हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स संस्था को भी उचित सम्मान मिले: श्रीनिवास शर्मा
September 2nd, 2020 | Post by :- | 45 Views

चंडीगढ़ (मनोज शर्मा) स्काउटिंग व गाइडिंग मेरे लिए एक साधना है। हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स इसका साकार रूप है। जिसका आज मैं चीफ स्काउट हूँ। इसी संस्था के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम रुपाला जी के सहयोग से 10 अगस्त 2015 को राजऋषि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंदर मोदी जी का उनके कार्यालय में सानिंध्य प्राप्त हुआ व अपने हाथ से उनके गले में हिंदुस्तान स्काउट्स व गाइड्स का केसरी स्कार्फ पहनाया तथा अनवरत 14 मिनट्स तक संस्था की स्थापना से सम्बंधित जानकारी दी। उसके पश्चात् मेरे यह कहने पर कि मेरी उम्र टूट रही है पर मेरी साधना ना टूट जाए, उन्होंने हाथ उठाकर मेरी साधना की रक्षा का दृढ़ आश्वासन दिया जिसे सुन कर मैं धन्य हो गया। यह कहना है हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स एसोसिएशन के संस्थापक श्रीनिवास शर्मा का।

उन्होंने बताया कि 1946 मात्र 9 वर्ष की आयु में आर.एस.एस से जुड़ने।  शाखाओं में 2 वर्ष नियमित रूप से जाता रहा पर महात्मा गाँधी हत्याकांड के कारण विराम लग गया। उन 2 वर्षों ने मेरे  जीवन निर्माण का कार्य किया। उसी प्रेरणा से अग्रवाल इंटर कॉलेज, सिकंदराबाद, यूपी में प्रवेश लेकर स्काउटिंग से 1950 में जुड़ गया और प्रतिदिन कम से कम एक भलाई का कार्य करना दिनचर्या बन गया। स्काउट जीवन की सीढियों के क्रम में 1951 में टोलीनायक, 1952 में दलनायक बना। स्काउटिंग के साथ खेल कूद, कविता, कहानी लेखन के आधार पर 1953 व 1954 मे 2 वर्ष कॉलेज का प्रमुख छात्र चुना गया। स्काउटिंग को देश व समाजसेवा की भावना के साथ जीवन में उतार लिया जो 83 वर्ष की आयु में आज भी सक्रिय है। निर्धनता के कारण कक्षा 12 के बाद कॉलेज न जा सका।  प्राइवेट पढाई से बी.ए, एम.ए व बी.एड किया 1957 में जेटीसी पास कर उसी अग्रवाल इंटर कॉलेज में अध्यापक बना। बुलंदशहर जिला में मेरी स्काउट टीम सर्वश्रेष्ट चुनी गयी। 1959 में टेस्ट पास कर दिल्ली नगर निगम मिडिल स्कूल, रामजस लेन, करोल बाग नई दिल्ली में अध्यापक नियुक्त हुआ। 1961 में सर्वश्रेष्ठ कब मास्टर चुना गया। 1963 में सरकारी स्कूल में टी.जी.टी बना व जिला संस्था भारत स्काउट व गाइड पश्चिमी दिल्ली का क्वार्टर मास्टर चुना गया, 1965 में जिला सयुंक्त सचिव, 1967 में जिला कोषाध्यक्ष व 1970 में जिला सचिव बना। 1992 तक सचिव रहा भारत स्काउट्स व गाइड्स का भाव अंग्रेजी स्काउट संस्था के समकक्ष 1928 में भारतीयों की अपनी संस्था हिंदुस्तान स्काउट्स एसोसिएशन खड़ी करने वाले प० मदन मोहन मालवीय व प० श्रीराम बाजपेयी के प्रति द्वेष पूर्ण था। जबकि बह लार्ड बेडेन पावेल को पूजते थे व उनका जन्मदिन 22 फरवरी को चिंतन दिवस के रूप में सारे भारत में मनाते थे इनकी मनोवृति बदलने के लिए मैने भारत स्काउट गाइड दिल्ली के स्टेट चीफ कमिश्नर के चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारें।  1967,1973, 1985 व 1991 में चुनाव लड़ायें पर वहां नॉमिनेटेड वोटर अधिक होने से सफलता नहीं मिली स्वयं कभी चुनाव नहीं लड़ा। श्रीनिवास शर्मा ने बताया कि भारत स्काउट्स व गाइड्स ने मेरी शिकायत दिल्ली के शिक्षानिदेशक श्री शक्ति सिन्हा से की जिन्होंने मुझे अपनी अलग संस्था बनाने की सलाह दी। मैंने दिल्ली राज्य स्तर पर 13 अप्रैल 1994 को दिल्ली स्टेट गर्ल बॉय स्काउट्स एसोसिएशन बनाई व उस का पंजीकरण कर काम शुरू कर दिया। जिसके अध्यक्ष स्व साहिब सिंह वर्मा, मैं राज्य सचिव बना 27-03-1997 को लेक्चरर (राजनैतिक विज्ञानं) पद से रिटायर हुआ।
उन्होंने बताया कि स्कूलों व छात्रों की संख्या अधिक बढ़ जाने के कारण वर्ष 1997 में स्काउटिंग गाइडिंग के मुख्य संरक्षक तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ के.आर नारायणन ने भारत सरकार को स्काउटिंग के द्वार अन्य संस्थाओं के लिए खोलने की  संस्तुति की। भारत सरकार के खेल मंत्रालय के प्रोत्साहन से 26 नवंबर 1998 को राष्ट्रीय संस्था हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स एसोसिएशन की विधिवत स्थापना की। लगभग 3 वर्ष के सफल सयोजन और राष्ट्रीय स्तर पर प्रसार को देखकर खेल मंत्रालय ने 07 मार्च 2001 को राष्ट्रीय मान्यता प्रदान की जिसके विरुद्ध भारत स्काउट व गाइड संस्था हाई कोर्ट गई पर हार गयी। 2004 में भारत सरकार के खेल मंत्रालय के सर्वे के अनुसार सदस्य संख्या 11 लाख 72 हजार पहुँच गयी अत: मुझे लाखो रूपये का प्रलोभन देकर संस्था बंद कराने की कोशिस की गई पर मेरा कहना था कि साधना बेचीं नहीं जाती तों मुझे 15 दिसम्बर 2004 से 22 जनवरी 2005 तक तिहाड़ जेल भेजकर गैरहाजरी में शोकॉज नोटिस निकालकर हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स की मान्यता रद्द करा दी। उसके बाद बिना सरकारी मान्यता व अनुदान के 10 वर्षों तक कोर्ट के चक्कर काटने के साथ संस्था का सफल संचालन किया। विश्व स्तरीय संस्था WFIS जर्मनी से मान्यता ली। 26 सितम्बर 2013 को भारत सरकार से मान्यता बहाल हुई जो सफलता से राष्ट्रीय स्तर चल रही है ।
उन्होंने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि मेरे 70 वर्ष के सेवा कार्य से लाखों स्काउट बच्चे सुयोग्य नागरिक बने, उन्हें नौकरी में काम आने वाले प्रमाण पत्र मिले व आज हजारों युवा विद्यालय प्रशिक्षक के रूप में स्काउटिंग गाइडिंग को आय का साधन बनाये हुए है। प्रार्थना की जाती है कि हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स संस्था को भी उचित सम्मान मिले।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।