( न्यूज़ में विडियो भी देखे ) बरसते पानी में अंतिम संस्कार, बार-बार बुझी चिता
September 13th, 2019 | Post by :- | 103 Views

बारां,    ।         आजादी के 72 साल बीत जाने के बाद भी गांवों में अंतिम संस्कार के लिए हम माकूल बंदोबस्त नहीं कर पाए हैं। जबकि एक तरफ तकनीकि क्षेत्र में हम मिशन मंगल और चांद जैसे अभियान से दुनिया को अपना लोहा मनवा रहे हैं। तो दूसरी तरफ हमारे श्मशान घाट सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। जहां न तो ठीक से पहुंचने के रास्ते हैं और न पर्याप्त छाया-पानी की सुविधा। ऐसे गांव यदि मौजूदा सरकार में किसी जनप्रतिनिधि के हो, तो मामला चर्चा में आना स्वाभाविक ही है।

ऐसा ही एक वाकया शुक्रवार को बारां जिले की किशनगंज तहसील के फल्दी रामपुरिया गांव में देखने को मिला। जहां बारिश के दौरान बमुश्किल एक वृद्ध का अंतिम संस्कार हो पाया। बार-बार चिता बुझी। कभी प्लास्टिक के तिरपाल से परिजन जलती चिता को ढंकने का प्रयास करते तो कभी केरोसिन व डीजल से भरी पीपीयां उड़ेल कर चिता को प्रज्ज्वलित करते। आखिर लम्बे इंतजार के बाद बारिश हल्की हुई तो कंडे व अतिरिक्त लकड़ियां लगाकर चिता को फिर चेताया गया। चिता के आसपास भी पानी जमा हो गया। चिता पूरी भी नहीं जल पाई थी और समय अधिक होने पर पानी में भीग चुके लोग परेशान होकर बचाव के लिए पेड़ांे के नीचे चले गए।

दोनों गांवों के बीच है श्मशान घाट-
फल्दी रामपुरिया निवासी जमनालाल व केशरीलाल ने बताया कि उनके पिता श्योजीराम बैरवा 70 वर्ष को बीमार होने पर तीन दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। शव को सुबह गांव ले जाया गया। दोपहर लगभग 12 बजे उनके अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी कर ली गई। जैसे ही शवयात्रा श्मशान घाट पहुंची। अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। फल्दी और रामपुरिया के बीच एनएच 27 से लगभग एक किमी दूर स्थित श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता भी संकरा व कच्चा है। बारिश में बमुश्किल शव लेकर पहुंच पाते हैं। टापूनुमा चट्टान पर बने श्मशान घाट पर ही अंतिम संस्कार किया जाता है। शाम चार बजे जाकर अंतिम संस्कार की क्रिया पूरी हो सकी।

विधायक के घर से स्पष्ट नजर आ जाता है श्मशान-
गांव के जिस रास्ते से श्मशान जाते हैं। उसी पर विधायक निर्मला सहरिया का पैतृक घर भी पड़ता है। जहां से श्मशान घाट स्पष्ट नजर आता है। वे दूसरी बार विधायक है। इससे पहले उनके पिता स्वर्गीय हीरालाल सहरिया भी दो बार विधायक रह चुके हैं। पूरे 16 साल में सत्ता में रहने के बाद भी एक मामूली श्मशान घाट की सुविधा नहीं कर पाना इन जनप्रतिनिधियों के लिए क्या साबित करता है। विचारणीय प्रश्न है।

आरक्षित श्रेणी से फिर भी अपने वर्ग का भला नहीं-
शवयात्रा में शामिल हुए बारां निवासी बुद्धिप्रकाश बैरवा ने बताया कि यह बड़ी विडम्बना है कि एसएसी एसटी वर्ग के विधायक भी अपने वर्ग का तो क्या अपने गांव का भी भला नहीं कर पा रहे हैं। जबकि किशनगंज विधानसभा में विधायक भी कांग्रेस के ही है और सरकार भी। उन्हे चाहिए कि ऐसी पार्टियों की गुलामी से मोह छोड़कर जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। जबकि इस गांव में दलित वर्ग अधिक निवास करता है।

 

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