फायनेंस कंपनियों द्वारा ग्राहकों से छुपाई जाती है अहम जानकारियां, शोरूम संचालक इनके आड़ में करते हैं काले धन की अवैध कमाई
September 13th, 2019 | Post by :- | 138 Views
  • फायनेंस कंपनियों द्वारा ग्राहकों से छुपाई जाती है अहम जानकारियां
  • शोरूम संचालक इनके आड़ में करते हैं काले धन की अवैध कमाई

“छत्तीसगढ़ में ऑटो मोबाईल सेक्टर बना अपने ही ग्राहकों के लिए लूट सेक्टर..”

छत्तीसगढ़ (रायपुर) अरुण कुमार पाण्डेय । प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी जो अपने ग्राहकों को वाहन फायनेंस करते वक़्त तो मीठी मीठी बातें करके ग्राहक के हर बात में हां में हां इसतरह मिलाते हैं मानो जैसे संसार में उनसे अधिक कोई आपके हित मे न् सोचता हो, दरअसल यह पूरा खेल होता है अपना उल्लू सीधा करने के लिए, इन कर्मचारियों को अपने कंपनी द्वारा प्रत्येक फाइनेंस के पीछे मोटी इन्सेंटिव्ह या कमीशन प्राप्त होता है।

अब चूंकि लोन अग्रीमेंट पूरा अंग्रेजी भाषा व बहुत ही छोटे अक्षरों में होता है अतः ग्राहकों से कई आवश्यक जानकारी छुपाकर उनसे इन कर्मचारियों द्वारा लोन एग्रीमेंट में हस्ताक्षर करवा लिया जाता है।

यहां ग्राहकों की भी गलती हैकि बिना सोचे समझे मात्र विश्वास करके किसी भी पेपर में वे कैसे हस्ताक्षर कर देते हैं।

यहां तक कि फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों द्वारा जिन दस्तावेजों की आवश्यता न हो कई बार वह तक भी ग्राहकों से मांग लिया जाता है।

भोलेभाले फाइनेंस कंपनी के नियम कानून से अनभिज्ञ ग्राहक अपने लिए वाहन मिल जाये और उसकी जिंदगी कुछ आसान हो जाये मात्र इस लिए फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी के हर बात पर सिर हिलाने के अतिरिक्त उनके पास और अन्य कुछ भी चार नही रहता है।

अब जब कभी परिस्थिति ख़राब हो जाती है या किसी कारणवश ग्राहक द्वारा अपने लिए लोन का किसी माह क़िस्त सही समय पर जमा नही कर पाते हैं तब तत्काल प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के द्वारा ग्राहक को फ़ोन के माध्यम से संपर्क करके इसकी जानकारी के साथ विलंब शुल्क जोड़ कर बताया जाता है।

विलंब शुल्क..? ग्राहक को समझ नही आता कि आखिर अब ये विलंब शुल्क का बोझ अतिरिक्त हो गया अब इसका क्या किया जाए।

कुछ दिन तक क़िस्त जमा न् होने की स्थिति में प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के रिकवरी याने की वसूली करने वाले कर्मचारी अपने ग्राहक दरवाज़े पर पहुंच जाते हैं।

अब जिस ग्राहक से कभी इसी कंपनी के कर्मचारी ने शहद से भी मीठी भाषा में बात किया था, उससे ठीक उलट कड़वे नीम से भी अधिक कड़वी भाषा में ग्राहक को ज़लील करते हुए बात कियक जाता है।

आपको बता देकि इन रिकवरी याने की वसूली कर्मचारियों द्वारा कई लोगों के बीच अपने ग्राहकों को “औकात नही है तो क्यों गाड़ी चलाते हो..” या “जब पैसा पटाने के दम नही तो लोन क्यों लिया..” जैसे अपमान जनक शब्दों से भी सम्मानित करने से परहेज़ नही करते हैं।

अब ग्राहक बेचारा वैसे ही अपनी परेशानी से परेशान है और इधर फाइनेंस कंपनी के वसूली कर्मचारी द्वारा किये गए शब्दबाण के घाव अलग।

इस तरह से यदि लगातार 2 या 3 माह से ग्राहक ने किसी कारणवश क़िस्त जमा नही किया हो तब तो मानो ग्राहक के ऊपर आंधी ही आने वाली है।

इस स्थिती में फाइनेंस कंपनी महज़ अपने कुछ माह के क़िस्त के रूप में चंद रुपयों की वसूली के लिए अपने ही सम्माननीय ग्राहक को डराने धमकाने लगता है।

कानूनी केस व एग्रीमेंट में किये गए लिखा पढ़ी की याद दिलाया जाता है, नौबत यहां तक आ जाती हैकि ग्राहक के वाहन को फाइनेंस कंपनी द्वारा सीज़ कर लिया जाता है।

अब ज़रा स्वयं आंकलन करिये कि ग्राहक द्वारा अपने लोन राशी के लिए महज़ कुछ माह के क़िस्त के बदले उससे कहीं अधिक कीमत की वाहन को फाइनेंस कंपनी किसप्रकार अपने कब्जे में ले सकती है, सवाल यह उठता हैकि यह कानूनन कहां तक सही है ?

जबकि इनके द्वारा ग्राहकों की वाहन बिना पुलिस विभाग को सूचना दिए व न्यायालय के आदेश के बिना नही किया जा सकता है।

 

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