दक्षिणमुखी बालाजी मंदिर हाथोज धाम के स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज अन्न जल त्याग कर करते है नवरात्रों की साधना
October 23rd, 2020 | Post by :- | 94 Views

जयपूर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । जयपुर शहर के प्रसिद्ध दक्षिण मुखी बालाजी मंदिर हाथोज धाम में प्राचीन काल से लगातार अखंड ज्योत जल रही है। दक्षिण मुखी बालाजी मंदिर हाथोज धाम कालवाड रोड जयपुर आमेर रियासत काल से साधना स्थली रही है। यहां निरंतर भक्तों का आवागमन रहता है। और कार्य सिद्धि के लिए प्रमुख स्थान बन गया है।।हाथोज धाम के स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य ने बताया कि हाथोज धाम प्रमुख संतों की साधना स्थली रही है। जो आज भी रिकॉर्ड में मौजूद है। गंगा दास जी महाराज, हरिदास जी महाराज, लक्ष्मण दास जी महाराज, हरदेव दास जी महाराज, बालक दास जी महाराज, और गिरवर दास जी महाराज ने यहां पर साधना कर भक्तों के कार्य सिद्ध किए हैं। पिछले 30 वर्षों से लगातार स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज वर्ष के चारों नवरात्रों में मंदिर प्रांगण में नव दिवसीय यज्ञ, वाल्मीकि सुंदरकांड का पाठ एवं नव दुर्गा पाठ वैदिक विद्वानों के द्वारा स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज के सानिध्य में किए जाते हैं। स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज नवरात्रों में बिना अन्न जल ग्रहण किए सिर्फ नारियल का पानी पीकर नवरात्रि की साधना करते हैं। बालाजी महाराज की महिमा देखते हुए नेता एवं अभिनेता सभी वर्ग के लोग सभी जाति धर्म के लोग माथा टेकने एवं मन्नत का नारियल बांधने मंदिर में आते रहते हैं। स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज ने बताया कि साधना, भजन, तप के प्रभाव से आने वाले भक्तों के कार्य सिद्ध होते हैं। बालाजी महाराज सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज ने बताया कि नवरात्रि की साधना करने से भीतरी शक्तियों को जागृत करना, इंद्रियों पर नियंत्रण पाने का माध्यम है। मंत्र यज्ञ और तप आपकी वाणी में संयम और आंतरिक ज्ञान प्रदान करता है। स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज ने बताया कि वर्ष में चार ऋतु होती है और चार ही नवरात्रे होते हैं पशु, पक्षी, जीव जंतु और वनस्पति जल सभी का सम्मान करें आराधना करें प्रथम कर्म अपने इष्ट देवता का भजन अवश्य करें। मंत्र जप से सिद्धि की प्राप्ति होती है मन का संकल्प मजबूत होता है। अन्न त्यागने से आलस्य की वृत्ति से छुटकारा मिलता है। शरीर, मन, चित् स्वस्थ रहेगा तो जीवन में कोई भी सत्कर्म और संकल्प आप जल्द पूरा कर पाएंगे। निरंतर जप भजन से लोक और परलोक कि सभी शक्तियों का आत्मदर्शन चित् में ज्ञान उत्पन्न होता है मेरा अनुभव यह कहता है। स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज ने बताया कि सुंदर शरीर मनुष्य जीवन को भगवान प्राप्ति के लिए सत् कर्मों के लिए विधाता द्वारा प्रदान किया गया है। मनुष्य व्यर्थ के प्रपंचो में पड जाता है और सुंदर महंगा जीवन व्यर्थ गंवा देता है। इसलिए सेवा करें, सेवा का संकल्प ले, सत्य कर्मों का संकल्प लें, और संकल्प को पूरा करने के लिए साधना, आराधना, दान अवश्य करें सबका मंगल हो नवदुर्गा स्वरूपा समस्त जगत की शक्तियां सब को वरदान और आशीर्वाद दें और सभी को सत मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें सुख, संपत्ति, शांति और समृद्धि रहे ऐसी प्रार्थना करते हुए स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य जी महाराज ने सभी को नवरात्रि की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की।

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