भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र :- विधायक वरुण चौधरी
August 16th, 2020 | Post by :- | 56 Views

अंबाला , मुलाना ( गुरप्रीत सिंह मुल्तानी )

कांग्रेस कार्यालय साहा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा 74वां स्वंत्रता दिवस मनाया गया। इस मौके पर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी फूलचंद मुलाना व हल्का मुलाना विधायक वरूण चौधरी ने ध्वजारोहण कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 15 अगस्त का दिन भारतीय लोकतंत्र और हर भारतीय के लिए काफी खास दिन है। यही वह दिन है जब भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। इसी वजह से हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। आज के समय में भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

आज हम देश की आजादी की 74वीं सालगिरह मना रहे हैं। हमें जो आजादी मिली, वह आसानी से नहीं मिल गई। इसके लिए हमें बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी है और लंबा संघर्ष करना पड़ा है। महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्र शेखर आजाद जैसे हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया। तब जाकर हम आजाद फिजा में सांस लेने के काबिल हो पाए। देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने खूब मेहनत की। उन्होंने ब्रिटिश शासन से लड़ने में दिन-रात एक कर दिए। उन्होंने अपने आराम और जीवन के सारे सुख त्याग दिए। उनमें से कुछ जैसे भगत सिंह,चंद्रशेखर आजाद,जैसे स्वतंत्रता सेनानियों तो अपनी जान तक देश पर कुर्बान कर दी।

महात्मा गांधी के अहिंसा के आंदोलन से आजादी हासिल करने में काफी मदद मिली। इसके नतीजे में ही 200 सालों के ब्रिटिश शासन से हमें आजादी मिली। आजादी की लड़ाई में हर धर्म, जाति, रंग और नस्ल के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया विधायक ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास कुरबानियों का इतिहास रहा है और कांग्रेस के नेताओं ने तिरंगे की आन-बान और शान के लिए कुरबानियां दी है, चाहे उनको जान गंवा कर फांसी पर क्यों न चढना पड़ा हो. उन्होंने कहा कि चाहे भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी हो या भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हों, हमारे इन नेताओं ने देश की एकता को बरकरार रखने के लिए अपनी शहादत दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने देश को एकजुट रखने का संदेश दिया है. इसलिए हमें यदि तिरंगे की शान को बचाने के लिए विघटनकारी ताकतों से लड़ना पड़ा तो हम पीछे नहीं हटेंगे। इस मोके पर सैंकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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