अखिल भारतीय साहित्य संघ द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने बिखेरे कविता के रंग
September 13th, 2020 | Post by :- | 100 Views

डॉ. विनोद शर्मा ने कविता ‘क्यों ईश्वर पर दोष है मढ़़ता’ के माध्यम से कहा- ग्रहों को भी नहीं है बख्शते, नक्षत्रों की उल्टी चाल है बदलते…… मनमंदिर भूल दर-दर है भटका, क्यों ईश्वर पर दोष है मढ़ता ।

चंडीगढ़(मनोज शर्मा)  अखिल भारतीय साहित्य संघ द्वारा आयोजित की गई ऑनलाइन काव्य गोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सरिता मेहता ने हिंदी के महत्व पर जोर देते हुए हिंदी को आगे बढ़ाने पर बल दिया। संघ की अध्यक्षा इंद्र वर्षा ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन नीरूमित्तल नीर ने किया।
अंत में प्रेम बिज ने सभी का धन्यवाद किया।

अध्यक्षा इंद्र वर्षा ने अपनी कविता ‘एकाकी चांद को निहार रही थी बहुत सुंदर अपनी चांदनी की चमक से’ में चांद की सुंदरता प्रस्तुत की। प्रेम बिज ने अपनी कविता ‘मैं सिद्धार्थ नहीं हूं मुझे तो धूप में जलना है मुझे मोक्ष या मुक्ति नहीं चाहिए’ के द्वारा आम आदमी की पीड़ा व्यक्त की। सरिता मेहता जी ने कविता ‘अक्सर जब मन घबराता है सीने का बोझ बढ़ जाता है’ से सबका मन मोह लिया। नीरू मित्तल ने अपनी कविता ‘काहे अकड़े तू नादान, समय बड़ा है यह बलवान’ के द्वारा मनुष्य के अभिमान और नश्वरता का चित्रण किया। डॉ. विनोद शर्मा ने कविता ‘क्यों ईश्वर पर दोष है मढ़़ता’ के माध्यम से कहा- ग्रहों को भी नहीं है बख्शते,
नक्षत्रों की उल्टी चाल है बदलते…… मनमंदिर भूल दर-दर है भटका, क्यों ईश्वर पर दोष है मढ़ता।
ऑनलाइन हुई इस गोष्ठी में राशि श्रीवास्तव, अचला ढिंगले, विश्व मोहिनी मदान, उषा गर्ग, रेखा साहनी, एच सी गेरा, आभा मुकेश साहनी, अलका कांसरा, रेनू अब्बी, नीलम त्रिखा, डेज़ी बेदी जुनेजा, प्रज्ञा शारदा, सुखविंदर आही, गोगी गिल और अशोक भंडारी नादिर ने भी अपनी कविताएं सुना कर गोष्ठी में चार चांद लगा दिए।माननीय श्री के के शारदा जी ने सभी को आशीर्वाद दिया।

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