सरकार को सोमवार व मंगलवार दुकानें बंद करने का फैसला व्यापारी व आम जनता के हित में वापस लेना चाहिए – पवन बुवानीवाला
August 29th, 2020 | Post by :- | 104 Views

भिवानी़ – लोक विकास मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय महासचिव पवन बुवानीवाला ने मण्डियों और बाजार को दौरा करने के दौरान क्षेत्र के व्यापारी प्रतिनिधियों से बातचीत करने के उपरांत कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा शनिवार व रविवार को दुकानें खोलने और उसकी जगह सोमवार व मंगलवार को दुकाने बंद करने का जो फरमान जारी किया है वह व्यापारी  विरोधी है।

व्यापार मंडल इस फैसले के विरोध में जिला व ब्लॉक स्तर पर जिला उपायुक्त व सरकारी अधिकारी के माध्यम से राज्यपाल के नाम प्रदेश में जगह जगह ज्ञापन दे रहा है और आगे भी देगा। बुवानीवाला ने कहा की कोविड-19 और लॉकडाउन के कारण व्यापारी वर्ग का सबसे अधिक नुकसान हुआ है। परन्तु इस विश्व व्यापी महामारी के दौरान प्रत्येक व्यापारी ने सरकार का सहयोग किया है। परन्तु सरकार की ओर से अब तक व्यापारी को कोई सहयोग नहीं मिल पाया है। व्यापारी के खर्चें ज्यों के त्यों बने हुए है। जिनके कारण व्यापारी पर दौहरी मार पड़ रही है। अब सरकार इस आदेश से एक-एक सप्ताह में 2 दिन दुकानें बंद करने से व्यापारियों को बड़ा भारी नुकसान होगा। जिसे व्यापार मंडल किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगा। प्रांतीय महासचिव बुवानीवाला ने कहा कि  बसें व ऑटो फुल सवारी लेकर चल रहे हैं उसमें कोरोना नहीं फैलता क्या, कोरोना सिर्फ व्यापारियों की दुकानों में ही फैलता है क्या। एक सप्ताह में 2 दिन दुकान बंद होने से व्यापारी बर्बाद हो जाएगा। सरकार ने लॉकडाउन के समय व्यापारियों से बिजली व पानी के बिल व हाउस टैक्स तक लिया। यहां तक की कर्मचारियों की तनख्वाह व बैंकों के ब्याज तक भी व्यापारियों को भुगतना पड़ा।

अब व्यापारी इस स्थिति में नहीं है कि वह बंद दुकानों के बिजली व पानी के बिल कर्मचारियों की तनख्वाह और किराया भर सके। प्रांतीय महासचिव बुवानीवाला ने हरियाणा सरकार से अपील की है वह अपने इस फैसले को व्यापारी व आम जनता के हित में तुरंत प्रभाव से वापस लेना चाहिए। कोरोना महामारी के कारण व्यापार पहले ही ठप्प पड़े हैं ऊपर से सरकार ने लॉकडाउन के समय में भी व्यापारियों को किसी प्रकार की रियायतें नही मिली।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।