अनुज पाण्डेय’अनुपम’ की रचना डूबी जातीं फ़सलें
September 19th, 2020 | Post by :- | 176 Views

मथुरा,(राजकुमार गुप्ता)

डूबी जातीं फ़सलें

अन्न- घड़ा पड़ता खाली
ना रहता नमक- पिसान।

किसी समय होती अतिवर्षा
डूबी जातीं फ़सलें
सरकारी नलकूपों की भी
होती रोज़ अटकलें

किसी- ना- किसी कारण होता
खेतिहर का नुक़सान।

किसी समय ओले पड़ जाते
और कभी को सूखा
‘हम तो क्या,बचवा भी हमरा
सोता रहकर भूखा’

कृषक एक कर पाए कैसे
ईश्वर का गुणगान?
अन्न- घड़ा पड़ता खाली……

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