खुशियाँ बढ़ाने मे सहायक वर्ग खुद भुखमरी के कगार पर, हालात बद से बदतर|
September 12th, 2020 | Post by :- | 51 Views

पलवल (मुकेश कुमार हसनपुर) 12 सितंबर :- वैसे तो अब लॉकडाऊन खुलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं लेकिन शादी-समारोह व विभिन्न आयोजनों में चार चांद लगाने वाले बैंड-बाजे वाले इन दिनों तंगहाल है । चार महीने से उन्हें कोई बुलावा ही नहीं आया है। दरअसल लॉकडाउन के कारण हर वर्ग प्रभावित हुआ है लेकिन बैंड-बाजे व डीजे वाले शादियों में फोटोग्राफी करने वाले और टेंट वाले कैटरिंग वाले, रंगाई पुताई करने वाले, हलवाई, कार्ड प्रिंटिंग करने वाले, घोड़ी वाले, फूल वालें, प्राइवेट टैक्सी वाले मतलब कि शादी विवाह, जागरण आदि से संबन्धित वर्ग अधिक प्रभावित हुए हैं। जहां लॉकडाउन में छूट मिली हैं वहां अन्य कामकाज चालू हो चुके हैं लेकिन बैंड-बाजे, साउंड सर्विस व डीजे वाले अब तक ऑर्डर की बाट ही जोह रहे हैं। उन्हें अब उम्मीद नहीं है कि अगले चार-छह महीने तक कोई आर्डर मिल सकेगा।

अधिकांश गरीब तबके से :-

बैड में काम करने वाले अधिकांश गरीब तबके के लोग ही होते हैं। जिनकी आमदनी बहुत कम होती है। पिछले दिनों शादियों की सीजन में बैंड वालों को आर्डर नहीं मिले। शादी में पचास की सीमित संख्या के चलते लोगों ने बैंड से परहेज ही रखा। शादी-ब्याह में बैंड वालों की सबसे अधिक कमाई होती है। लेकिन वह पूरा सीजन बिना कमाई के निकल गया और अब अगले चार महीने तक कोई सावे नहीं बताए जा रहे हैं।

बैण्ड वालों से दूरी :-

धार्मिक आयोजन में भी बैंड वालों की पूछ रहती है लेकिन इस बार धार्मिक कार्यक्रमों में भी लोग बैंड वालों से दूरी बनाए हुए हैं। जुलाई के पहले सप्ताह में ही विभिन्न जगहों पर चातुर्मास के आयोजन शुरू हुए। लेकिन इस बार बैंड बाजे वाले नदारद थे। आयोजकों ने चातुर्मास से पहले निकाली जाने वाली चातुर्मास प्रवेश यात्राएं भी सादी ही रखी। यानी सीमित लोग ही इनमें पहुंचे। अमूमन चातुर्मास प्रवेश धूमधाम के साथ होता रहा है जिसमें बैंड की मधुर स्वर लहरियां बिखरती है लेकिन इस बार पता ही नहीं चला कि कब चातुर्मास शुरू हो गए। कुछ ऐसा ही हाल डीजे वालों का रहा। वे भी मन मसोस कर बैठे हैं।

ऐसे हालात कभी नहीं रहे :-

फाकाकशी में जिंदगी गुजार रहे बैंड वालों का कहना है ऐसे हालात कभी नहीं रहे। कभी मंदी-तेजी तो रही है लेकिन अब तो दुकान के ताले भी नहीं खुल सके है। कोई पूछताछ के लिए भी नहीं आ रहे। बैंड सामग्री चार महीने पहले जैसे रखी थी वैसे ही पड़ी है।

परिवार का पेट पालना मुश्किल :-

बैंड पार्टी में काम करने वाले एक युवक का कहना था कि वह पिछले बीस साल से बैंड बजाने का काम कर रहा है। घोड़ी वालों के हालत यह है कि कोई इन्हे खरीदने को भी तइया नही, अब तो चार महीने से फूटी कौडी नहीं मिली है। आजीविका का कोई दूसरा जरिया भी नहीं है। अब कोई दूसरा काम भी नहीं आता। ऐसे में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। परिवार का पेट पालना मुश्किल होता जा रहा है। और देखने वाली बात यह है कि सरकार उनकी तरफ कितना ध्यान देती है इन लोगों की तो कोई सरकार में सुनने वाला भी नहीं है|

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