किसानों, आढ़तियों व मजदूरों को प्रदर्शन करने से रोकना संवैधानिक अधिकारों का हनन: माजरा
September 10th, 2020 | Post by :- | 25 Views

कैथल(लोकहित  एक्सप्रेस विशाल चौधरी)पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने सरकार द्वारा किसानों पर किए गए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में ङ्क्षनदा करते हुए कहा कि किसान शांतिपूर्वक अपना प्रर्दशन करने आए थे न कि कोई ङ्क्षहसा करने आए थे। सरकार द्वारा किसानों, आढ़तियों एवं मजदूरों को प्रर्दशन करने से रोकना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। बातचीत करते हुए माजरा ने कहा कि जब-जब भी सत्ता के नशे में चूर होकर किसानों के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया है चाहे वो किन्हीं की सरकारें रहेगी चाहे वह कितने बड़े तानाशाह रहे होंगे परंतु किसानों के सामने उनकी सरकारें नहीं टिक पाई जो सरकार किसानों से टकराएगी वो लगभग धराशाही हो जाएगी। अब किसान, व्यापारी और कर्मचारी आज देश की सत्ता सौंपते हैं परंतु सत्ता के नशे में चूर होकर इन पर लाठियां बरसाई जाती है। आज किसानों, आढ़तियों पर जिस प्रकार का अत्याचार किया गया इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए और किसानों के अंदर जो भ्रांतियां है और मंडियों में जिस प्रकार की भ्रांतियां है कि मंडी खत्म हो जाएगी, एम.एस.पी. खत्म हो जाएगा और किसान बर्बाद हो जाएगा। इस प्रकार की भ्रांतियां दूर करनी चाहिए। सरकार अपनी तरफ से सुनिश्चित करें कि एम.एस.पी. किसानों को मिलेगा और 72 घंटे मिलेगा यह कानून बनाए जो एम.एस.पी. से नीचे खरीदेगा उसे दंड दिया जाएगा तथा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू होनी चाहिए जिसको सरकारों ने ठंडे बस्तों में रख दिया। माजरा ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और इस देश में अभिव्यक्ति आजादी को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने सरकार को सुझाव भी दिया कि वर्तमान में कारोना जैसी महामारी के चलते सरकारों द्वारा दी गई छूट के अंतगर्त किसी को भी सामाजिक दूरी बनाते हुए अपनी बात कहने का हक है और यही कुछ किसान, आढ़ती व मजदूर भी करने के लिए जा रहे थे जिन्हें न केवल रोका बल्कि कृषकों पर लाठीचार्ज भी किया गया जो ङ्क्षनदनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के सरकारी कार्यक्रम भी अपने निर्धारित क्रमानुसार चल रहे हैं लेकिन हरियाणा प्रदेश के कोने-कोने में आज और कल दोनों दिन किसानों को अपनी बात कहने के लिए जाते हुए रोका गया। माजरा ने महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि पूरे देश को खाद्यान्न देने वाला प्रदेश का किसान यदि कोई अपनी समस्या के समाधान के लिए कहीं मिल बैठकर बात करना चाहता है तो उसमें बुराई नहीं है। किसानों को बात पहुंचाने का हक देना जरूरी है। सरकार तक बात पहुंचने से ही किसानों की समस्या का समाधान होगा। उस लिहाज से किसानों का इस तरह से अपनी अभिव्यक्ति रखना गलत नहीं है।

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