जलझूलनी एकादशी सादगी से मनाई नहीं निकले झुलस ।
August 29th, 2020 | Post by :- | 35 Views

कुशलगढ़ अरुण जोशी
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहते हैं। इसे परिवर्तिनी एकादशी व डोल ग्यारस आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान वामन की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की घाट पूजा की गई थी। ये पर्व अलग-अलग जगहों पर श्रीकृष्ण जन्म के बाद होने वाले मांगलिक कार्यक्रम जल पूजा, घाट पूजा और सूरज पूजा के रूप में मनाया जाता है।कोरोना के कारण इस बार जलझूलनी एकादशी पर नगर में नही निकला जुलूस । मंदिरों से 2-4 भक्तो ने सीधे बावलियाखाल नदी के तट पर ले जाकर भगवान को स्नान करवाया किया पूजन अर्चन । गणेश मंदिर के पुजारी कैलाश जोशी,नरसिह मंदिर के पुजारी अशोक बैरागी,दीपक कछावा,रमेश बैरागी,अशोक जोશી,नितेश बैरागी मांगीलाल चौहान,ईश्वर टेलर,मनीष नीमा,गोवर्धन बारोड़िया,आशीष नीमा,सुरेश टेलर,दिनेश महोदीया,गोपाल राठोर आदि श्रद्धालु रहे मोजूद ।

 

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