सरकार का 72 घंटे के अंदर पेमेंट भुगतान का दावा खोखला :- वरूण चौधरी।
October 15th, 2020 | Post by :- | 110 Views

अंबाला , मुलाना ( गुरप्रीत सिंह मुल्तानी )

किसानों की फ़सल का भुगतान 72 घण्टों में आढ़तियों के खाते में डालने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सरकार ने धान की खरीद के बाद 72 घंटों में पैसे खातों में डालने का दावा किया था,प्रदेश में 27 सितंबर से धान की फसल की खरीद शुरू है और आज 15 अक्तूबर यानी 18 दिन हो चुके है और प्रदेश में 60 से 70 प्रतिशत धान की फ़सल खरीद होने के बाद भी आढ़तियों के खाते में एक पैसा भी नहीं आया है। यह बात हल्का मुलाना से कांग्रेस विधायक वरुण चौधरी ने कही।

विधायक आज साहा मंडी में किसानों और आढ़तियों के बीच फ़सल खरीद का जायज़ा लेने पहुंचे थे।विधायक ने कहा कि गेहूं के समय सरकार ने आढ़तियाें का ब्याज इसलिए काट लिया था,क्याेंकि सरकार का कहना था कि आढ़तियाें ने 72 घंटे में किसान की फ़सल का भुगतान नहीं किया और अब सरकार ने 18 दिन से किसानाें की फसल का भुगतान हीं कर पाई है तो सरकार ये स्पष्ट करे कि किसानों के भुगतान देरी पर कितना ब्याज़ और कब देगी। पिछली बार किसानों की फ़सल का भुगतान तीन दिन लेट होने पर सरकार द्वारा आढतियों पर ब्याज़ लगा दिया गया था परंतु आज तक भी वह ब्याज राशि किसानों के खाते में नही पहुँची है।यदि किसान अपनी आवाज़ उठाने का काम करता है तो भाजपा सरकार उन पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर उन्हें दबाने का काम करती है।सरकार कहती है कि किसानों को फ़सल खरीद में कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी और आज कभी पाेर्टल नहीं चलता ताे कभी जितने क्विंटल का गेट पास कटता है,उतने क्विंटल का मैसेज नहीं आता है।

किसानों के लिए मंडियो में बनाए शेड्ड आज किसानों के ही काम नही आ रहे है किसान अपनी जान जोख़िम में डालकर सड़कों पर अपनी फसल सूखा रहे है क्योंकि शेड्डो में पिछले समय की गेंहू भरी पड़ी है जो अभी तक सरकार द्वारा नही उठाई गई है।फ़सल की खरीद शुरू होने के बाद मंडियों में फ़सल उठान भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है। सरकार कहती है कि किसान की फसल का भुगतान सही समय पर होगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। किसानों को अगली फसल की बिजाई करनी है जिसके लिए बीज,खाद और डीज़ल की जरूरत है। लेकिन किसान खेती के लिए इन चीजों का प्रबंध बिना पैसों के कैसे करें।विधायक ने सरकार से जल्द से जल्द किसानों की फसल की पेमेंट करने का आग्रह किया ताकि किसान अपनी अगली फ़सल की बुआई समय से बिना किसी परेशानी के कर सके।

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