कांगडा : आर्थिक गरीब बन रही खिलाड़ी बेटीयों के लिए रोड़ा
September 12th, 2019 | Post by :- | 212 Views

डमटाल (मुकेश सरमाल)

हिमाचल प्रदेश की पहली ऐसी बेटी सोमी देवी जिसके साथ किसी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कंपनी ने करार किया हो जिसने हर खेल में मेडलों का घर तांता लगाया हो । वो खिलाड़ी आर्थिक रूप से बहुत गरीब है लेकिन उसका जज्बा देश ओर प्रदेश का नाम ऊंचा कहना है। जब दैनिक जागरण ने घर जाकर सोमी देवी की बात तो हैरान करने बाले तथ्य सामने आए सोमी देवी खुद दिहाड़ी मजदूरी करके अपनी पढ़ाई अोर खेलों का खर्च उठा रही है ।आम खेलों में आर्थिक स्थिति आडे आ जाने के कारण सोमी देवी ने प्रोफेशनल खेलों की तरफ अपना रुख किया अपनी जान की परवाह ना करते हुए इन खेलो के प्रति बड़ी मेहनत से जुनून पैदा किया सोमी अपना कुछ हद तक खर्चा दंगल और मैराथन दौड़ जीतकर भी चलाती है कॉलेज तक जाने के लिए पैसे तक नही फिर भी पढ़ाई का जज्बा घर से पैदल जाती कॉलेज सोमी ।

सिर पर छत भी नहीं ——-
बता दे परिवार के पास सिर ढ़कने के लिए एक सही आशियाना भी नहीं है । जर्जर हालत में कच्चा तीन का मकान है अपने पास अपनी कोई जगह भी नहीं है उनके पिता भीम बहादुर का कहना है वे 40साल से हिमाचल में रह रहे है लेकिन पैसा ना होने के कारण एक फुट जगह भी नही है हमारे पास
विमार पिता की नम आंखे बहुत कुछ व्यान कर रही थी सोमी देवी की चार बहने अोर तीन भाई है सभी बहने स्कूल पड़ रही है ओर उनका खर्च वो छुट्टी वाले दिन मजदूरी करके करती है। जब दैनिक जागरण उनके घर गई तो चौकाने बाले तथ्य सामने आए ।

जिला स्तरीय गोल्ड जीतने वाली वेटीयां आरती सुनीता तथा माता गई थी मनरेगा में मजदूरी करने ———
जिन योजनाओं का सरकार बहुत जोरो शोरो सें प्रचार अोर प्रसार करती है ऐसी कोई भी सुविधा परिवार के पास नहीं थी ना तो परिवार के पास ढंग का शौचालय हैै ना उज्वला योजना वाला गैस कैक्शन । यहां तक स्वच्छ पीने के जल के लिए भी एक किलोमीटर जाना पड़ता परिवार को —– इसी साल अंत में वर्ल्ड क्वालीफायर चैंपियनशिप होना है सोमी देवी का लेकिन जहां अमीर खिलाड़ी अपनी डाइट का ध्यान रखते है लेकिन ये गरीब परिवार चावल का लेगूडू खाने तक माकूल है। इस हालत में कैसे होगा देश ओर प्रदेश का नाम रोशन ।—–
सोमी देवी की बहने आरती ,सुनीता अोर शंकुतला भी खिलाड़ी है अोर जिला स्तरीय खेलों में गोल्ड लेकर आई है । लेकिन उनकी बहनों का कहना है मैड़लो से पेट नही भरता उसके लिए दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती है लोग बस वाहवाही ही देते है।
———–सोमी देवी का कहना है वो इंदौरा विधानसभा से आती है लेकिन उनको किसी ने स्मानित नहीं किया ओर ना ही हमारी परिवारिक स्थित को जानना वेहत्तर समझा आप हमारे घर हमारा पता करने आए हमारे लिए ये एक सम्मान की घड़ी है ।बाहर नूरपूर क्षेत्र के नेता ओर लोगों ने हमारी मदद की लेकिन इंदौरा वालों ने सिर्फ एक हिमाचली टोपी शाल के अपना स्मान पला जड़ा ——–
सोमी देवी का कहना है हम सभी बहने देश प्रदेश का नाम ऊंचा करना चाहती है पर गरीबी हमारी पढ़ाई ओर खेल के बीच रोड़ा बन रही है

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