संस्कार और संस्कृति का जीवन से गहरा संबंध : जुगेंद्र भारद्वाज
September 9th, 2020 | Post by :- | 92 Views

मथुरा,(राजकुमार गुप्ता) बरसाना जीव एकता फाउंडेशन के स्थानीय कार्यालय में संस्कार और संस्कृति को लेकर एक कार्यकारिणी बैठक का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर मुख्य वक्ता स्वामी गोपालानंद चार्य जी ने कहा हे हमारे देश को विश्व गुरु माना जाता है हमारे देश की संस्कृति विश्व में सबसे पुरानी है इस धरोहर को आज के आधुनिक युग में संस्कृति को भूलते जा रहे हैं जीव एकता फाउंडेशन के माध्यम से जो यह संस्कृत और संस्कार की पाठशाला का आयोजन किया गया है इस मुहिम से हमारे देश की संस्कृति को बिछड़ने से बचाया जा सकता है। ब्रह्म कीर्ति रक्षक दल के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य जुगेंद्र भारद्वाज जी ने कहा एक मनुष्य का उसके जीवन में संस्कार और संस्कृति का अहम किरदार जिससे उसकी पहचान ,सच का चरित्र, उसका स्वाभिमान और उसका मान सम्मान सभी चीजें संस्कृति से और संस्कार से मिलती है अगर किसी मनुष्य का चरित्र ठीक ना हो तो वह मनुष्य अपनी संस्कृति और संस्कार का विकास नहीं कर सकता । यदि शिक्षा में संस्कार एवं संस्कृति नहीं है तो जीवन मूल्य खत्म हो जाता है। शिक्षा को संस्कृति एवं संस्कार से जोड़ना जरुरी है। जीवन मूल्य के बिना शिक्षा अर्थहीन है । संस्था का मुख्य उद्देश्य संस्कार एवम् संस्कृति की पाठशाला कार्यक्रम के तहत गांव गांव जाकर सभी को यह अवगत कराना है की हमारी संस्कृति क्या है और हम इस को किस तरीके से बचा सकते हैं, जीव एकता फाउंडेशन के तहत ऐसे विभिन्न कार्यक्रम समाज हित में चलाए जा रहे है। इस अवसर पर फाउंडेशन के महासचिव संजय कुमार व राष्ट्रीय समन्वयक एसके सिंह ,ब्रह्म कीर्ति रक्षक दल के अध्यक्ष पंडित जुगेंद्र भारद्वाज, धर्मेन्द्र शर्मा, रूपकिशोर उपमन्यु, स्वामी गोपालानंद चार्य, भारत शर्मा, डॉ घनश्याम मिश्र उपस्थित रहे ।

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