मेरी कलम
September 2nd, 2020 | Post by :- | 104 Views

उठकर राजनीति से ऊपर,

बेसहारा लोगों के दिलों को छूकर,
मेरे अंतर्मन को करती मजबूर,
ढूंढती अधिकारों से वंचित बेकसूर,
स्वच्छंदता से चाहती समस्या उठाना,
बेखबर सोए रखवालों को जगाना,
औरों की सेवा को बनाया है धर्म,
निष्पक्षता से उठाती आवाज मेरी कलम।

नहीं काम करती किसी के दबाव,
समृद्ध है विषयों का नहीं अभाव,
सबके भले का लेती खबाव,
झुकते इसके आगे नवाब,
लिखने से मिट जाते  कष्ट,
देता पोल खोल जो हैं भ्रष्ट,
रही सुधार भूले भटकों के कर्म,
निष्पक्षता से उठाती आवाज मेरी कलम।

नहीं इसे कोई लालच,
छिपा न रखा इसने कोई स्वार्थ,
करती विचरण होकर निर्भीक,
उत्तर देती बिल्कुल स्टीक,
हर समस्या है इसका विषय,
बताती अनसुलझी गुत्थी का आशय,
महलों से होकर पहुंचे स्लम,
निष्पक्षता से उठाती आवाज मेरी कलम।

रोक सके न कोई दीवार,
देख रखा है पूरा संसार,
प्रकृति के हृदय में यह बसी,
फैलाना चाहती चुहूँ ओर हंसी,
कोई अछूता न इससे किनारा,
हार इसने कभी न  स्वीकारा,
बंधन से छूटी जन्म मरण,
निष्पक्षता से उठाती आवाज मेरी कलम।

डॉ. विनोद कुमार शर्मा, चंडीगढ़।

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