अपने पिता जी के पुश्तेनी काम में जजमानों की खूब बदोतरी कर चरम सीमा तक पहुंचा दिया I दसवी की परीक्षा पास करने के बाद 1977 में होशियारपुर से शास्त्री का डिप्लोमा किया | सन 1982 राजकीय माध्यमिक पाठशाला पपरोल जिला कांगड़ा से अपनी सरकारी नौकरी की शुरुआत की I नौकरी मिलने के बाद भी उनकी आगे बढने जनून कम नहीं हुया I 32 साल सरकारी नौकरी करने के साथ-साथ उन्होने अपना पुश्तैनी काम नही छोड़ा I इसी दौरान उनकी शादी श्रीमती विमला शर्मा से हो गयी आज उनके दो बेटे हैं बड़े बेटे का नाम पुरषोतम शर्मा जो M॰A॰ संस्कृत हैं तथा छोटे बेटे का नाम वशूदेव शर्मा है जो +2 पास हैं I आज भूमि देव शास्त्री जी के पास अपनी एक फ़र्निचर इंडस्ट्री (भारत उदय )जो वर्ष
2004 से कार्यरत है जिसका टर्न ओवर आज लगभग 2 करोड़ के आसपास हैं,इसके इलवा जागृति प्राइवेट आईटीआई जो 2008 से उहल में स्थित है जिसमे दूर दूर के गाँव के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं I आज उनके खड़े किए गए इंडस्ट्री और आईटीआई को उकने दोनों बेटे उनके ही मार्गदर्शन के साथ आगे बड़ा रहे हैं I मार्च 2015 मे अपने पद से सेवानिवृत होकर आज भी भूमि देव शास्त्री ने अपना पुश्तेनी काम नही छोड़ा है इसके इलवा वो अपने दोनों बेटों के काम में हाथ बँटाते हुये उनका होंसला बढ़ाने का काम करते हैं I

भूमि देव शास्त्री के अन्य शौक

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गौ रक्षा
गौ के प्रति उनके दिल मे शुरू से ही एक पुजनिए स्थान था इसी बजह से उन्होने वर्ष 2007 से 2009 तक गौ रक्षा पे प्रति लोगों को जागरूक किया तथा विभिन्न गौशाला में जा कर गौ रक्षा के लिए सहायता भी की, इसी कड़ी उन्होने गुप्त गौ भिक्षा योजना भी चलायी, जिस योजना के तहत घर-घर जा कर लोगों को गौ रक्षा के बारे मे जागरूक किया तथा लोगों को गुप्त धन,आनज, और घास दान देने के लिए भी प्रेरित किया जिसे वो बाद में विभिन्न गाओशालाओं में जाकर दे आया करते थे I 2009 में उन्होने गाओशाला समिति प्रणाली का गठन किया जो आज भी गौ रक्षा से जुड़े कई कार्यों को अंजाम दे रही है I
. आज तक 1,68,700/ रुपए विभिन्न गोशालाओं को दान द चुके हैं I
. विभिन्न गोशालाओं के लिए शास्त्री जी 69 पंखे, दानपत्र व धेनुमानस पुस्तकें दान कर चुके
हैं I
. गोशालाओं में जन जागरण के लिए 11 भागवत सप्ताह निशुल्क शास्त्री जी ने किए हैं I
. गोशालाओं के लिए 308 ट्राले घास के निशुल्क उपलब्ध करवा चूजे हैं I
. 1,97,714/ रुपए शास्त्री जी ने घर घर जा कर गोभिक्षा के रूप में इकठठा कर के क्षेत्र की
गोशालाओं को दिये हैं
इन समजा सेवा के उतक्रिस्ट कार्यों को देखते हुये शास्त्री जो को नारायण सेवा संस्थान उदयपुर (राजस्थान)ने सेवा श्री सम्मान व श्री विश्वनाथ संस्कृत महाविधालय चकमोह ने प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया है I
॰ कुदरत प्रेमी भी हैं भूमि देव शास्त्री
प्रकृति से विशेष स्नेह रखने बाले भूमि देव शास्त्री ने अपनी ही खाली पड़ी जमीन पर लगभग 1500 के करीव खैर के पौधे लगाए हैं जो आज बहुत बड़े हो चुके हैं I इसके इलवा ख़ुद के पैसों से आम के प्रति वर्ष 100 विभाग से खरीद कर चुने हुये किसी एक गाँव में लोगों को बांटने का कार्ये भी वर्ष 2011 से करते आ रहें हैं I

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