सरकारी नौकरी दिलाने के लिए जाली दस्तावेज बना रहा गिरोह
September 1st, 2020 | Post by :- | 51 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल का गठन राजस्थान पैरामेडिकल कॉउंसिल एक्ट 2008 के तहत हुआ और दिसंबर 2014 में इसे लागू किया गया। राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल में सभी पैरामेडिकोज के पैरामेडिकल कोर्सों का पंजीयन किया जाता है। यह पंजीयन की प्रक्रिया राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल रूल 2015 के तहत की जाती है जिसमे इस रूल कि धारा 42 की सेक्शन 1 के अनुसार उन सभी पैरामेडिकल कोर्स का पंजीयन किया जाएगा जिनका काउंसिल के गठन से पूर्व राज्य सरकार ने इनको पैरामेडिकल कोर्स चलाने की सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में अनुमति प्रदान की हो। धारा 42 की सेक्शन 2 के अनुसार उनका पंजीकरण किया जाएगा जिन कॉलेजों को राज्य सरकार ने अनुमति प्रदान की हो। सेक्शन 3 के अनुसार उन सभी पैरामेडिकल कोर्स का पंजीकरण किया जाएगा जो राज्य के बाहर से किए हो और वहां की पैरामेडिकल काउंसिल ने उनका रजिस्ट्रेशन किया हो। वर्तमान में जो प्रकरण राज्य से बाहर के डिप्लोमा का चल रहा है वह पैरामेडिकल काउंसिल की धारा 3 के अंतर्गत संबंध रखता है। जिन विद्यार्थियों ने राज्य से बाहर जो डिप्लोमा अर्जित किया है उसका रजिस्ट्रेशन के लिए यहां आवेदन किया जाता है जब यहां आवेदन किया जाता है तो संबंधित दस्तावेजों को वहां की पैरामेडिकल काउंसिल में उनके रजिस्ट्रेशन और उनकी एनओसी को वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाता है अगर वहां से वेरिफिकेशन सही पाया जाता है तो संबंधित अभ्यर्थी का पंजीयन कर दिया जाता है अगर वेरिफिकेशन सही नहीं पाया जाता है तो उसका रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता है। हाल ही में राजस्थान में चल रही भर्ती प्रक्रिया को मद्देनजर रखते हुए कुछ गिरोह ने मध्य प्रदेश झारखंड व कुछ अन्य राज्यों से इस तरीके के जाली रजिस्ट्रेशन और एनओसी वहां की काउंसिल से मोटी रकम वसूल कर बनाकर कुछ अभ्यर्थियों को ठगा और उन्होंने यहां आवेदन पंजीयन के लिए किया। यहां की काउंसिल ने उनके रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया के तहत जब कागज भिजवाए तो वहां उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला और यह अवगत कराया गया एनओसी और रजिस्ट्रेशन फर्जी हैं। इस पर राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रार सोमदत्त दीक्षित द्वारा शिकायत ज्योति नगर थाने में कराई गई जिस पर कार्यवाही लंबित प्रक्रियाधीन है। इस संपूर्ण प्रकरण में यह देखने को मिला कि किस प्रकार भोले भाले लोगों को फंसाया जाता है। वर्तमान में राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल के सदस्य राजेश कुमार नागर ने बताया कि उनको राजस्थान के कई अभ्यर्थियों ने ऐसे फर्जीवाड़े की आशंका से अवगत कराया तो राजेश कुमार नागर ने जिम्मेदारी पूर्वक उक्त पूरे प्रकरण की जानकारी कॉउंसिल के अधिकारी रजिस्ट्रार सोमदत्त दीक्षित को अवगत कराई और फिर चालू हुआ इस पर कार्य होना। रजिस्ट्रार ने ऐसे सभी फार्म की गहनता से जांच करना सुनिश्चित किया। प्रथम तौर पर कुछ लोगों के कागज वेरिफिकेशन के लिए भेजें तो उन्हें पाया गया फर्जीवाड़ा इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को देखते हुए लगभग 550 आवेदनों को जांचने के लिए रणनीति बनाई गई। जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है और उनके बारे में चिट्टियां संबंधित काउंसिल को भेजी जा रही है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इन सभी आवेदनों में लगभग अधिकतम आवेदन इस तरीके के फर्जी हो सकते हैं इस प्रकार रुका रजिस्ट्रेशन फर्जी लोगों का होने से और राजस्थान के अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा हो सके। इस पूरे प्रकरण पर काउंसिल अधिकारी रजिस्ट्रार सोमदत्त दीक्षित व सदस्य राजेश कुमार नागर से जब बात हुई तो उन्होंने बताया कि इन सभी लोगों का रजिस्ट्रेशन होने से रोक लिया गया है इनकी बारीकी से जांच करवाई जाएगी और अगर फर्जीवाड़ा पाया गया तो इनका रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा व साथ ही इनके खिलाफ और ऐसे गिरोह के खिलाफ राज्य सरकार से सख्त से सख्त कार्यवाही कराने के लिए हमारी पूरी कोशिश रहेगी।

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