सुप्रीम कोर्ट में बहादुरगढ़ अभिभावक संघर्ष संघ ने लगाई फ़ीस माफ़ी याचिका
September 3rd, 2020 | Post by :- | 114 Views

बहादुरगढ़ लोकहित एक्सप्रेस ब्यूरो चीफ(गौरव शर्मा)

बहादुरगढ़ अभिभावक संघर्ष संघ पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

बहादुरगढ़ अभिभावक संघर्ष संघ से नीरज गौतम, प्रदीप गुप्ता, अंजू दहिया, आशीष भारद्वाज, राम अवतार, रवि देशवाल, उमेश वर्मा, भारत नागपाल व् प्रदीप खत्री ने इस बार स्कूल फीस माफ़ी के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा दी है पिछले कई महीनो से बहादुरगढ़ अभिभावक संघर्ष संघ, विद्यालयों द्वारा अप्रैल , मई और जून महीनो की पूरी स्कूल फ़ीस मांगने को लेकर बहादुरगढ़ के अभिभावकों के साथ कई स्कूलों में गए और विद्यालय के प्रधानाचार्यो ओर अध्यापको से बात की परन्तु निराशा ही मिली विद्यालय के प्रधानाचार्यो का कहना है कि आपको अप्रैल , मई और जून महीनो की पूरी स्कूल फ़ीस भरनी होगी अन्यथा आपके बच्चो का विद्यालय से नाम काट दिया जायेगा ऐसा सुनने पर अभिभावकों द्वारा विद्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन किया जाने का भी विद्यालयों पर कोई असर नहीं हुआ तब हरियाणा के अन्य शहरो के अभिभावकों ने हाई कोर्ट में विद्यालयों द्वारा अप्रैल , मई और जून महीनो की पूरी स्कूल फ़ीस मांगने को लेकर याचिका डाली परन्तु हाई कोर्ट का भी फैसला विद्यालयों के हक़ में ही आया जंहा हरियाणा के सभी अभिभावकों को बहुत ठेस पहुंची
अब नीरज गौतम, प्रदीप गुप्ता, अंजू दहिया, आशीष भारद्वाज, राम अवतार, रवि देशवाल, उमेश वर्मा, भारत नागपाल व् प्रदीप खत्री अपनी इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में देश के सभी अभिभावकों की तरफ से याचिका डाल चुकें है जिसका केस डेरी नंबर 18484 -2020 है सभी अभिभावको ने एक स्वर में इस बात पर चर्चा करते हुए अपनी बात रखी कि लॉकडाउन के दौरान मध्यम व्यापारी वर्ग, नौकरीपेशा करने वाले लाखों लोग कोरोना महामारी के चलते अपने काम धन्धों में भारी घाटे के कारण सरकार द्वारा बिजली बिल, बन्द दुकानों के किराये, कर्जो की देनदारी से पहले से ही परेशान थे, ऊपर से सरकार निजी स्कूलों की फीस को लेकर दिए गए अपने ही आदेशों को सख्ती से लागू नहीं करवा पा रही है । जिससे अभिभावकों में फीस को लेकर भारी संशय व आक्रोश की स्थिति बनी हुई है। अब जब सर्वविदित है कि सभी स्कूल 01 अक्टूबर से पहले तो नहीं खुलने वाले, तो उसके बाद की भी स्थिति अभी स्पष्ट नजर नहीं आ रही कि स्कूल खुलेंगे या नहीं । स्कूलों द्वारा बिना पढ़ाई के ही 6 महीने की फीस वसूलने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। जिसमें ऑनलाईन कक्षा से लेकर बच्चों का नाम काटने तक की चेतावनी भी बार-बार देकर अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है। जबकि लॉकडाउन में मिली छूट के बाद भी काम धन्धों की स्थिति पुराने ढर्रे पर नहीं आ रही है, जिसके चलते लाखों लोग या तो अपने काम धन्धों से हाथ धो बैठे हैं या इतना ही कमा पा रहे हैं जिसमे गुजर-बसर हो सके। जबकि निजी स्कूल वाले निजी प्रकाशन वालों की पुंस्तकें, स्कूल डै्रस, जूते व अन्य मदों से मोटी कमाई करने के बावजूद भी बार-बार अपने स्टाफ को सेलरी देने के नाम पर सरकार की आंखों मे धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। सरकार भी आम जनता का दुख दर्द न समझकर न जाने क्यों इन निजी स्कूलों की मनमानी को बढ़ावा दे रही है व इनकी हर जायज – नाजायज मांग के आगे नतमस्तक नजर आती है। जिससे आमजन में मौजूदा सरकार के प्रति रोष बढ़ रहा है। क्योंकि कोरोना महामारी के चलते आमजन को सरकार से पूर्ण सहयोग की उम्मीदें थी परन्तु बार-बार सरकारी आदेशों के बदलने से अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं व सरकार से अपील भी करते हैं कि सरकार ने जो एस.एल.सी. को लेकर जो आदेश दिया था, उसे लेकर सरकारी स्कूलों मे पर्याप्त स्टाफ व सुविधांए बढाये और इन निजी स्कूल वालों पर अंकुश लगाने का कार्य करे। सरकार से आमजन की अपील है कि जब तक स्कूल बन्द रहते हैं, तब तक स्कूल की फीस को लेकर आमजन को राहत पंहुचाने का कार्य करे समस्त देश के अभिभावकों को ये उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें अप्रैल , मई और जून महीनो की पूरी स्कूल फ़ीस माफ़ी रूपी उपहार प्राप्त होगा

फोटो कैप्शन : सुप्रीम कोर्ट में याचिका का केस नंबर

 

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